प्रमोशन ऑफ एग्रीकल्चर मैकेनाइजेशन फॉर इनसीटू मैजगमेंट ऑफ काप रेज्जड्यू योजनान्तर्ग एक दिवसीय गोष्ठी का आयोजन
Gargachary Times
14 October 2025, 19:49
111 views
Firozabad
कलेक्ट्रेट सभागार में प्रमोशन ऑफ एग्रीकल्चर मैकेनाइजेशन फॉर इनसीटू मैनजमेंट ऑफ काप रेज्जड्यू योजनान्तर्गत एक दिवसीय फसल अवशेष प्रबधन गोष्ठी का आयोजन जिलाधिकारी महोदय की अध्यक्षता की गयी। जिसमें मुख्य विकास अधिकारी, अपर जिलाधिकारी (नमामि गंगे), जप कृषि निदेशक, मुख्य पशुचिकित्साधिकारी, बेसिक शिक्षाधिकारी, जिला कृषि अधिकारी, भूमि संरक्षण अधिकारी प्रथम एवं चतुर्थ, उप जिलाधिकारी टूण्डला, फिरोजाबाद, तहसीलदार जसराना, खण्ड विकास अधिकारी मदनपुर, हाथवंत, अरांव, एका, नारखी आदि उपस्थित रहे।
मुख्य विकास अधिकारी द्वारा ने कहा कि समस्त खण्ड विकास अधिकारी ग्राम स्तर पर होने वाली खुली बैठकों के माध्यम से फसल अवशेष प्रबंधन के बारे में प्रचार प्रसार करान सुनिश्चित करेगें और समस्त पुलिस थाना प्रभारी अपने-अपने क्षेत्र में भ्रमण शील रहेगें। क्षेत्र में किसी भी दशा में फसल अवशेष नहीं जलाने देगें ग्राम प्रधानों के माध्यम से पराली को गौशालाओं में भेजा जाये पशुचारे एवं बिछावन के रूम में प्रयोग हो सके। समस्त कृषक जिन्हें अनुदान में फसल अवशेष प्रबंधन के यंत्र प्राप्त हुये हैं वे ज्यादा से ज्यादा किसानों के यहाँ इनका प्रयोग करें। प्रत्येक कम्बाइन हार्वेस्टर मशीन में सुपर स्ट्रा मैनेजमेंट सिस्टम अवश्य लगा हो अन्यथा उसे सीज कर दिया जाये। साथ ही समस्त उपजिलाधिकारी फिरोजाबाद को निर्देश दिये कि यदि फसल अवशेष जलने की घटना प्रकाश में आती है तो अर्थदण्ड के रूप में 02 एकड से कम क्षेत्र के लिये रू0 2500/,02 एकड से 05 एकड क्षेत्र के लिये रू0 5000 / 05 एकड से अधिक क्षेत्र के लिये रू0 15000 / तक पर्यावरण कम्पन्सेशन की वसूली की जाये। फसल अवशेष जलाने से रोकने के लिये गठित विकास खण्ड स्तरीय, तहसील स्तरीय, जनपद स्तरीय कमेटी की बैठक कर ली जाये। विकसित उत्तर प्रदेश समर्थ उत्तर प्रदेश 2047 के अन्तर्गत कृषकों एवं ग्राम वासियों को samarthuttarpradesh.up.gov.in बेवसाइड के माध्यम से अधिक से अधिक सुझाव साझा कराये जाने के लिये निर्देशित किया गया।
उप कृषि निदेशक द्वारा अवगत कराया गया कि फसल अवशेष जलाने से मावन स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पडता है, जिसके कारण दमा और अस्थमा जैसे सॉस की बीमारियो, चर्म रोगो की शिकायत एवं कैंसर जैसी बीमारियों होती है साथ ही ग्लोबल बार्मिंग में वृद्धि, ऑजोन परत का नष्ट होना, अत्यधिक मात्रा में कार्बनडाई ऑक्साइड गैस का उत्सर्जन, मृदा में जैविक कार्बन सूक्ष्म जीवों का नष्ट होना एवं मृदा की भौतिक संरचना पर प्रतिकूल प्रभाव पडता है।
फसल अवशेष प्रबंधन के लिये विभाग द्वारा विभिन्न प्रकार के कृषि यंत्र जैसे हैपी सीडर, स्मार्ट सीडर, मल्वर, एम०बी० प्लाऊ, बेलिंग मशीन एवं कस्टम हायरिंग सेण्टर ग्रामीण उद्यमी, फार्म मशीनरी बैक आदि कृषकों एवं एफ०पी०ओ० उपलब्ध करायी गयी हैं जिसका फसल अवशेष प्रबंधन में उपयोग किया जा रहा है। फसल अवशेष को सडाने के लिये बायोडिकम्पोजर का प्रयोग करें, 25-30 किग्रा० यूरिया को खेत में पानी भरने के साथ छिडकाव करने से भी फसल अवशेष जल्दी सड जाते हैं।
कार्यक्रम में मुख्य विकास अधिकारी महोदय द्वारा फसल अवशेष प्रबंधन हेतु प्रचार वाहन को हरी झण्डी दिखा कर रवाना किया गया।
अन्त में उप कृषि निदेशक फिरोजाबाद द्वारा धन्यवाद ज्ञापित कर गोष्ठी का समापन किया।