सावधान राया! क्रिसमस और नए साल पर नगर पंचायत का 'जहरीला' तोहफा: क्या आप हेपेटाइटिस और पीलिया के लिए तैयार हैं...?
Gargachary Times
23 December 2025, 20:21
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Mathura
मथुरा। इस साल क्रिसमस और नए साल के जश्न के बीच, नगर पंचायत राया अपने नागरिकों और उनके परिवारों को एक ऐसा 'उपहार' देने जा रही है, जो खुशियों की जगह अस्पताल के चक्कर लगवा सकता है। नगर के मुख्य मार्ग राम मंदिर से लेकर कटरा बाजार मोड़ तक जल निकासी परियोजना के तहत बिछाई गई सीवर लाइन के ठीक नीचे ही पीने के पानी की पाइपलाइन को दबा दिया गया है । यह अवैज्ञानिक इंजीनियरिंग राया के नागरिकों के स्वास्थ्य के लिए एक बड़ा 'बीमारी का बम' तैयार कर चुकी है।
1. हेपेटाइटिस और पीलिया: राया के हर परिवार के लिए बड़ा खतरा
नगर पंचायत द्वारा जिस तरह मानकों को ताक पर रखकर पेयजल लाइन के साथ सीवर पाइपलाइन बिछाई गई है, वह सीधे तौर पर हेपेटाइटिस A, हेपेटाइटिस E और पीलिया (Jaundice) जैसी घातक जलजनित बीमारियों को दावत देना है।
लिवर पर हमला: यदि सीवर का गंदा पानी नीचे दब रही पेयजल लाइन में रिसता है, तो यह सीधा लिवर को संक्रमित करेगा, जिससे पीलिया का खतरा बढ़ जाता है 。
महामारी का आमंत्रण: यह लापरवाही न केवल पीलिया बल्कि हैजा, टाइफाइड और पेचिश जैसी जानलेवा बीमारियों का कारण बन सकती है 。
कानूनी उल्लंघन: यह कृत्य उत्तर प्रदेश जल आपूर्ति एवं सीवरेज अधिनियम, 1975 की धारा 22, 23 एवं 24 के तहत जल आपूर्ति की पवित्रता को सीधे तौर पर खतरे में डालता है।
2. इंजीनियरिंग विभाग और जल निगम की 'मूक सहमति'?
बड़ा सवाल यह है कि क्या इस खतरनाक प्रोजेक्ट को शुरू करने से पहले किसी इंजीनियरिंग विभाग या जल निगम द्वारा तकनीकी परीक्षण किया गया था? सार्वजनिक स्वास्थ्य इंजीनियरिंग (PHE) के मानक नियम पेयजल और सीवर लाइन के बीच सुरक्षित दूरी अनिवार्य करते हैं। लेकिन राया में नियमों की ऐसी अनदेखी बताती है कि जल निगम और इंजीनियरिंग विभाग ने या तो इसे बिना देखे मंजूरी दी या फिर भ्रष्टाचार के चलते जानबूझकर आंखें मूंद लीं।
3. ठेकेदारों को लाभ पहुँचाने के लिए जोखिम में डाली जनता
आरोप है कि दयानंद कॉलोनी के पीछे मौजूद प्राकृतिक नाला मार्ग जैसे सुरक्षित और सस्ते विकल्प को जानबूझकर नजरअंदाज किया गया है । ऐसा प्रतीत होता है कि केवल पसंदीदा ठेकेदारों को लाभ पहुँचाने के उद्देश्य से करोड़ों रुपये की लागत वाली यह अवैज्ञानिक और मात्र 12 सेंटीमीटर व्यास वाली अपर्याप्त पाइपलाइन योजना जनता पर थोपी गई है ।
4. जिलाधिकारी और प्रशासन की रहस्यमयी चुप्पी
उत्तर प्रदेश शासन ने 28 जुलाई 2025 को ही जिलाधिकारी मथुरा, श्री चन्द्रप्रकाश सिंह को इस मामले की जांच के कड़े निर्देश दिए थे । लेकिन तीन माह से अधिक का समय बीत जाने के बाद भी जिलाधिकारी कार्यालय द्वारा कोई स्पष्ट रिपोर्ट शासन को नहीं भेजी गई है ।
राया नगरवासियों, सावधान रहें! नगर पंचायत की यह भारी लापरवाही आपके और आपके बच्चों के स्वास्थ्य पर भारी पड़ने वाली है। यदि समय रहते इस 'अवैज्ञानिक' निर्माण पर उच्च स्तरीय तकनीकी सर्वेक्षण कर कार्यवाही नहीं हुई, तो राया का भविष्य 'जहरीले' पानी के साये में होगा।