राष्ट्रपति और CJI के द्वार पहुँचा मथुरा का 'भविष्य' का महाघोटाला
Gargachary Times
25 March 2026, 19:24
90 views
Mathura
मथुरा प्रशासन का दुस्साहस: राष्ट्रपति सचिवालय के आदेशों की अवहेलना; 2026 की जाली रिपोर्ट से भ्रष्टाचार पर पर्दा डालने का खेल; अब देश की सर्वोच्च न्यायिक और संवैधानिक शक्तियाँ करेंगी 'प्रशासनिक सिंडिकेट' का हिसाब।
मथुरा/राया | विशेष अन्वेषण ब्यूरो
उत्तर प्रदेश के जनपद मथुरा में 'डिजिटल इंडिया' और 'पारदर्शिता' के दावों के बीच एक ऐसा सनसनीखेज मामला सामने आया है जिसे सुनकर लोकतन्त्र के स्तंभ हिल सकते हैं। नगर पंचायत राया के प्रशासनिक तंत्र ने जालसाजी की सारी हदें पार करते हुए 26 दिसंबर 2026 की 'भविष्य' की जाली तारीख पर आधिकारिक आख्या तैयार कर शासन को गुमराह करना शुरू कर दिया है। जब पूरा देश अभी मार्च 2026 में है, तब मथुरा का यह 'वर्चुअल सिंडिकेट' भविष्य में जाकर घोटालों पर 'क्लीन चिट' बाँट रहा है। इस गंभीर विधिक जालसाजी और प्रशासनिक माफिया तंत्र के विरुद्ध अब महामहिम राष्ट्रपति और माननीय मुख्य न्यायाधीश (CJI) ने सीधे हस्तक्षेप की तैयारी कर ली है।
सभासद अमित अग्रवाल का न्यायिक महासंग्राम
नगर पंचायत राया के निर्वाचित वार्ड सदस्य, वरिष्ठ अधिवक्ता एवं सजग पत्रकार अमित अग्रवाल ने इस संगठित प्रशासनिक माफिया के विरुद्ध सीधा मोर्चा खोल दिया है। महामहिम राष्ट्रपति और माननीय CJI को प्रेषित अपने विस्तृत आवेदन में उन्होंने स्पष्ट किया है कि: "शासन की यह रहस्यमयी चुप्पी और न्याय के मंदिरों का 'मौन' संघर्षरत नागरिकों का मनोबल तोड़ेगा और भ्रष्ट तत्वों को खुली छूट देगा।" अमित अग्रवाल ने जिलाधिकारी (DM), वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) और उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव कार्यालयों की घोर संवेदनहीनता पर भी प्रश्न उठाए हैं, जिन्होंने महीनों से एक पावती (Acknowledgment) तक देना उचित नहीं समझा।
तहसीलदार बृजेश कुमार का 'यू-टर्न': भ्रष्टाचार की आधिकारिक पुष्टि
इस प्रकरण का सबसे चौंकाने वाला और विधिक रूप से प्रहारक पहलू तहसीलदार मांट, बृजेश कुमार की परस्पर विरोधी रिपोर्टें हैं। तहसीलदार बृजेश कुमार ने अपनी दो अलग-अलग आख्याओं में स्वयं को ही कटघरे में खड़ा कर लिया है:
25 फरवरी 2026 की रिपोर्ट: तहसीलदार बृजेश कुमार ने सभी शिकायतों को तथ्यहीन बताते हुए दावा किया था कि निर्माण कार्य मानकों के अनुरूप है और तकनीकी जाँच "तहसील स्तर से संभव नहीं" है।
22 मार्च 2026 की रिपोर्ट: राष्ट्रपति सचिवालय के कड़े हस्तक्षेप के बाद, तहसीलदार बृजेश कुमार ने अपनी ही पुरानी रिपोर्ट को पलटते हुए स्वीकार किया कि सुल्तानगंज तक पेयजल और सीवर लाइनें नियम विरुद्ध एक साथ डाली गई हैं। उन्होंने स्थलीय निरीक्षण में माना कि सड़कें टूटी और क्रैक हैं और सार्वजनिक शौचालय महीनों से बंद पड़े हैं।
संवैधानिक संकट: अपराधी ही बना न्यायाधीश
अमित अग्रवाल ने विधिक साक्ष्य प्रस्तुत करते हुए बताया कि राष्ट्रपति कार्यालय से आए अति-संवेदनशील संदर्भों की जाँच उसी तहसीलदार को सौंपी गई, जो स्वयं साक्ष्यों को दबाने का मुख्य आरोपी है। यह विधिक सिद्धांत 'Nemo judex in causa sua' (कोई अपने मामले में न्यायाधीश नहीं हो सकता) का खुला उल्लंघन है। भविष्य की तारीख (26/12/2026) पर आधिकारिक आख्या तैयार करना भारतीय न्याय संहिता (BNS) के तहत एक गंभीर संज्ञेय अपराध है, जिसकी जाँच अब देश की सर्वोच्च अदालत की निगरानी में होना तय माना जा रहा है।