कुकुरमुत्ते की तरह उगते निजी अस्पताल बन गये हैं मरीजों की कब्रगाह, प्रसव के बाद महिला की थमीं सांसे, आखिर जिम्मेदार कौन
Gargachary Times
24 July 2025, 15:12
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Firozabad
जिले के स्वास्थ्य विभाग की मेहरबानी कहें या फिर जिला प्रशासन की उदासीनता कि जिला में कुकुरमुत्तों की तरह उगते निजी अस्पताल और उनमें मानक विहीन स्वास्थ्य सेवायें मरीजों की कब्रगाह बनती जा रही है। उक्त अस्पताल में कार्यरत अप्रशिक्षित स्वास्थ्य कर्मी व डाॅक्टर के नाम पर कार्य करते झोलाछाप डाॅक्टर एक तरह से मरीजों को मौत ही बांट रहे हैं।
ऐसा ही एक मामला फिरोजाबाद जिले के शिकोहाबाद के एटा चौराहा और मैनपुरी चौराहे के बीच हाइवे रोड स्थित मायादेवी हाॅस्पीटल में देखने को मिला।
बताते चलें कि बीते दिन रविता देवी (24)पत्नी प्रेम किशोर निवासी धर्म नगर थाना नसीरपुर जिला फिरोजाबाद को प्रसव पीडा हुई। जिसे परिजन शिकोहाबाद के एटा चौराहे और मैनपुरी चौराहे हाइवे सर्विस रोड स्थित मायादेवी हाॅस्पीटल लेकर पहुॅचे। जहाॅ डाक्टरों ने उसको भर्ती कर लिया। बताते है कि महिला ने एक बच्ची को जन्म दिया। जिसके बाद महिला की तबियत बिगड गयी। डाक्टरों ने फिरोजाबाद के लिये रैफर कर दिया। जहाॅ डाक्टरों ने तबियत ज्यादा खराब होने के चलते आगरा ले गये। लेकिन महिला ने रास्ते में ही दम तोड दिया। जिसके बाद परिजन शव को हाॅस्पीटल लेकर आ गये और हंगामा करने लगे। सूचना मिलते ही पुलिस भी मौके पर पहुॅंच गयी। वहीं परिजनों ने सर्विस रोड पर बैठकर जाम कर दिया। काफी मशक्कत के बाद पुलिस ने मामला शांत कराया। मजे की बात तो यह है कि उक्त हाॅस्पीटलों के खिलाफ तमाम शिकायतें मिलने के बावजूद अस्पताल संचालकों के खिलाफ जिम्मेदार विभागों की तरह से कोई प्रभावी कार्यवाही नहीं की जाती है और उसका नजीता यह है कि मानक विहीन चलते इन अस्पतालों में उक्त झोलाछाप स्वास्थ्यकर्मियों द्वारा मरीजों पर तरह- तरह के प्रयोग किये जा रहे है और अप्रिशिक्षित डाक्टर मरीजों के बीमार शरीर से तब तक खेलते है जब तक वह बेजान नहीं हो जाता और जब बाजी इनके हाथ से निकल जाती है तो इसके बाद उक्त अस्पताल के लोग अपने हाथ खडे कर देते है। आखिर कब तक इस तरह से मरीजों की जिंदगी से इलाज के नाम पर कुकुरमुत्ते की तरह उगते अस्पतालों में लोगों की जिंदगी से खिलवाड किया जाता रहेगा और जिम्मेदार मौन साधे तमाशा देखते रहेगें। वहीं लोग दबी जुबान यह भी कह रहे है कि निजी अस्पतालों के संचालक स्वास्थ्य महकमे के आला अफसरों और स्थानीय प्रशासन को अपनी तरफ आंख मूंदे रखने की एवज में मुंह मांगी रकम देते है, जिससे जिम्मेदार अपना मुंह बंद रखकर तमाशबीन की मुद्रा में दिखाई देते है।