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लकड़ी माफियाओं की टेडी नजर से लुप्त हो रहा है देसी बबूल

Gargachary Times 19 February 2026, 18:52 35 views
Dholpur
लकड़ी माफियाओं की टेडी नजर से लुप्त हो रहा है देसी बबूल
बोबे पेड़ बबूल का आम कहां से खाय इस कहावत को सुनकर भले ही बाबुल को आम से कमतर आंका गया हो किंतु बबूल का प्रत्येक अंग स्वस्थ व्यक्ति के स्वास्थ्य को बनाए रखने मेतथा अनेक रोगों के उपचार में महत्वपूर्ण भूमिका अदा करता है किंतु लकड़ी माफियाओं के कर से देसी बबूल भी नहीं बच सका है तथा हर जगह हर मौसम में बहुतायत से पाए जाने वाला देसी बबूल विलुप्ती के कगार पर है सुख जलहीन क्षेत्र में ऊंची नीची जमीनों पर खारे पानी में झीलों के किनारे एवं जंगलों में आसानी से उगने वाले इस देसी बबूल की प्रजाति धीरे-धीरे कम होती जा रही है देसी बबूल अफ्रीका मध्य पूर्व और भारतीय उपमहाद्वीप का मूल निवासी है देसी बबूल की छाल पत्तियां फली गोंद एवं अन्य अंगों का आयुर्वेद चिकित्सा के मूल ग्रन्थों जिनमें चरक संहिता एवं अष्टांग हृदय शामिल है विभिन्न रोगों के उपचार के लिए किया गया है तथाब बूल से संस्कार करके बनाई गई औषधीयो का प्रयोग अधिक पसीना आना शारीरिक जलन कमर दर्द दाद खाज खुजली घाव सुखाने खांसी उदर रोग भूख बढ़ाने मुहमे होने वाले विभिन्न रोग गले के रोग नेत्ररोग धातु रोग उदर रोग एवं महिलाओं के मासिक धर्म में बहुतायत से प्रयोग किया गया है पश्चिमी राजस्थान में इसकी पत्तियां एवं फलियों को पशु चारे में प्रयोग किया जाता है दक्षिण अफ्रीका में इसकी टहनी एवं शाखों को पीसकर पशुओं को खिलाया जाता है पशुओं में कृमि नाशक के रूप में 20 का प्रयोग किया जाता है हजारों वर्षों से दांतों को साफ करने बाबुल के उपयोग से सभी परिचित हैं अरे बाबुल की सूखी फलियों का बाजार भाव भी अच्छा खासा देखा जा सकता है बाबुल की लकड़ी का कोयला देर तक जलने से पहली पसंद माना जाता है इससे निकलने वाले गोंद एवं कतीरा का प्रयोग सभी करते हैं चमड़े के साथ बाबुल की छलका प्रयोग प्राचीन समय से किया जाता रहा है बाबुल की लकड़ी मजबूत होने के साथ ही किसान अपने औजारों में इसी लकड़ी का प्रयोग करते हैं प्राचीन समय में बनने वाली बैलगाड़ी में बाबुल की लकड़ी का ही प्रयोग किया जाता था आज कोल्ड स्टोरेज में बबूल की फन्टी पहली पसंद मानी जाती है पानी एवं हवा का लंबे समय तक इस लकड़ी पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता है आधुनिक युग के मानव ने आधुनिकता के चकाचौंध में फर्नीचर एवं अन्य उपयोगों के लिए देसी बबूल की अंधाधुंध कटाई का जो सिलसिला शुरू किया था वह आज तक चल रहा है और यही कारण है की लकड़ी माफिया द्वारा महंगी लड़कियों के फर्नीचर में पॉलिश के साथ बाबुल का प्रयोग सफल होने के बाद मोती मुनाफा मिलने से इसकी अंधाधुंध कटाई का दुष्परिणाम अबदेशी बबूल की अनुपलब्धता के रूप में देखा जा सकता है सरकारी जमीन एवं बंजर भूमि में बहुतायत सेदिखने वालेदेशी बबूल सरकारी कारिंदों एवं लकड़ी माफिया की मिली भगतसे यदाकदा और कहीं-कहीं ही देखने को मिलते हैं सरकारी जमीनों को अब लोगों ने अतिक्रमण कर अपनी अपनी गिरफ्त में ले लिया है तथा जहां पहले भारी मात्रा में देसी बबूल देखे जाते थे उसे भूमि पर या तो खेती हो रही है या फिर मकान बन चुके हैं वन विभाग प्रतिवर्ष करोड़ों रुपए खर्च करने के बावजूद वृक्षों की अंधाधुंध कटाई को रोकने में पूरी तरह असफल रहा है यही कारण है की देसी बबूल भी अब परदेसी लगने लगा है
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