सुमित कुमार चौहान जिला कृषि रक्षा अधिकारी फिरोजाबाद द्वारा कीट रोगो के नियन्त्रण एवं बचाव हेतु
Gargachary Times
22 November 2025, 20:41
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Firozabad
तापमान में उतार चढ़ाव के कारण होने वाले कीट-रोग के प्रकोप की संभवना को दृष्टिगत रखते हुए सुमित कुमार चौहान, जिला कृषि रक्षा अधिकारी, फिरोजाबाद द्वारा कीट-रोगो के नियंन्त्रण एवं बचाव हेतु निम्नवत सुझाव एवं संस्तुतियां की जा रही है। जिन्हें अपनाकर किसान भाईयों द्वारा फसल में होने वाली क्षति को रोका जा सकता है।
1- धान्य फसलें (गेंहू, मक्का)
गेंहू -
बीज शोधन- अनावृत कंडुआ और करनाल बंट के नियंत्रण हेतु बुवाई से पूर्व कार्बेन्डाजिम 50 प्रति०डब्लू०पी० या कार्बोक्सिन 75 प्रति०डब्लूपी० की 2.5 ग्राम मात्रा प्रति किग्रा बीज की दर से बीज शोधन करें।
भूमि शोधन - भूमिजनित रोगों के बचाव हेतु ट्राईकोडर्मा 2.5 किग्रा0/हे० की दर से 60-75 किग्रा गोबर की खाद में मिलाकर अंतिम जुताई के समय खेत में मिलाएं।
दीमक / गुजिया नियंत्रण इसके लिए ब्युवेरिया बेसिआना 1.15 प्रति०की 2.5 किग्रा० मात्रा प्रति० हे० की दर से गोबर की खाद में मिलाकर भूमि शोधन करें। खड़ी फसल में क्लोरपाईरीफास 20 प्रति०ई०सी० 2.5 ली० मात्रा प्रति०हे० सिंचाई के पानी के साथ प्रयोग करें।
खरपतवार निनयंत्रण- संकरी पत्ती वाले (गेहुसा, जंगली जई) के लिए सल्फोसल्फ्यूरान 75 प्रति०डब्लू०जी० या क्लोडिनाफास प्रोपेर्जिल 15 प्रति०डब्लू०पी० तथा चौड़ी पत्ती वाले खरपतवारों के लिए मेटसल्फ्यूरान मिथाइल 20 प्रति० डब्लू०पी० या कारकेंट्राजॉन इथाइल 40 प्रति० डी०एफ० का बुवाई के 20-25 दिन बाद छिड़काव करें।
मक्का -
तना बेधक 10 प्रति० मृत गोभ (आर्थिक क्षति स्तर) दिखने पर डाईमिथोएट 30 प्रति०ई०सी० की 660 मिली०/हे० या नोवालुरोन 05.25 प्रति०+ इमामेक्टिन बेन्जोएट 0.9 प्रति० ई०सी० की 1.5 ली0/हे० की दर से छिड़वाव करें।
फॉल आर्मी वर्ग- 20-25 पक्षीय आश्रय (वर्ड पर्चर) और 3-4 प्रकाश प्रपंच स्थापित करें। 35-40 फेरोमोन ट्रेप प्रति० हे० लगाकर भी प्रबंधन किया जा सकता है। रासायनिक नियंत्रण हेतु ब्रोफ्लोनिलाइड 20 प्रति०एस०सी० की 125 मिली०/हे० या क्लोरेनट्रानिलीप्रोल 47.85 प्रति एस०सी० की 75 मिली०/हे० प्रयोग करें।
2- तिलहन (राई/सरसों)
बीज जनित रोग 2.5 ग्राम थिरम 75 प्रति०किग्रा० बीज की दर से उपचारित करके बोयें। मेटालेक्सिल 2.0 ग्राम प्रति किग्रा० बीज से उपचारित करने पर सफेद गेरूई और तुलासिता रोग की प्रारम्भिक रोकथाम होती है।
आरा मक्खी - डाईमिथोएट 30 प्रति०ई०सी० 650 मिली०/हे० अथवा क्यूनालफास 25 प्रति०ई०सी०की 1.2 ली०/हे०की दर से छिड़काव करें।
3- दलहन (चना/मटर / मसूर)
बीज जनित रोग- बुवाई से पूर्व ट्राईकोडर्मा (4 ग्राम / किग्रा० बीज) या रासायनिक बीज शोधन हेतु थिरम 75 प्रति० (2ग्राम) एवं कार्बेन्डाजिम 50 प्रति० (1 ग्राम) के मिश्रण की 3 ग्राम प्रति० किग्रा बीज की दर से शोधित करें।
कटुआ कीट/कट वर्म मेटारेजियम एनिसोप्ली 2.5 किगा/हे० का सांयकाल छिड़काव करें। रासायनिक नियंत्रण हेतु क्लोरपाईरीफास 20 प्रति०ई०सी० 2.5 ली०/ हे०का छिड़काव करें।
पत्ती सुरंगक कीट- डाईमिथोएट 30 प्रति०ई०सी०की 650 मिली०/हे० का छिड़काव करें या कार्बोफ्यूरान 3 प्रति०सी०जी० 66 किग्रा / हे०का बुरकाव करें। मटर की तना मक्खी लेम्बडा साईहेलोथ्रिन 04.90 प्रति सी०एस० की 300 मिली०/हे०का छिड़काव करें।
4-आलू और गन्ना
आलू-ब्लैक स्कर्फ रोग से बचाव हेतु पेनफ्लूफेन 22.43 प्रति० एफ०एस० (83 मिली/100 ली० पानी में 800 किग्रा० बीज) या थाईफ्लूजामाइड 24 प्रति० एस०सी० (2.5 मिली/10 किग्रा०/ बीज) से बीज शोधन कर बुवाई करें।
गन्ना लाल सड़न रोग प्रतिरोधी किस्मों का प्रयोग करें और रोगग्रस्त फसल की रेटूनिंग न करें। रासायनिक नियंत्रण हेतु एजोक्सीस्ट्रोबिन 18.2+डाईफेनोकोनाजोल 11.4 प्रति० एस०सी० की 1 मिली० मात्रा प्रति०ली० की दर से घोल बनाकर छिड़काव करें।
दीमक (गन्ना/आलू)- ब्यूवेरिया बेसिआना 2.5 किग्रा मात्रा को 60-75 किग्रा गोबर की खाद में मिलाकर अंतिम जुताई के समय खेत में मिलाएं। नीम की खली 10 कुंतल/हे० की दर से बुवाई से पूर्व मिलाने से भी दीमक का प्रकोप कम होता है।