जनसुनवाई पोर्टल बना 'कागजी खानापूर्ति' का अड्डा, डीएम कार्यालय के पटल पर मिलीभगत का आरोप
Gargachary Times
17 December 2025, 21:16
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Mathura
मथुरा। उत्तर प्रदेश सरकार की प्राथमिकता वाले जनसुनवाई पोर्टल (IGRS) और CPGRAMS पर शिकायतों के निस्तारण की शुचिता पर गंभीर सवाल खड़े हुए हैं। राया निवासी अमित अग्रवाल ने जिला मजिस्ट्रेट (DM), मथुरा को पत्र लिखकर कार्यालयी मिलीभगत और शिकायतों की खानापूर्ति का सनसनीखेज आरोप लगाया है।
शिकायत ही बन गई शिकायत का विषय
शिकायतकर्ता अमित अग्रवाल ने बताया कि उन्होंने शिकायत संदर्भ संख्या 60000250281856 विशेष रूप से इसलिए दर्ज की थी ताकि पूरी निस्तारण प्रक्रिया की विसंगतियों को उच्चाधिकारियों के संज्ञान में लाया जा सके। लेकिन विडंबना देखिए, डीएम कार्यालय के पटल से इस शिकायत को बिना पढ़े या मिलीभगत के चलते वापस उन्हीं अधिकारियों (अधिशाषी अधिकारी, राया) को भेज दिया गया, जिनके विरुद्ध जांच की मांग की गई थी।
पिछले 4 महीनों का कच्चा चिट्ठा
अमित ने पिछले चार महीनों में दर्ज की गई 13 प्रमुख शिकायतों की सूची सौंपी है, जिनमें मुख्य रूप से निम्न शामिल हैं:
* सड़क और पाइपलाइन का मुद्दा: IGRS सं. 60000250258189 में पाइपलाइन कार्य के बाद सड़क मरम्मत का झूठा दावा किया गया है।
* निविदा अनियमितता: IGRS सं. 60000250261844 में निविदा प्रक्रिया पर अपर्याप्त जवाब दिया गया।
* अन्य लंबित मामले: GOVUP/E/2025/013684004, 013346425 और 012366528 सहित कई अन्य शिकायतें आज भी समाधान की राह देख रही हैं。
फीडबैक को दिखाया जा रहा ठेंगा
आरोप है कि समाधान से असंतुष्ट होने पर जब नागरिक 'Poor Feedback' या 'Unsatisfied' फीडबैक देता है, तो नियमानुसार उच्चाधिकारी को इसका संज्ञान लेना चाहिए। लेकिन मथुरा में जनसुनवाई पटल के कर्मचारी इन फीडबैक को नजरअंदाज कर शिकायतों को जबरन उसी पुराने जवाब के साथ बंद कर देते हैं।
उच्च-स्तरीय ऑडिट की मांग
अमित अग्रवाल ने जिला मजिस्ट्रेट से मांग की है कि जनसुनवाई पटल के उत्तरदायी कर्मचारियों की भूमिका की जांच की जाए और उनके फोन नंबर से संबंधित पिछले 4 महीनों की सभी शिकायतों का 'High-level Audit' कराया जाए। शिकायतकर्ता का कहना है कि यदि मुख्यमंत्री की प्राथमिकता वाले पोर्टल पर ही न्याय नहीं मिलेगा, तो आम जनता कहाँ जाएगी?