कड़ाके की ठंड और घने कोहरे से फसलों पर दोहरा असर, बचाव के लिए विशेषज्ञ सलाह
Gargachary Times
16 December 2025, 10:48
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जिले में कड़ाके की ठंड और घने कोहरे का प्रकोप शुरू हो चुका है, जिसका कृषि पर मिश्रित प्रभाव पड़ रहा है। जहाँ यह मौसम कुछ फसलों के लिए लाभकारी है, वहीं कई अन्य फसलों के लिए यह अत्यंत हानिकारक सिद्ध हो सकता है। ऐसे में किसानों को अपनी फसलों की विशेष देखभाल करने की आवश्यकता है। कृषि वैज्ञानिक डॉ. बलवीर सिंह ने बताया कि कृषि विज्ञान केंद्र हाथरस के अनुसार, यह मौसम मुख्य रूप से रबी की फसलों जैसे गेहूँ और जौ के लिए अनुकूल है। जैसे-जैसे ठंड बढ़ रही है, गेहूँ की फसल में फुटाव बढ़ रहा है, जो पैदावार के लिए बहुत लाभकारी है।
वहीं, दूसरी ओर घना कोहरा और पाला कई फसलों के लिए हानिकारक साबित हो सकता है, जिससे पैदावार में भारी गिरावट आ सकती है। आलू की फसल में उच्च आर्द्रता और कोहरे से उत्पन्न नमी फफूंद रोगों जैसे अगेती झुलसा (अल्टरनेरिया सोलानी) के तेजी से प्रसार के लिए आदर्श वातावरण बनाती है, जिससे कंद सड़ सकते हैं। सरसों में नमी के कारण सफेद रतुआ और तना गलन जैसे फफूंद जनित रोगों का खतरा बढ़ जाता है। इसके अलावा, टमाटर, बैंगन, मिर्च जैसी सब्जियों की नई पत्तियाँ और फूल पाले से नष्ट हो जाते हैं, जिससे फल लगने की प्रक्रिया रुक जाती है। पपीते के पौधे पाले के प्रति अत्यंत संवेदनशील होते हैं और पाला पड़ने पर अक्सर पूरी तरह से सूख जाते हैं। गोभी, फूलगोभी, और अन्य सब्ज़ियों की गुणवत्ता और उपज पर भी नकारात्मक असर पड़ता है।
पाले और कोहरे से बचाव के प्रभावी उपाय
किसान भाई निम्नलिखित उपायों को अपनाकर अपनी फसलों को कोहरे और पाले के हानिकारक प्रभाव से बचा सकते हैं:
• हल्की सिंचाई : जब पाला पड़ने की आशंका हो (तापमान 2-3 सेल्सियस से नीचे जाने की संभावना हो), तो शाम के समय खेतों में हल्की सिंचाई कर दें। सिंचाई करने से खेत का तापमान कुछ डिग्री बढ़ जाता है, जिससे पाले का असर कम होता है। ध्यान रहे, सुबह सिंचाई न करें।
• सल्फ़र का छिड़काव: सल्फ़र (गंधक) या सल्फ्यूरिक एसिड का छिड़काव करें। सल्फ़र फसलों में गर्मी पैदा करता है और प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाता है। विशेष ध्यान दें: सल्फ़र का इस्तेमाल पुष्पावस्था में न करें। सल्फ़र के प्रयोग से गेहूँ की फसल में पीला रतुआ और सरसों की फसल में चूर्णिल फफूंद जैसे फफूंद जनित रोगों का प्रभाव भी कम होता है।
• पलवार/कार्बन मल्चिंग: पौधों की जड़ों के पास पुआल, पराली या पॉलीथीन की परत बिछा दें। यह विधि मिट्टी की गर्मी को संरक्षित रखकर पाले से बचाव करती है।
• पोषक तत्व और थायोयूरिया: पौधों में पोटाश और सूक्ष्म पोषक तत्वों की कमी न होने दें, क्योंकि ये पौधों की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाते हैं। इसके साथ ही, थायोयूरिया 0.5 ग्राम प्रति लीटर पानी का छिड़काव भी अत्यंत लाभकारी पाया गया है।
• फफूंदनाशक का प्रयोग: कोहरे के कारण फफूंद जनित रोगों का प्रकोप बढ़ जाता है, इसलिए रोग के लक्षण दिखते ही तत्काल उपयुक्त फफूंदनाशक का प्रयोग करें।