छठवीं उ.प्र. कृषि विज्ञान कांग्रेस का भव्य समापन: कृषि क्षेत्र में नवाचार और डिजिटल कृषि पर हुआ मंथन
Gargachary Times
10 April 2026, 21:42
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Lucknow
उत्तर प्रदेश कृषि अनुसंधान परिषद (उपकार) द्वारा आयोजित "विकसित कृषि विकसित भारत @2047 के लिये कृषि में परिवर्तन" विषयक तीन दिवसीय छठवीं उ.प्र. कृषि विज्ञान कांग्रेस का आज राष्ट्रीय गन्ना संस्थान में विधिवत समापन हो गया। समापन सत्र के मुख्य अतिथि, प्रदेश के उद्यान एवं कृषि विपणन राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री दिनेश प्रताप सिंह ने कृषि शिक्षा, अनुसंधान और प्रसार के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वाले 14 एकेडमी एवार्डी, 09 फैलो एवार्डी और 07 ऑनरेरी फैलो को सम्मानित किया। इस अवसर पर भारतीय चरागाह एवं चारा अनुसंधान संस्थान (झांसी), रानी लक्ष्मी बाई केन्द्रीय कृषि विश्वविद्यालय (झांसी) और असारा बायोटेक प्रोड्यूसर्स कंपनी लिमिटेड (बाराबंकी) को उत्कृष्ट कृषि विज्ञान संस्थान/विश्वविद्यालय पुरस्कार से नवाजा गया।
कांग्रेस के अंतिम दिन दो महत्वपूर्ण तकनीकी सत्र और दो ओरल प्रस्तुतीकरण सत्र आयोजित किए गए। सत्रों के दौरान लाइवलीहुड सिक्योरिटी, डेयरी, लाइवस्टॉक, पोलट्री, फिश फार्मिंग और डिजिटल एग्रीकल्चर जैसे समसामयिक विषयों पर गहन पैनल डिस्कशन हुआ। प्रथम तकनीकी सत्र में डॉ. पी. के. पाण्डेय, डॉ. चेतना गंगवार, डॉ. उमेश सिंह, डॉ. रचना वर्मा और डॉ. मनीष कुमार चतली जैसे प्रसिद्ध वैज्ञानिकों ने अपने व्याख्यान दिए। वहीं द्वितीय तकनीकी सत्र में डॉ. जे.सी. राना, डॉ. राघवेन्द्र सिंह, डॉ. सुधांशु सिंह, पद्मश्री श्री भारत भूषण त्यागी और श्री भानु प्रताप सिंह ने कृषि की भावी चुनौतियों और समाधानों पर प्रकाश डाला।
विशेषज्ञों ने कृषि और पशुपालन क्षेत्र की चुनौतियों को प्रमुखता से उठाया। डॉ. चेतना गंगवार ने पशुधन क्षेत्र में कम उत्पादकता, चारे की कमी और कमजोर बाजार संपर्क को किसानों के शोषण का मुख्य कारण बताया। डॉ. रचना वर्मा ने पोलट्री क्षेत्र में एंटीबायोटिक प्रतिरोध के खतरों के प्रति आगाह किया। गौ सेवा आयोग के अध्यक्ष श्री श्याम बिहारी गुप्ता ने मिट्टी के स्वास्थ्य और जैव विविधता के संरक्षण के लिए गौ-आधारित प्राकृतिक खेती को एकमात्र विकल्प बताया। श्री भानु प्रताप सिंह ने जानकारी दी कि मिट्टी में घटता मृदा जैविक कार्बन फसल उत्पादन के लिए गंभीर खतरा है, जिससे निपटने के लिए किसानों को जैविक खाद और फसल चक्र जैसी टिकाऊ पद्धतियां अपनानी होंगी।
सम्मानित होने वाले प्रमुख वैज्ञानिकों में डॉ. संजय कुमार सिंह, डॉ. राजेश कुमार, डॉ. यश पाल सिंह, डॉ. विकास चंद्र, डॉ. संगीता श्रीवास्तव, डॉ. पवन कुमार सिंह और डॉ. चेतना गंगवार शामिल रहे। ऑनरेरी फैलो के रूप में डॉ. त्रिवेणी दत्त (कुलपति, मेरठ), डॉ. अभिजित मित्र (कुलपति, मथुरा) और डॉ. यू.पी. सिंह (निदेशक, बीएचयू) को उनके विशिष्ट योगदान के लिए पुरस्कृत किया गया। कार्यक्रम में उपकार के अध्यक्ष कैप्टन (से.नि.) विकास गुप्ता और प्रधान वैज्ञानिक अधिकारी डॉ. विनोद कुमार तिवारी सहित देश भर के प्रतिष्ठित संस्थानों के वैज्ञानिक उपस्थित रहे।