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मोबाइल वरदान है या अभिशाप, पिता ने टोका तो बच्चे ने फंदे से लटक कर जान दे दी

Gargachary Times 9 November 2025, 19:59 210 views
Rajasthan
मोबाइल वरदान है या अभिशाप, पिता ने टोका तो बच्चे ने फंदे से लटक कर जान दे दी
यदि आपका बच्चा मोबाइल देखने में ज्यादा रुचि लेता है तथा समय मिलते ही मोबाइल देखने लगता है तो हो जाइए सावधान यह आदत आपके बच्चे का न सिर्फ भविष्य खराब कर सकती है बल्कि उसके लिए जानलेवा साबित हो सकती है बच्चों को मोबाइल में लगा देखकर जब पिता ने डाटा तो उसने अंदर जाकर फांसी लगाकर अपनी जान दे दी यह दुर्घटना धौलपुर जिले के कंचनपुर थाने के कुरेदा गांव में घटित हुई जहां 12 वर्षीय विष्णु मोबाइल में घंटो लगा रहता तथा उसे ऑनलाइन फायरगेम खेलने की आदत लग गई जब परिजनों को पता लगा तो विष्णु के पिता ने विष्णु को डांट दिया शाम को जब वह खाना खाने बैठे तो विष्णु को आवाज़ थी उत्तर नहीं मिलने पर उसके कमरे में जाकर देखा तो उनकी चीख निकल गई विष्णु फंदे से झूम रहा था तत्काल उसे सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में ले जाया गया जहां से उसे जिला चिकित्सालय रेफर कर दिया गया कुछ देर बाद विष्णु ने दम तोड़ दिया यह तो महज एक उदाहरण है मोबाइल के कारण न जाने कितने बच्चे काल ही मौत के मुंह में जा चुके हैं तथा कुछ बच्चे मानसिक अवसाद तथा दिमागी संतुलन ठीक हो चुके हैं मोबाइल आज जीवन का अभिन्न अंग बन चुका है मानो चिकित्सकों की माने तो बच्चों को शुरू से ही मोबाइल के खतरों के बारे में बताना बेहद जरूरी है अन्यथा स्थिति जटिल से जटिलतम हो सकती है जिससे पार पाना अभिभावकों के लिए बड़ी चुनौती बन जाती है कम उम्र के बच्चों में मोबाइल फोन के आंकड़े चौंकाने वाले हैं मात्र 18 महीने का बच्चा औसतन 3 से 5 घंटे मोबाइल के संपर्क में व्यतीत कर रहा है मां-बाप के मन में मोबाइल में व्यस्त बच्चों को देखकर कुछ पल प्रसन्नता भले ही हो किंतु बच्चों को चुप कराने एवं उनकी जिद के आगे झुकना बच्चों के जीवन से खिलवाड़ ही माना जाएगा आंकड़ों की माने तो 12 वर्ष 18 वर्ष की उम्र के बच्चों में मोबाइल देखने की लत में बढ़ोतरी हुई है स्क्रीन को आंखों के पास लाकर मोबाइल फोन देखने से आंखों को नुकसान होना स्वाभाविक है मोबाइल देखने के दौरान पलके नहीं झपकाने से इसे कंप्यूटर वी जन सिंड्रोम कहा जाता है ऐसा देखा गया है की बच्चों के मोबाइल पर लगातार कार्टून देखने से उनका व्यवहार कार्टून जैसा होने लगता है ओ कि दिमागी बीमारी का संकेत है बच्चे मोबाइल में एक बार गेम खेलना शुरू करते हैं तो वह लगातार गेम खेलने के आदि होने लगते हैं हिंसक गेम खेलने से बच्चों में आक्रामकता चिड़चिड़ापन आता है आज एक मोबाइल के संपर्क में रहने से बच्चे एकांकी हो जाते हैं तथा व्यावहारिकता काम हो जाती है वर्तमान परिपेक्ष में यह बात बड़ों पर भी लागू होती है यह सब के लिए अकेले बच्चों को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता अभिभावकों को भी अपनी आदतों में सुधार करना होगा बच्चों के सामने आवश्यक हो तभी मोबाइल चलाएं अपने मोबाइल का लॉक लगा कर रखें तथा ऑनलाइन गेम डिलीट करें सबसे बड़ी बात बच्चों के साथ समय बताएं एवं कुछ पल बच्चों के साथ घर के बुजुर्गों को दें
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