सुशासन दिवस पर दीनदयाल उपाध्याय राज्य ग्राम्य विकास संस्थान में अटल जी की स्मृति में वैचारिक संगोष्ठी आयोजित
Gargachary Times
25 December 2025, 21:16
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Lucknow
दीनदयाल उपाध्याय राज्य ग्राम्य विकास संस्थान, बख्शी का तालाब लखनऊ द्वारा महानिदेशक संस्थान एल० वेंकटेश्वर लू के मार्गनिर्देशन में, भारत रत्न,पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेई के जयंती के परिप्रेक्ष्य में
बुधवार को प्र0 अपर निदेशक सुबोध दीक्षित की अध्यक्षता में, संस्थान के बुद्धा सभागार में, " सुशासन दिवस " के शुभ अवसर पर दिनांक 24 दिसंबर, 2025 को सायंकाल संस्थान के समस्त अधिकारियों/कार्मिकों की गरिमामई उपस्थिति में वैचारिक संगोष्ठी का आयोजन किया गया।
संस्थान के प्र0 अपर निदेशक सुबोध दीक्षित द्वारा अटल जी के चित्र पर माल्यार्पण किया गया, तत्पश्चात सभी अधिकारियों व कर्मचारियों द्वारा क्रमबद्धता के साथ चित्र पर पुष्प अर्पित किए गए। इस अवसर पर अपर निदेशक द्वारा सभी को सुशासन के अन्तर्गत निहित समस्त घटकों पर आधारित, शासकीय कार्यों के निष्पादनार्थ, संकल्पबद्धता के साथ शपथ दिलाई गई।
कार्यक्रम के दौरान सभी अधिकारियों व प्रमुख कर्मचारियों द्वारा सुशासन दिवस के अवसर पर, प्रासंगिक एवं उपयोगी विचार प्रकट किए गए। संस्थान के सुबोध दीक्षित द्वारा सभी को संबोधित करते हुए बताया कि सुशासन की अवधारणा यह है कि एक ऐसी व्यवस्था, जहां सरकार और संस्थाएं जनता के प्रति पारदर्शी, जबावदेह, कुशल और प्रभावी होनी चाहिए, जो लोकतांत्रिक सिद्धान्तों, मानवाधिकारों और नैतिकता के आधार पर कार्य करें, ताकि संसाधनों का यथोचित प्रबंधन व उपयोग हो और आम जनता के कल्याण व विकास को नियोजित ढंग से सुनिश्चित किया जा सके, जिसमें प्रत्येक निर्णय प्रक्रिया में उनकी जनसहभागिता भी सुनिश्चित हो सके।
कहा कि सुशासन के प्रमुख सिद्धान्तों के अन्तर्गत विभिन्न प्रकार के घटक समाहित हैं, यथा - पारदर्शिता, जबावदेही, जनसहभागिता, कानून का शासन, कुशलता और प्रभावशीलता, समानता और समावेशीकरण, नैतिकता तथा आम सहमति इत्यादि है। परन्तु सभी घटकों में से, सबसे महत्वपूर्ण तीन घटक हैं - जनसहभागिता, पारदर्शिता और जवाबदेही।
सम्पूर्ण कार्यक्रम का मंच संचालन संस्थान के सहायक निदेशक राजीव कुमार दूबे द्वारा किया गया। कार्यक्रम के आयोजन एवं प्रबंधन के दृष्टिगत संस्थान के सहायक निदेशक डा० राज किशोर यादव, डा० सत्येन्द्र कुमार गुप्ता, डा० वरुण चतुर्वेदी संकाय सदस्य धर्मेन्द्र कुमार सुमन, मोहित यादव तथा प्रचार सहायक मो० शहंशाह एवं कम्प्यूटर प्रोग्रामर उपेन्द्र कुमार दूबे का सराहनीय एवं उल्लेखनीय योगदान रहा ।