डॉ . बब्बू सारंग जनपद न्यायाधीश अध्यक्ष जिला विधिक सेवा प्राधिकरण फिरोजाबाद के कुशल मार्गदर्शन में जागरुकता शिविर का आयोजन
Gargachary Times
19 November 2025, 18:47
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Firozabad
उ०प्र० राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण लखनऊ के निर्देशानुसार माननीय डॉ. बब्बू सारंग, जनपद न्यायाधीश/अध्यक्ष, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण फिरोजाबाद के कुशल मार्गदर्शन में आज दिनांक 19.11.2025 को अपराह्न 12:00 बजे दाऊ दयाल महिला महाविद्यालय, फिरोजाबाद में छात्राओं हेतु विधिक साक्षरता/जागरूकता शिविर का आयोजन किया गया।
इस अवसर पर प्राधिकरण के सचिव श्री अतुल चौधरी ने उपस्थित समस्त छात्राओं को संबोधित करते हुए प्राधिकरण द्वारा उपलब्ध करायी जा रही विभिन्न योजनाओं और सेवाओं के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि जिला विधिक सेवा प्राधिकरण द्वारा सभी पात्र व्यक्तियों, विशेष रूप से महिलाओं, बच्चों, और कमजोर वर्गों को निशुल्क विधिक सहायता प्रदान की जाती है। इसमें मुकदमे की पैरवी के लिए वकील की नियुक्ति, कागजी कार्यवाही, और कानूनी सलाह शामिल है। यह सेवा विशेष रूप से उन लोगों के लिए है जो आर्थिक रूप से कमजोर हैं और कानूनी मदद का खर्च वहन नहीं कर सकते।
इसी क्रम में छात्राओं को PoSH Act के बारे में भी जागरूक किया, जो कार्यस्थलों और शिक्षा संस्थानों में यौन उत्पीड़न से बचाव हेतु लागू किया गया है। इस कानून के तहत महिलाओं को कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न से बचाने के लिए सख्त प्रावधान हैं, और किसी भी प्रकार की शिकायत पर त्वरित कार्रवाई की जाती है। अागे बताया कि प्राधिकरण समय-समय पर ऐसे शिविरों का आयोजन करता है, जिनमें लोगों को उनके कानूनी अधिकारों, सुरक्षा उपायों, और विभिन्न कानूनी प्रक्रियाओं के बारे में जानकारी दी जाती है। इस प्रकार के शिविरों का उद्देश्य समाज में विधिक जागरूकता फैलाना है, ताकि लोग अपने अधिकारों के बारे में जागरूक रहें और उन्हें लागू करने में सक्षम हों। प्राधिकरण यह सुनिश्चित करता है कि समाज के हर वर्ग को समान और त्वरित न्याय मिले, खासकर उन लोगों को जो न्यायालयों तक पहुँचने में असमर्थ हैं। यह प्राधिकरण विभिन्न कानूनी मदद योजनाओं के माध्यम से यह सुनिश्चित करता है कि कोई भी व्यक्ति कानूनी सहायता से वंचित न रहे।
उन्होंने विशेष रूप से आज के डिजिटल युग में महिलाओं को साइबर सुरक्षा के बारे में जागरूक किया। उन्होंने बताया कि वर्तमान समय में जहां इंटरनेट और सोशल मीडिया का उपयोग बढ़ा है, वहीं महिलाओं और बच्चों के साथ साइबर अपराधों में भी वृद्धि हो रही है। छात्राओं को साइबर अपराधों जैसे कि साइबर स्टॉकिंग, ऑनलाइन उत्पीड़न, फर्जी पहचान बनाना, और सोशल मीडिया पर असमान्य या धमकी देने वाली गतिविधियों से बचने के उपायों के बारे में बताया। उन्होंने यह भी बताया कि महिलाओं को अपनी व्यक्तिगत जानकारी, जैसे कि फोटो, मोबाइल नंबर, पता आदि को सार्वजनिक प्लेटफॉर्म पर साझा करने से बचना चाहिए, क्योंकि ये जानकारी गलत हाथों में जा सकती है और अपराधी इसका दुरुपयोग कर सकते हैं। साथ ही, उन्होंने यह भी बताया कि यदि किसी महिला के साथ साइबर उत्पीड़न या अन्य कोई साइबर अपराध घटित हो, तो उसे तुरंत पुलिस या साइबर हेल्पलाइन पर शिकायत करनी चाहिए। प्राधिकरण महिलाओं के लिए साइबर सुरक्षा के संबंध में कानूनी मदद और मार्गदर्शन भी प्रदान करता है, ताकि वे साइबर अपराधों से बच सकें और अपनी सुरक्षा सुनिश्चित कर सकें।
श्री अतुल चौधरी ने छात्राओं से यह अपील भी की कि वे अपने अधिकारों के प्रति जागरूक रहें और आवश्यकता पड़ने पर विधिक सहायता प्राप्त करने के लिए प्राधिकरण से संपर्क करें। उन्होंने बताया कि प्राधिकरण का उद्देश्य न्याय की पहुंच को सरल और सुलभ बनाना है, ताकि हर व्यक्ति को न्याय मिल सके।
इसी क्रम में, मुख्य न्याय रक्षक श्रीमती मनोरमा मसीह ने PoSH Act (कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न निषेध कानून) के बारे में छात्राओं को विशेष रूप से जागरूक किया। उन्होंने बताया कि यह कानून कार्यस्थलों और शिक्षा संस्थानों में महिलाओं के यौन उत्पीड़न से बचाव हेतु लागू किया गया है। इसके तहत महिलाओं को कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न से बचाने के लिए सख्त प्रावधान हैं, और किसी भी प्रकार की शिकायत पर त्वरित कार्रवाई की जाती है। उन्होंने छात्राओं को अपने अधिकारों के प्रति सजग रहने की सलाह दी और यह बताया कि यदि किसी छात्रा या महिला को कार्यस्थल या शिक्षा संस्थान में यौन उत्पीड़न का सामना करना पड़े, तो वह तत्काल इस कानून के तहत कार्यवाही कर सकती है।
इसी अवसर पर न्याय रक्षक सुश्री स्वाति मिश्रा द्वारा ‘घरेलू हिंसा अधिनियम, 2005’ के बारे में विस्तृत जानकारी दी गई। उन्होंने बताया कि घरेलू हिंसा केवल शारीरिक हिंसा तक सीमित नहीं है, बल्कि मानसिक, भावनात्मक, आर्थिक और मौखिक प्रताड़ना भी इसके अंतर्गत आती है। उन्होंने छात्राओं को समझाया कि यह कानून महिलाओं को उनके घर, परिवार या रिश्तों में होने वाली किसी भी प्रकार की हिंसा से संरक्षण प्रदान करता है।
उन्होंने बताया कि घरेलू हिंसा की स्थिति में पीड़िता सुरक्षा आदेश, निवास आदेश, भरण-पोषण, क्षतिपूर्ति, तथा काउंसलिंग जैसी कई सहायता और कानूनी उपाय प्राप्त कर सकती है। उन्होंने यह भी कहा कि प्राधिकरण उन सभी महिलाओं को नि:शुल्क विधिक सहायता उपलब्ध कराता है, जो घरेलू हिंसा के कारण न्याय पाने में कठिनाई महसूस करती हैं। सुश्री स्वाति मिश्रा ने छात्राओं से यह भी अपील की कि वे अपने आसपास ऐसी किसी भी महिला की सहायता के लिए आगे आएँ, जिसे घरेलू हिंसा का सामना करना पड़ रहा हो, और ऐसी स्थितियों में तुरंत पुलिस, महिला हेल्पलाइन 1090 या विधिक सेवा प्राधिकरण से संपर्क करने की सलाह दें। उन्होंने कहा कि कानून का उद्देश्य महिलाओं को सशक्त बनाना और उन्हें भयमुक्त एवं सम्मानजनक जीवन प्रदान करना है।
कार्यक्रम का संचालन डा० माधवी सिंह द्वारा किया गया। शिविर के दौरान महाविद्यालय की प्रधानाचार्य डा० रैनू वर्मा और अन्य शिक्षकगण भी उपस्थित रहे। छात्राओं ने इस शिविर में अपनी सक्रिय भागीदारी दिखाई और विभिन्न विधिक मुद्दों पर सवाल पूछे।
अंत में, प्राधिकरण के अधिकारियों ने शिविर की सफलता पर सभी का धन्यवाद ज्ञापित किया और भविष्य में इस प्रकार के कार्यक्रमों को और विस्तारित करने की योजना बनाई।