Loading...

सफर-ए-शहादत’ शहीदी सप्ताह के चतुर्थ दिवस में गुरु गोबिंद सिंह जी के माछीवाड़ा से आलमगीर, रामकला एवं दीना कांगड़ तक के ऐतिहासिक प्रवास का भावपूर्ण वर्णन

Gargachary Times 25 December 2025, 21:07 145 views
Agra
सफर-ए-शहादत’ शहीदी सप्ताह के चतुर्थ दिवस में गुरु गोबिंद सिंह जी के माछीवाड़ा से आलमगीर, रामकला एवं दीना कांगड़ तक के ऐतिहासिक प्रवास का भावपूर्ण वर्णन
श्री गुरु गोबिंद सिंह जी के साहिबजादों की महान शहादत को नमन करते हुए गुरुद्वारा दशमेश दरबार, शहीद नगर/विभव नगर, आगरा में चल रहे लड़ीवार आठवे गुरमत समागम ‘सफर-ए-शहादत’ शहीदी सप्ताह के चतुर्थ दिवस का दीवान श्रद्धा, त्याग और गहन भावनात्मक वातावरण में सम्पन्न हुआ, यह दीवान गुरु साहिब के अद्वितीय धैर्य, विवेक एवं धर्म की रक्षा हेतु किए गए सर्वोच्च संघर्ष को स्मरण करने के लिए समर्पित रहा, आज के दीवान में पंथ के प्रसिद्ध कथा वाचक भाई साहिब भाई बलदेव सिंह (मोहाली वाले) ने गुरमत विचारों के माध्यम से साध संगत को गुरुओ की उपमा कथा मे माध्यम से विस्तारपूर्वक बताया कि किस प्रकार चमकौर की ऐतिहासिक जंग के उपरांत श्री गुरु गोबिंद सिंह जी महाराज ने ‘उच्च दे पीर’ का रूप धारण कर माछीवाड़ा से प्रस्थान किया और अनेक नगरों से होते हुए आगे की कठिन एवं ऐतिहासिक यात्रा आरंभ की, कथा के दौरान भाई साहिब ने वर्णन किया कि गुरु साहिब का यह प्रवास केवल एक स्थान से दूसरे स्थान तक की यात्रा नहीं था, बल्कि यह त्याग, धैर्य और ईश्वरीय योजना से परिपूर्ण एक महान ऐतिहासिक क्रम था,इसी क्रम मे गुरु गोबिंद सिंह जी महाराज आलमगीर से होते हुए रायकोट पहुँचे, जहाँ उन्हें अपने चारों साहिबजादों की शहादत का हृदयविदारक समाचार प्राप्त हुआ, इस समाचार को सुनकर भी गुरु साहिब ने असाधारण आत्मबल, संयम और चढ़दी कला का परिचय दिया, कथा में आगे बताया गया कि गुरु साहिब दीना कांगड़ पहुँचे, जहाँ से उन्होंने अत्याचारी मुगल शासक औरंगज़ेब को ‘ज़फ़रनामा’ लिखकर अन्याय और ज़ुल्म के विरुद्ध सत्य और धर्म की विजय का उद्घोष किया, यह प्रसंग सिख इतिहास में नैतिक साहस, आत्मबल और सत्य की विजय का अमर उदाहरण है, कथावाचन के माध्यम से यह संदेश दिया गया कि श्री गुरु गोबिंद सिंह जी महाराज का जीवन केवल युद्ध और बलिदान का नहीं, बल्कि विश्वास, करुणा, मानवता और धर्म की रक्षा हेतु सतत संघर्ष की प्रेरक गाथा है। कथा श्रवण करते हुए संगत भाव-विभोर हो उठी, समागम के दौरान हजूरी रागी भाई हरजेंदर सिंह विक्की वीर द्वारा प्रस्तुत कीर्तन से वातावरण पूर्णतः गुरुमय हो गया, दीवान की समाप्ति के उपरांत गुरु की अरदास एवं हुकुमनामा लिया गया सेवा में मुख्य रूप से प्रधान हरपाल सिंह, राजू सलूजा, मालकीत सिंह, श्याम भोजवानी, गुरेंदर सिंह,सुरेंद्र सिंह,इंदरजीत सिंह, लाड़ी वीर,हरजीत सिंह हैप्पी,मंजीत सिंह टोड़ी, संतोख सिंह, परमजीत सिंह आदि
Follow Samachar24