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पीली बसों, सिल्वर वैन का काला सच, सुरक्षा के नाम पर चल रहा खुला मज़ाक

Gargachary Times 13 March 2026, 18:51 103 views
Agra
पीली बसों, सिल्वर वैन का काला सच, सुरक्षा के नाम पर चल रहा खुला मज़ाक
आगरा में स्कूली वाहनों की स्थिति अब किसी चेतावनी से आगे बढ़कर एक भयावह सच्चाई का रूप ले चुकी है. जिले के सैकड़ों छोटे-बड़े विद्यालयों के वाहन बिना वैध फिटनेस, परमिट और आवश्यक सुरक्षा मानकों के सड़कों पर बच्चों की जान के साथ खिलवाड़ करते हुए दौड़ रहे हैं. हाल मे ही हुई दुर्घटनाओं और जमीनी स्तर पर सामने आए तथ्यों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि स्कूल बसों की चमकती पीली रंगत के पीछे सुरक्षा का काला सच छिपा हुआ है. प्रोग्रेसिव एसोसिएशन ऑफ़ पेरेंट्स अवेयरनेस (PAPA NGO) का स्पष्ट मानना है कि यदि विद्यालयी वाहनों की ईमानदारी और निष्पक्षता के साथ संयुक्त जांच कराई जाए तो जिले में संचालित सैकड़ों वाहन सुरक्षा मानकों से रहित पाए जाएंगे. कई वाहनों में न तो वैध फिटनेस प्रमाणपत्र है न परमिट और न ही बच्चों की सुरक्षा के लिए आवश्यक उपकरण. निजी नंबर प्लेट, ओवरलोडिंग और जर्जर तकनीकी स्थिति वाले वाहन खुलेआम सड़कों पर दौड़ रहे हैं, मानो नियम केवल किताबों के लिए बनाए गए हों. जिन वाहनों को बच्चों के भविष्य की सुरक्षा का माध्यम होना चाहिए वे ही दुर्घटना के चलते भविष्य को अंधकार की ओर धकेलने का जरिया बनते जा रहे हैं. हर बार किसी हादसे के बाद कार्रवाई की घोषणाएँ होती हैं लेकिन कुछ दिनों बाद वही ढर्रा फिर लौट आता है. यह स्थिति प्रशासनिक सतर्कता पर भी गंभीर प्रश्नचिन्ह खड़े करती है. पापा एनजीओ ने जिला प्रशासन, परिवहन विभाग और यातायात पुलिस से मांग की है कि जनपद आगरा में तत्काल प्रभाव से विद्यालयी वाहनों की व्यापक संयुक्त जांच अभियान शुरू कराया जाए. बिना फिटनेस, परमिट या सुरक्षा मानकों के संचालित वाहनों को मौके पर ही सीज कर संबंधित विद्यालय प्रबंधन एवं वाहन स्वामियों के विरुद्ध विधिक कार्रवाई सुनिश्चित की जाए. संगठन का कहना है कि बच्चों की सुरक्षा कोई औपचारिकता नहीं बल्कि संवैधानिक और मानवीय दायित्व है. यदि इस विषय में कठोर और निरंतर कार्रवाई नहीं हुई तो किसी भी दिन कोई बड़ी दुर्घटना पूरे सिस्टम की संवेदनहीनता का कठोर प्रमाण बन सकती है. दीपक सिंह सरीन ने कहा कि बच्चों की जान से जुड़ा यह विषय केवल प्रशासनिक फाइलों का मुद्दा नहीं बल्कि समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है. अब समय आ गया है कि दिखावे की सुरक्षा से आगे बढ़कर वास्तविक और कठोर अनुपालन सुनिश्चित किया जाए. यदि जिला प्रशासन और शिक्षा विभाग ने दो दिवस मे स्कूली वाहनों की जांच और फिटनेस मानक को लेकर अपनी कुंभकरणी नींद नहीं तोड़ी और जांच अभियान शुरू नहीं किया तो पापा संस्था पूरे दल बल के साथ जिला प्रशासन और शिक्षा विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ़ सड़क पर मोर्चा खोलेगी जिसकी पूर्ण ज़िम्मेदारी जिला प्रशासन और शिक्षा विभाग की होगी.
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