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आस्था के नाम पर 'जानलेवा' अव्यवस्था; अटल्ला चुंगी पर पलटा ई-रिक्शा, कई घायल, प्रशासन की कार्यशैली पर उठे सवाल

Gargachary Times 12 April 2026, 19:46 66 views
Mathura
आस्था के नाम पर 'जानलेवा' अव्यवस्था; अटल्ला चुंगी पर पलटा ई-रिक्शा, कई घायल, प्रशासन की कार्यशैली पर उठे सवाल
वृंदावन : धर्मनगरी वृंदावन इन दिनों श्रद्धालुओं की भारी भीड़ और प्रशासनिक विफलता के दोहरे संकट से जूझ रही है। शुक्रवार को यमुना में हुए भीषण नाव हादसे, जिसमें 13 लोगों की जान चली गई, उससे प्रशासन ने अब तक कोई सबक नहीं लिया है। रविवार को एक बार फिर अटल्ला चुंगी चौराहे पर ओवरलोडिंग के कारण UP85FT1355 नंबर का ई-रिक्शा पलटने से आधा दर्जन से अधिक श्रद्धालु घायल हो गए। यह घटना स्पष्ट करती है कि वृंदावन में यात्रियों की सुरक्षा केवल भगवान भरोसे है। ​'भूसे' की तरह भरी जा रही हैं सवारियां ​दुर्घटनाग्रस्त ई-रिक्शा में क्षमता से कई गुना अधिक, करीब 12 से 14 सवारियां बैठी थीं, जबकि नियमानुसार केवल चार लोगों की अनुमति है। यही स्थिति शहर के हर कोने में है। ई-रिक्शा और टेंपो चालक चंद रुपयों के लालच में श्रद्धालुओं को 'भूसे' की तरह वाहनों में भर रहे हैं। विडंबना यह है कि ये ओवरलोड वाहन हर चौराहे और पुलिस चौकी के सामने से बेधड़क होकर गुजरते हैं, लेकिन खाकी वर्दीधारी मूकदर्शक बने रहते हैं। यह दृश्य प्रशासन की उस लाचारी और 'दबाव' की कहानी बयां करता है, जिसके कारण वह इन दबंग चालकों पर हाथ डालने से कतरा रहा है। ​जाम के झाम में 'अंतिम सफर' भी मुश्किल ​श्रद्धालुओं की अनियंत्रित संख्या अब स्थानीय निवासियों के लिए अभिशाप बन चुकी है। रविवार को वृंदावन के शाहजी मंदिर क्षेत्र में संकीर्ण गलियों और भीड़ के कारण एक शव यात्रा वाहन (बैकुंठ रथ) घंटों तक फंसा रहा। मृतक के परिजनों को अंतिम संस्कार के लिए जाने हेतु घंटों इंतजार करना पड़ा, जो मानवीय संवेदनाओं पर एक गहरा प्रहार है। भीड़ का आलम यह है कि स्थानीय निवासी अपने ही घरों में कैद होने को मजबूर हैं; वे न तो बाजार जा सकते हैं और न ही किसी आपात स्थिति में घर से बाहर निकल पा रहे हैं। ​ ​शुक्रवार की त्रासदी के बाद उम्मीद थी कि प्रशासन नावों से लेकर सड़कों तक सुरक्षा व्यवस्था पुख्ता करेगा, लेकिन जमीन पर स्थिति इसके उलट है। श्रद्धालुओं की अत्यधिक संख्या ही अब उनका 'काल' बनती जा रही है। ​पुलिस की चुप्पी: हर चौराहे पर तैनात पुलिस बल केवल तमाशबीन बना हुआ है। डग्गामार वाहनों और ओवरलोड ई-रिक्शों पर कार्रवाई न होना मिलीभगत की ओर इशारा करता है। ​ शहर में चर्चा है कि ई-रिक्शा और टेंपो यूनियनों के राजनीतिक दबाव के आगे प्रशासन पूरी तरह नतमस्तक है, जिसके कारण आम आदमी की जान दांव पर लगी है। ​अटल्ला चुंगी की घटना तो महज एक चेतावनी है। शाहजी मंदिर के पास फंसी एम्बुलेंस और शव वाहन इस बात के सबूत हैं कि वृंदावन का ट्रैफिक मैनेजमेंट पूरी तरह ध्वस्त हो चुका है। यदि समय रहते ई-रिक्शा के रूट निर्धारित नहीं किए गए और ओवरलोडिंग पर तत्काल रोक नहीं लगाई गई, तो शुक्रवार जैसी बड़ी त्रासदी सड़क पर भी दोहराई जा सकती है। क्या प्रशासन किसी और बड़ी मौत का इंतजार कर रहा है?
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