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सरकारी खांसी की दवा से बच्चों की मौत चिकित्सा विभाग में हड़कंप

Gargachary Times 3 October 2025, 21:40 627 views
Dholpur
सरकारी खांसी की दवा से बच्चों की मौत चिकित्सा विभाग में हड़कंप
राजस्थान सरकार ने जब निशुल्क दवा एवं जांच योजना शुरू की थी तब इसे लोगों के लिए ऐतिहासिक एवं क्रांतिकारी योजना बताया गया था तब किसी ने सोचा भी नहीं होगा कि इस पुण्य के काम में दुष्ट लोगों का प्रवेश हो जाएगा तथा इन के लिए पैसा आदमी की जान से ज्यादा कीमती होगा इसका जीता-जागता प्रमाण हाल ही में सरकार की ओर से खांसी के लिए दी जा रही एक दबा के रूप में सामने आया है इस कफ सिरप को पीने से कई लोगों की जान जाने के बाद अब कागजी कार्यवाहियां करने का परंपरागत राग अलापा जा रहा है दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करेंगे कंपनी को ब्लैक लिस्टेड किया जाएगा आदि आदि सरकारी अस्पतालों में भेजी गई कफ सिरप डेक्सोमेथार्रफिनएचपीआरआईपी फिलहाल रोगियों को वितरित नहीं की जा रही है घर-घर जाकर दवा पीने वालों की जानकारी हासिल की जा रही है जबकि अब तक सरकारी अस्पतालों में बच्चों से लेकर वृद्धो तक रेवड़ियों की तरह यह खांसी की सिरप बांटी गई है इस प्रकार की घटनाओं से लोगों का सरकारी दवाइयों से विश्वास उठा जा रहा है सरकारी अस्पतालों में चल रही चिकित्सकों की कमी दवा के नाम पर की जा रही खानापूर्ति जग जाहिर है इसीलिए धन्ना सेठ बजाय सरकारी अस्पतालों के निजी अस्पतालों में मोटी रकम देकर अपना उपचार कराने जाते हैं मेहनतकश मजदूर निजी अस्पतालों में पैसे के अभाव में उपचार करा पाने में असमर्थ हैं तथा उनके लिए सरकारी अस्पताल ही एकमात्र सहारा है यदि ऐसे में सरकार द्वारा बाटी जा रही दवाइयां मानकों के अनुरूप नहीं मिलेंगी तो इन लोगों का ऊपर वाला ही रखवाला है प्रतिवर्ष कई दवाइयां अमानक घोषित कर दी जाती हैं जब तक अमानक घोषित की जाती हैं तब तक न जाने कितने रोगियों द्वारा इस दवा को ले लिया जाता है डेक्सो मथारफिन दवा का वितरण खांसी के लिए काफी समय से किया जा रहा है क्या सरकारी एवं संबंधित विभाग बिना जांच पड़ताल के इस प्रकार की दवाओको रेवड़ियों की तरह बांट रहा था इस विषय पर भी मंथन की आवश्यकता है तथा जिम्मेदार अधिकारियों पर इस घटना के बाद क्या कोई कार्यवाही होगी सय संस फार्मा कंपनी की डेक्सट्रो मेथारपिन एच बीआर सिरप सिरप आईपी१३.५मिली ग्राम -५मिली के पीने से तीन बच्चों की मौत का मामला सामने आने के बाद विभाग हरकत में आया अब विभाग द्वारा जांच के बाद यह दावा किया जा रहा है के यह दवा चिकित्सक की पर्ची में लिखी ही नहीं गई है उनके परिवार जनों के लिए यह दवा लिखी गई थी बच्चों के बीमार होने पर परिजनों द्वारा यह दवा पिलाई गई इसके बाद उनकी तबीयत बिगड़ी सीकर के गांव खोरी के नित्यांश को बुखार जुकाम होने परपी एचसी झुंझुनू में दिखाया गया था मृतक की मां के अनुसार बच्चो को खांसी आने पर यह दवा पिलाई गई सुबह बच्चों की तबीयत खराब होने पर सी करके कल्याण हॉस्पिटल ले जाया गया जहां चिकित्सकों ने उसे मृतघोषित कर दिया दूसरी घटना भरतपुर के बैर के गांव लोहासा में बच्चों की तबीयत खराब होने पर 23 सितंबर को उप जिला चिकित्सालय बैर में दिखाया गया जहां डॉक्टर द्वारा से खांसी की सिरप दी गई जैसे उसकी तबीयत बिगड़ गई और दोबारा उसे अस्पताल में दिखाया गया गंभीर हालत होने पर पहले उसे भरतपुर बाद में जयपुर रैफर कर दिया गया 27 सितंबर को उपचार के दौरान बच्चों ने दम तोड़ दिया वास्तविकता के धरातल पर उतरकर देखें तो सब कुछ राम भरोसे ही नजर आता है आवश्यकता है पूरे सिस्टम को साफ करने की जिसमें जंग लग चुकी है जब तक दूध का दूध और पानी का पानी नहीं किया जाएगा तब तक तू डाल डाल में बात-पाठ वाली कहावत चरितार्थ होती रहेगी
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