पापा एनजीओ के आगरा RTE सहायता कैंप में सामने आईं गंभीर अनियमितताएं, 3 दिन में समाधान की मांग
Gargachary Times
10 April 2026, 21:38
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Agra
मुकुल शर्मा आगरा: शिक्षा का अधिकार अधिनियम जहां बच्चों के भविष्य का द्वार खोलने के लिए बना था वहीं ज़मीनी स्तर पर कुछ स्कूलों ने उसी द्वार पर ताला डाल दिया है.
दिनांक 10/04/2026 को आगरा स्थित बेसिक शिक्षा विभाग कार्यालय, अशोक नगर में प्रोग्रेसिव एसोसिएशन ऑफ पेरेंट्स अवेयरनेस (PAPA NGO) द्वारा “RTE सहायता कैंप” का आयोजन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में अभिभावकों ने भाग लिया और अपनी समस्याएं दर्ज कराईं.
कैंप में प्राप्त शिकायतों को तीन प्रमुख श्रेणियों में विभाजित किया गया. पहली श्रेणी में अनेक अभिभावकों ने बताया कि उनके बच्चों का स्कूल आवंटन हो जाने के बावजूद संबंधित विद्यालय उन्हें प्रवेश देने से इंकार कर रहे हैं और गेट से ही यह कहकर लौटा रहे हैं कि “हमारे पास सूची नहीं आई है”, जबकि शिक्षा विभाग द्वारा सूची भेजे जाने की पुष्टि की जा चुकी है.
दूसरी श्रेणी की शिकायतों में अभिभावकों ने तीन से चार किलोमीटर दूरस्थ विद्यालय आवंटन को लेकर गंभीर चिंता जताई. उनका कहना है कि वे आर्थिक रूप से कमजोर एवं कामकाजी वर्ग से हैं ऐसे में बच्चों को दूर स्कूल भेजना और छुट्टी के समय लाना-ले जाना उनके लिए अत्यंत कठिन हो रहा है.
तीसरी श्रेणी में कई अभिभावकों ने बताया कि उनके बच्चों को 2 से 3 वर्ष पूर्व RTE के अंतर्गत विद्यालय आवंटित हो चुका है, लेकिन आज तक उनके खातों में प्रतिपूर्ति राशि नहीं आई है जिससे उनकी आर्थिक स्थिति पर अतिरिक्त बोझ पड़ रहा है.
कैंप के दौरान पापा एनजीओ की टीम से प्राप्ति, मनन और दर्शित द्वारा सभी अभिभावकों की शिकायतें लिखित रूप में दर्ज की गईं और उन्हें संकलित कर शिक्षा विभाग एवं जिलाधिकारी आगरा को प्रेषित करने हेतु तैयार किया गया. कैंप कोऑर्डिनेटर ईरम ने बताया कि आज के कैंप में लगभग 40 अभिभावकों की शिकायतें दर्ज की गई हैं जिन्हें आगे संबंधित विभागों को भेजा जा रहा है.
कार्यक्रम के अंत में दीपक सिंह सरीन द्वारा सभी प्राप्त शिकायतें खंड शिक्षा अधिकारी (नगर) सुमित कुमार सिंह को सौंपते हुए स्पष्ट रूप से 3 दिवस के भीतर समाधान की मांग की गई. दीपक सिंह सरीन ने अपने बयान में कहा कि आरटीई केवल कागजों तक सीमित नहीं रहना चाहिए, यह बच्चों के अधिकार का विषय है. यदि स्कूल आवंटन के बाद भी प्रवेश नहीं दिया जा रहा, दूरी की समस्या का समाधान नहीं हो रहा और वर्षों से प्रतिपूर्ति लंबित है, तो यह केवल लापरवाही नहीं बल्कि अधिकारों का हनन है. प्रशासन को चाहिए कि वह तत्काल प्रभाव से कार्रवाई करते हुए दोषी स्कूलों पर कठोर कदम उठाए और अभिभावकों को वास्तविक राहत दिलाए.