वात्सल्य ग्राम महोत्सव के प्रथम दिन पद्म विभूषण साध्वी रितंभरा ने दीप प्रज्जलित कर कवि सम्मेलन का किया शुभारंभ
Gargachary Times
30 December 2025, 20:47
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Mathura
सर्वप्रथम आगरा से पधारी डॉक्टर रुचि चतुर्वेदी ने सरस्वती वंदना की उसके पश्चात सुहाग नगरी फिरोजाबाद से आए गीतकार यशपाल यश ने अपने गीतों की सरिता बहाते हुए कहा कि- लक्ष्य जब तक कनक के हिरन हो गए। देखिए भाग्य सीता हरण हो गए।। जिनका बचपन नदी में बहाया गया, युग के कुरुक्षेत्र में वह करण हो गए।।
डीग राजस्थान से पधारे हास्य व्यंग्य के कवि सुरेंद्र सार्थक ने श्रोताओं को गुदगुदाते हुए कहा कि - खुले आकाश में अपनी कमाई छोड़ देते हैं। मठा से पेट भरते हैं मलाई छोड़ देते हैं।। अगर तुम झूठ भी कह दो मवेशी खेत में तेरे. कड़कती ठंड में झट से रजाई छोड़ देते हैं।।
दिल्ली से पधारे वीर रस के कवि मनवीर मधुर ने कहा कि - एक ध्वजवाहक सनातन परंपरा का नाम भी लगेगा तुम्हें शुद्ध स्वर्ण सा खरा। प्रेम भक्ति शक्ति वात्सल्य का ही दिव्य रूप चाहते हो तो देख लेना दीदी मां रितंभरा।।
आगरा से आई डॉक्टर रुचि चतुर्वेदी ने गीतों की गंगा बहाते हुए कहा कि - जिन चरणों में जाकर हमको स्वर्ग धारा मिल जाती है। जिनके ममतामई प्रेम को सारी सृष्टि गाती है।। जीवन सुख वात्सल्य ग्राम रज मस्तक चंदन करते हैं। आओ हम सब मिलकर दीदी मां को वन्दन करते हैं।।
नोएडा से पधारे हास्य कवि वेद प्रकाश वेद ने श्रोताओं को हंसाकर लोटपोट कर दिया कहा कि- इस मिलावट के हमने
ऐसे ऐसे चमत्कार भुगते हैं
काली मिर्च बोओ तो
पपीते उगते हैं ।
दिल्ली के वीर रस के कवि - गजेंद्र सोलंकी ने कहा कि-
नए युग की कहानी का
नया उल्लास लिखना है
दिलों की धड़कनों पे प्रेम का अहसास लिखना है
बदलते वक्त की आहट सुनाई तो साँस यूँ बोली
हमें भारत की धरती पर
सुखद मधुमास लिखना है
सिंगरौली से पधारी श्री मती विजयलक्ष्मी संवेदना ने कहा कि-
उपनिषद का ज्ञान हो तुम
या कि वेदों की ऋचाएँ ,
तुम मिले पुलकित हुई है
सृष्टि की सारी दिशाएंll
गाजियाबाद से पधारे राजनीति पर कटाक्ष करते हुए - रुप चौधरी ने कहा कि गंगा जैसी कभी थी पवित्र देखिएगा मित्र ,
होगई शराब जैसी आज राजनीति है।
कहीं बड़े लोगों की तिजोरी में हुई है बंद,
कोठे पे भी ठुमका लगती राजनीति है।
शेखर,पटेल और सुभाष को भी भूलगई,
आज भ्रष्टाचार की सहेली राजनीति है
डॉ उमाशंकर राही ने संचालन करते हुए कहा कि - समय आ गया जातिवाद के सारे भेद मिटाने का। समय आ गया हिदुस्तां को हिन्दू राष्ट्र बनाने का।।
इस अवसर पर आई सी अग्रवाल एवं महेश खण्डेलवाल, रुप चौधरी ने कवियों को शाल ओढ़ाकर,प्रतीक चिन्ह देकर सम्मानित किया। संयोजन रुप चौधरी ने तथा संचालन डॉ उमाशंकर राही ने किया।