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वृन्दावन: 54 साल बाद खुला ठाकुर बांके बिहारी का 'खजाना', भारी भीड़ और गहमागहमी के बीच खुला तोष खाना

Gargachary Times 18 October 2025, 18:27 310 views
Mathura
वृन्दावन: 54 साल बाद खुला ठाकुर बांके बिहारी का 'खजाना', भारी भीड़ और गहमागहमी के बीच खुला तोष खाना
​वृन्दावन। करोड़ों भक्तों के आराध्य ठाकुर बांके बिहारी जी के खजाना खुलने का लंबा इंतजार धनतेरस के पावन अवसर पर आखिरकार खत्म हुआ। सुप्रीम कोर्ट द्वारा मंदिर संचालन के लिए गठित हाईपावर कमेटी के निर्देश पर, 18 अक्टूबर को दोपहर 1 बजे मंदिर के बहुचर्चित खजाने को खोलने की प्रक्रिया शुरू की गई। ​खजाना खुलने की खबर पूरे क्षेत्र में जंगल की आग की तरह फैल गई, जिसके चलते मंदिर के आस-पास श्रद्धालुओं और उत्सुक लोगों की भारी भीड़ जमा हो गई। लोगों में यह जानने की बेचैनी थी कि आखिर इतने वर्षों बाद खुल रहे खजाने में क्या रखा है। हालांकि, इस दौरान वहां यह चर्चा भी गर्म रही कि असली संपत्ति तो पहले ही गायब हो चुकी होगी। ​पूर्व हाईकोर्ट जज की अध्यक्षता वाली हाईपावर कमेटी के अध्यक्ष अशोक कुमार के आदेश पर यह कार्रवाई हुई। अपर जिलाधिकारी (एडीएम) पंकज वर्मा ने बताया कि जूनियर डिवीजन सिविल जज की उपस्थिति में खजाना खोला गया। मौके पर एडीएम, सिटी मजिस्ट्रेट, एसपी सिटी, सीएमओ और सीएफओ सहित वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे। सीओ सदर और सीओ सिटी के नेतृत्व में भारी पुलिस बल को व्यवस्था बनाए रखने के लिए तैनात किया गया था। ​चूंकि यह कमरा लगभग 54 साल बाद खोला गया, इसलिए सुरक्षा और बचाव के विशेष इंतजाम किए गए थे। वन विभाग के अधिकारी और कर्मचारी इस आशंका के चलते मुस्तैद रहे कि बंद कमरे से कोई जहरीला सर्प या कीड़ा निकल सकता है। साथ ही, किसी जहरीली गैस की स्थिति से निपटने के लिए डॉक्टरों की टीम के साथ ऑक्सीजन सिलेंडर की भी व्यवस्था की गई थी। ​खजाना खोले जाने की इस महत्वपूर्ण प्रक्रिया के दौरान कमेटी के सदस्य सेवायत दिनेश गोस्वामी और रजत गोस्वामी के बीच तीखी बहस भी देखने को मिली, जिससे माहौल में थोड़ी गर्मागर्मी आ गई। रजत गोस्वामी ने कहा कि इस खजाने के खुलने से जनता को क्या लाभ मिलेगा। खजाना खोलने के लिए जो लोग अंदर गए हैं क्या किसी ने उनकी चेकिंग की। क्योंकि जब भी गुल्लक खोली जाती है तो उसके लिए कुछ नियमों का का प्रयोग किया जाता है लेकिन आज ऐसा कुछ भी देखने को नहीं मिला। यदि इनका मन साफ है तो लाइव वीडियो के माध्यम से सभी को क्यों नहीं दिखाया जा रहा कि अंदर क्या कार्य चल रहा है और क्या क्या निकल रहा है। यहां तक की मीडिया की एंट्री पर भी पाबंदी लगा दी गई है। निश्चित रूप से दाल में कुछ काला नजर आता है।
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