राजीव एकेडमी में बियॉन्ड द कोड पर दो दिवसीय कार्यशाला आयोजित
Gargachary Times
13 February 2026, 19:19
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मथुरा। राजीव एकेडमी फॉर टेक्नोलॉजी एण्ड मैनेजमेंट, मथुरा के बीसीए, बी.एससी एवं बी.कॉम अंतिम वर्ष के छात्र-छात्राओं को तकनीकी दक्षता के साथ-साथ महत्वपूर्ण नॉन-टेक्निकल स्किल्स से परिचित कराने के लिए एनआईआईटी फाउंडेशन द्वारा इन्फोसिस के सहयोग से “बियॉन्ड द कोड: आईटी में हाई इम्पैक्ट जॉब्स के लिए कम्युनिकेशन” विषय पर दो दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला में विद्यार्थियों को आधुनिक कार्यस्थल की अपेक्षाओं, प्रभावी संवाद शैली और प्रोफेशनल व्यवहार के विभिन्न पहलुओं से अवगत कराया गया।
रिसोर्स परसन एनआईआईटी फाउंडेशन के प्रथम कौशिक और आकांक्षा गुप्ता के साथ ही ड्यूकैट के डेटा साइंटिस्ट प्रतीक गुप्ता ने विशेष सत्र में अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि आज की प्रतिस्पर्धी दुनिया में केवल कोडिंग स्किल्स ही पर्याप्त नहीं है बल्कि स्पष्ट संचार, टीमवर्क और समस्या समाधान की क्षमता किसी भी प्रोफेशनल की पहचान बनाती है। उन्होंने विद्यार्थियों को इंडस्ट्री के वास्तविक उदाहरणों के माध्यम से समझाया कि किस प्रकार सही कम्युनिकेशन प्रोजेक्ट की सफलता को प्रभावित करता है।
दो दिवसीय कार्यशाला में प्रभावी आईटी कम्युनिकेशन के महत्वपूर्ण पहलुओं की जानकारी दी गई। कार्यशाला में एक्टिव लिसनिंग की अवधारणा को समझाते हुए बताया गया कि सफल संवाद के लिए सुनना उतना ही जरूरी है जितना बोलना। लिखित संचार में स्पष्टता और संक्षिप्तता बनाए रखने के लिए ईमेल, तकनीकी डॉक्यूमेंटेशन और टीम चैट में सरल भाषा के उपयोग पर विशेष जोर दिया गया। नॉन-वर्बल कम्युनिकेशन के अंतर्गत सकारात्मक बॉडी लैंग्वेज, सही हावभाव और आत्मविश्वासपूर्ण प्रस्तुति के महत्व को भी उदाहरणों सहित समझाया गया। साथ ही सहानुभूति और टीम के प्रति संवेदनशीलता को प्रभावी लीडरशिप और सहयोगी कार्य संस्कृति का आधार बताया गया।
हाई-इम्पैक्ट कम्युनिकेशन के लिए विभिन्न रणनीतियों पर प्रकाश डाला गया। वक्ताओं ने “स्टार्ट विद व्हाई” की अवधारणा को विस्तार से समझाते हुए कहा कि किसी भी प्रजेंटेशन या प्रोजेक्ट की शुरुआत उसके उद्देश्य और प्रभाव से करनी चाहिए, जिससे श्रोता आसानी से जुड़ सकें। जटिल तकनीकी विषयों को सरल बनाने के लिए एनालॉजी का उपयोग, ऑडियंस के अनुसार कंटेंट को अनुकूलित करना तथा समस्या के साथ स्पष्ट समाधान प्रस्तुत करने की कला पर भी विशेष चर्चा की गई। इसके अलावा वन-पेजर, टेक्निकल डिज़ाइन डॉक्यूमेंट और यूज़र स्टोरी जैसे प्रभावी डॉक्यूमेंटेशन तैयार करने की तकनीकों को प्रैक्टिकल उदाहरणों के माध्यम से समझाया गया।
कार्यशाला के दौरान विद्यार्थियों को साइबर सिक्योरिटी और इंटरनेट ऑफ थिंग्स जैसे उभरते हुए तकनीकी क्षेत्रों के बारे में भी जानकारी दी गई। ट्रेनर्स ने बताया कि भविष्य में इन क्षेत्रों में तकनीकी विशेषज्ञों के साथ-साथ ऐसे प्रोफेशनल्स की मांग बढ़ेगी, जिनकी कम्युनिकेशन स्किल्स मजबूत हो। विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक गतिविधियों और इंटरैक्टिव सत्रों में भाग लिया तथा समूह चर्चा, रोल-प्ले और प्रस्तुति अभ्यास के माध्यम से अपने संवाद कौशल को बेहतर बनाने का प्रयास किया।
ट्रेनिंग एंड प्लेसमेंट प्रमुख डॉ. विकास जैन ने कहा कि ऐसे इंडस्ट्री-ओरिएंटेड कार्यक्रम विद्यार्थियों को वास्तविक कार्यक्षेत्र की चुनौतियों के लिए तैयार करते हैं और उन्हें आत्मविश्वास के साथ अपने करियर की दिशा तय करने में मदद करते हैं। उन्होंने बताया कि संस्थान नियमित रूप से विद्यार्थियों के लिए स्किल-आधारित प्रशिक्षण और इंडस्ट्री इंटरैक्शन कार्यक्रम आयोजित करता है, जिससे वे नौकरी के अवसरों के लिए बेहतर रूप से तैयार हो सकें।
आर.के. एजुकेशनल ग्रुप के चेयरमैन डॉ. रामकिशोर अग्रवाल, उपाध्यक्ष पंकज अग्रवाल, प्रबंध निदेशक मनोज अग्रवाल और डॉ. अमर कुमार सक्सेना ने संयुक्त रूप से कहा कि संस्थान का लक्ष्य विद्यार्थियों को केवल शैक्षणिक ज्ञान तक सीमित न रखकर उन्हें इंडस्ट्री-रेडी प्रोफेशनल बनाना है। डॉ. अमर कुमार सक्सेना ने सभी वक्ताओं का उनके कुशल मार्गदर्शन के लिए आभार माना।