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योगी जी की 'जीरो टॉलरेंस' नीति को राया नगर पंचायत का ठेंगा! ₹36 लाख का 'टेंडर घोटाला', चहेतों को 'रेवड़ी' बांटने की तैयारी

Gargachary Times 22 December 2025, 21:02 198 views
Mathura
योगी जी की 'जीरो टॉलरेंस' नीति को राया नगर पंचायत का ठेंगा! ₹36 लाख का 'टेंडर घोटाला', चहेतों को 'रेवड़ी' बांटने की तैयारी
मथुरा। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी की भ्रष्टाचार के विरुद्ध 'जीरो टॉलरेंस' की नीति और पारदर्शी सुशासन के संकल्प को मथुरा की राया नगर पंचायत के अधिकारी खुलेआम चुनौती दे रहे हैं। नगर पंचायत सदस्य और निर्भीक पत्रकार अमित अग्रवाल द्वारा शासन को प्रेषित नए साक्ष्यों ने प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप मचा दिया है। आरोप है कि अधिशासी अधिकारी (EO) द्वारा जानबूझकर उन मुख्य विकास कार्यों को सरकारी रिकॉर्ड और विज्ञापनों से गायब कर दिया गया, जिनमें भारी वित्तीय अनियमितता की बू आ रही है। EO की 'गुमराह' करने वाली आख्या: विज्ञापन से गायब किए ये मुख्य कार्य! नगर पंचायत सदस्य अमित अग्रवाल ने खुलासा किया है कि EO ने अपनी निस्तारण आख्या में केवल ₹10 लाख से कम लागत वाले कार्यों का जिक्र कर मामले को रफा-दफा करने की कोशिश की है। जबकि वास्तविकता में, राजपत्र (Gazette) में सूचीबद्ध होने और समाचार पत्र में प्रकाशित करने के आदेश के बावजूद, कई महत्वपूर्ण कार्यों को विज्ञापन से जानबूझकर बाहर रखा गया: विज्ञापन से गायब किए गए कार्य (आइटम 1, 3, 4, 5): ये सभी कार्य मूल निविदा सूचना का हिस्सा थे, लेकिन इन्हें अखबार के विज्ञापन में जगह नहीं दी गई। इनमें वार्ड नं. 1 में सड़क व नाली निर्माण (अनुमानित लागत ₹8,80,689) जैसे महत्वपूर्ण कार्य शामिल हैं। केवल एक कार्य का प्रकाशन (आइटम 2): समाचार पत्र में केवल राम मंदिर से सुल्तानगंज तक 160mm PVC पाइपलाइन बिछाने के कार्य (अनुमानित लागत ₹9,86,878) को ही प्रकाशित कर औपचारिकता पूरी की गई। नियमों का खुला उल्लंघन: ₹10 लाख के करीब की लागत वाले कार्यों को विज्ञापन से जानबूझकर बाहर रखना और उनके लिए पारदर्शी प्रक्रिया का पालन न करना भ्रष्टाचार की ओर सीधा संकेत है। अवैज्ञानिक 'गोपाल बाग' परियोजना: ₹36.59 लाख के इन कार्यों में पेयजल लाइन के ठीक नीचे सीवर/गंदे पानी की लाइन बिछाने का जन-स्वास्थ्य विरोधी कार्य किया जा रहा है। आश्चर्य की बात यह है कि जल निकासी के लिए मात्र 12 सेंटीमीटर व्यास की अपर्याप्त पाइपलाइन का प्रयोग कर सार्वजनिक धन का बंदरबांट किया जा रहा है। जनसुनवाई पोर्टल पर 'लीपापोती': जिलाधिकारी की जवाबदेही पर सवाल हैरानी की बात यह है कि जब इस गंभीर अनियमितता की शिकायत जनसुनवाई पोर्टल (पंजीकरण संख्या: GOVUP/E/2025/0136188) और मुख्य IGRS संदर्भ संख्या 12145250114752 पर की गई, तो जिलाधिकारी कार्यालय द्वारा तीन माह से अधिक का विलंब किया गया। बड़ा सवाल: जिलाधिकारी महोदय, क्या आप अपने अधीनस्थ अधिशासी अधिकारी की इन संदिग्ध गतिविधियों पर पैनी नज़र रख रहे हैं? आप जिले के प्रशासनिक मुखिया होने के नाते न केवल उनके 'लाइन हेड' हैं, बल्कि जनसुनवाई पोर्टल की जवाबदेही भी आप पर है। जब शिकायतकर्ता ने साक्ष्यों के साथ यह दिखाया है कि EO अपनी ही परियोजना की जांच कर स्वयं को 'क्लीन चिट' दे रहे हैं, तो क्या इसे 'हितों का टकराव' (Conflict of Interest) नहीं माना जाना चाहिए? जांच की मांग: कहीं फाइलों में न दब जाए भ्रष्टाचार की गंध अमित अग्रवाल ने मंडलायुक्त आगरा और प्रमुख सचिव को पत्र भेजकर मांग की है कि इस पूरे मामले की उच्च स्तरीय तकनीकी जांच जल निगम या PWD की स्वतंत्र टीम से कराई जाए। उन्होंने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि जांच वापस उसी EO को सौंपी गई, तो साक्ष्यों के साथ छेड़छाड़ निश्चित है। अब देखना यह है कि क्या जिलाधिकारी मथुरा मुख्यमंत्री जी की भ्रष्टाचार मुक्त नीति का मान रखेंगे या भ्रष्टाचार का यह 'राया मॉडल' इसी तरह फलता-फूलता रहेगा?
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