छोटी सरकार चुनने का महासंग्राम निकट, चुनावी गोटिया बैठाने में लगे संभावित उम्मीदवार
Gargachary Times
15 March 2026, 18:54
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Dholpur
पलकों पर रुका है समुदर खुमार का।
कितना अजब नशा है तेरे इंतजार का।।
शायर की ये पंक्तियां राजस्थान में पंचायती राज चुनाव में कूदने की तैयारी में लगे उम्मीदवारों पर सटीक बैठती हैं। पंचायत चुनावो की घोषणा में देरी होने से इनकी व्याकुलता बढ़ती ही जा रही है इस बार सरकार द्वारा पंचायतों का पुनर्गठन किए जाने से ग्राम पंचायत पंचायत समिति एवं जिला परिषद की संख्या में बढ़ोतरी हुई है ग्राम पंचायत 11341 से बढ़कर 14781 हो चुकी है वहीं पंचायत समितियां की संख्या मैं 85 पंचायत समितियो का इजाफा हुआ है तथा इनकी संख्या 352 से बढ़कर 437 हो गई है राजस्थान में पुनर्गठन से पहले 33 जिला परिषद थी पुनर्गठन के बाद इनकी संख्या 41 हो चुकी है ग्राम पंचायत का कार्यकाल पहले ही समाप्त हो चुका है तथा ग्राम पंचायत का चार्ज सरकारी मशीनरी ले चुकी है किंतु सत्ताधारी भाजपा सरकार चुनाव कराने से बच रही है हालांकि विरोधी दल कांग्रेस के नेता सड़क से लेकर विधानसभा तक इस मुद्दे पर मुखर होकर बोलते रहे हैं किंतु सरकार का रवैया टालम टोल की नीति का रहा है राजस्थान हाई कोर्ट द्वारा पहले ही सरकार को चुनाव की तारीख दे दी गई है इसके खिलाफ सरकार ने अग्रिम कोर्ट में मोहलत मांगी थी हालांकि चुनाव आयोग ने भी शीघ्र चुनाव कराए जाने की मंशा जाहिर की है किंतु चुनाव की तारीख घोषित नहीं होने से चुनाव की तैयारी में लगे पहलवानों की बेचैनी बढ़ती ही जा रही है
संभावित उम्मीदवारों ने धरातल पर उतरकर अपना आधार तलासना शुरू कर दिया है न्यायालय के हस्तक्षेप के बाद निर्वाचन आयोग ने मतदान की प्रक्रिया से लेकर उम्मीदवारों की योग्यता तक कई महत्वपूर्ण बदलाव कियेहै न्यायालय के आदेश के अनुसार आयोग को 15 अप्रैल 2026 तक चुनाव की प्रक्रिया पूरी करनी है इस बार के पंचायत चुनाव पिछले एक दशक में सबसे अलग होंगे निर्वाचन आयोग ने मतदान की प्रक्रिया से लेकर उम्मीदवारों की योग्यता तक जो बदलाव किए हैं उनके अनुसार 1 जनवरी 2026 को 18 वर्ष की आयु पूर्ण करने वाले युवा भी इस बार छोटी सरकार चुनने के लिए मतदान करेंगे प्राप्त जानकारी के अनुसार ग्राम पंचायत में पंच एवं सरपंच का चुनाव मत पत्रों से होगा तथा जिला परिषद एवं पंचायत समिति सदस्य के लिए मतदान एवीएमसे कराए जाएंगे कुल सीटों में से 50% महिलाओं के लिए आरक्षित रहेंगी एससी एसटी एवं ओबीसी के लिए रोटेशन प्रणाली से आरक्षण लागू होगा
अब बात करते हैं चुनावी समर में कूदने वाले सूरमाओं की जिन्होंने चाय की दुकानों पर बैठकर मतदाताओं का मन टटोलना शुरू कर दिया है अब तक जो लोग अपने काम में लगे थे उन्होंने सभी जगह आना जाना शुरू कर दिया है तथा वे मतदाताओं को प्यार एवं हमदर्दी से यह जताना चाहते हैं कि उनसे बडा जन सेवक इलाके में कोई नहीं है जो लोग विगत चुनाव जीतने के बाद कुर्सी पर बैठकर मलाई चाटते रहे अब दोबारा इसी प्रक्रिया में दिन-रात लगे हुए हैं तथा मतदाताओं से प्यार एवं हमदर्दी से बातें करते देखे जा सकते हैं उधर युवाओं में भी गजब का उबाल देखा जा सकता है इलेक्ट्रॉनिकएव इंटरनेट के जमाने में युवाओं के पास पल-पल के अपडेट देखे जा सकते हैं राजनीति से संबंधित जानकारियां पूरीतरह उनके पास मिल जाती है जींस एवं शर्ट छोड़कर अब उन्हें कुर्ता पजामा में देखा जा सकता है मतदाता भी उम्मीदवारों की स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं इस बाबत रामप्रकाश शर्मा बाबूजी का मानना है की उम्मीदवार का काम व्यवहार एवं योग्यता देखकर इस बार मतदान किया जाएगा एडवोकेट सज्जन बाबू तिवारी अब राजनीति की दिशा एवं दशा दोनों को अच्छे लोगों के लिए बदली हुई बताते हैं उनके अनुसार पहले लोग राजनीति में सेवा के लिए आते थे किंतु अब राजनीति एक धंधा बन चुकी है हरीश कबीर चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता पर बल देते हुए योग्य एवं स्वच्छ छवि वाले युवाओं को आगे लाने की अपील कर रहे हैं कूकरा के सूरजगोड बताते हैं कि चुनाव के समय प्रत्याशियों द्वारा घर-घर जाकर बादे तो किए जाते हैं किंतु यथार्थ के धरातल पर जीतने के बाद स्थिति पूरी तरह बदल जाती है अब धीरे-धीरे जनता का विश्वास इनसे उठने लगा है
अधिकांश लोगों की चुनाव को लेकर अवधारणा बदल चुकी है उनके अनुसार गरीब एवं स्वच्छ छवि वाले उम्मीदवार यदि पैसा पानी की तरह नहीं बहाएंगे तो किसी भी सूरत में उनका चुनाव जीत पाना असंभव ही नहीं बाल के नाम मुमकिन है चुनाव आयोग चुनावी खर्च का दायरा तो बताता है किंतु सरे चुनावी निर्देश केवल कागज तक इसी में रहते हैं यथार्थ के धरातल पर इसके उलट स्थिति दूसरी ही नजर आती है