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कल्याण करोति, एलिम्को व सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय द्वारा दिव्यांगो को कृत्रिम अंग व सहायक उकरण बांटे

Gargachary Times 30 December 2025, 20:35 113 views
Mathura
कल्याण करोति, एलिम्को व सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय द्वारा दिव्यांगो को कृत्रिम अंग व सहायक उकरण बांटे
मथुरा - भारतीय कृत्रिम अंग निर्माण निगम (एलिम्को), सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय, भारत सरकार के सौजन्य से तथा कल्याणं करोति, मथुरा द्वारा आयोजित कृत्रिम अंग एवं सहायक उपकरण वितरण समारोह का शुभारम्भ भगवान श्री गणेश जी के चित्रपट पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्वलन के साथ हुआ। यह कार्यक्रम कल्याण धाम, मसानी दिल्ली मार्ग, सरस्वती कुण्ड, मथुरा के प्रांगण में सम्पन्न हुआ। समापन समारोह को संबोधित करते हुए परम पूज्य आचार्य डॉ० राम विलास चतुर्वेदी जी ने कहा कि आज का यह पावन अवसर केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि सेवा को साधना और करुणा को कर्म में रूपांतरित करने का दिव्य उत्सव है। उन्होंने कहा कि एलिम्को, सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय, भारत सरकार तथा कल्याणं करोति, मथुरा द्वारा आयोजित यह शिविर मानवता के प्रति हमारे दायित्व की सशक्त अभिव्यक्ति है। शास्त्रों में कहा गया हैकृ “नर सेवा नारायण सेवा”। जब हम किसी असहाय, दिव्यांग अथवा पीड़ित व्यक्ति के जीवन में सहारा बनते हैं, तब वास्तव में हम ईश्वर की ही सेवा करते हैं। आज जिन दिव्यांग भाई-बहनों के चेहरे पर मुस्कान दिखाई दे रही है, वही इस शिविर की सबसे बड़ी उपलब्धि है। डॉ० देवेन्द्र शर्मा जी, अध्यक्ष, बाल संरक्षण आयोग ने अपने संबोधन में कहा कि दिव्यांग बच्चे हमारी सबसे बड़ी जिम्मेदारी हैं। उन्हें केवल सहानुभूति नहीं, बल्कि समान अवसर, सम्मान एवं सशक्तिकरण की आवश्यकता है। इस प्रकार के शिविर बच्चों के भीतर छिपी प्रतिभा को उजागर करते हैं और उन्हें आत्मनिर्भर बनने की प्रेरणा देते हैं। समापन समारोह के दौरान वे क्षण अत्यंत भावुक हो गए जब वर्षों से शारीरिक कठिनाइयों से जूझ रहे दिव्यांग लाभार्थियों को 09 व्हीलचेयर, 46 श्रवण यंत्र, 21 मोटराइज्ड ट्राईसाइकिल, 11 सामान्य ट्राईसाइकिल, 30 जोड़ी बैसाखी, 21 टीएलएम किट, 32 नी-वॉकर, 03 कमोड चेयर, 16 हाथ की छड़, 03 व्हील वॉकर एवं 02 वॉकर प्रदान किए गए। इस प्रकार कुल 91 दिव्यांगजन इस शिविर से लाभान्वित हुए। किसी ने पहली बार अपने पैरों पर खड़े होकर कदम बढ़ाए, किसी ने बिना सहारे चलने का अनुभव किया, तो किसी के चेहरे पर सुनने की क्षमता लौटने की खुशी स्पष्ट झलक रही थी। यह दृश्य मानवता, करुणा और सेवा के सच्चे भाव का प्रतीक था। इस अवसर पर धनेश मित्तल, मूलचन्द गर्ग, गोपाल प्रसाद अग्रवाल (भरतपुर), नवीन मित्तल, महासचिव सुनील कुमार शर्मा, प्रज्ञा शर्मा, आलोक पाण्डेय, राजू, लोकेश, कुलदीप, विवेक, मोहन गर्ग, प्रहलाद पाण्डेय, आर. के. वर्मा सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।
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