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स्थापना से लेकर आज तक विकास को तरसता धौलपुर

Gargachary Times 17 April 2026, 09:32 6 views
Dholpur
स्थापना से लेकर आज तक विकास को तरसता धौलपुर
डा हरिप्रकाश लवानिया धौलपुर स्वतंत्रता से पहले धौलपुर रियासत काल में एक जागीर था लंबी प्रतीक्षा के बाद 15 अप्रैल 1982 को भरतपुर से अलग होकर धौलपुर को राजस्थान का 27 वन जिला घोषित किया गया जिसमें बाड़ी बसेड़ी सर मथुरा मनिया एवं राजा के राजा से बड़े काशन को शामिल किया गया ऐतिहासिक तथ्यों के आधार पर 11वीं साड़ी में तो अमर वंश के शासक राजा ढोलन देव द्वारा धवलपुरी नाम से इसकी स्थापना की गई थी जिसे वर्तमान में धौलपुर के नाम से जाना जाता है चंबल के वीहडो से लेकर समस्त तीर्थो के भांजे मचकुंड एवं लाल पत्थर में जिले के सबसे प्राचीन एवं स्वयं प्रकट हुए शिवलिंग भोला सैंपऊ सिटी पैलेस शाही बावड़ी निहाल टावर चोपड़ा महादेव मंदिर शेरगढ़ किला अनायासही लोगों को अपनी ओर आकर्षित करते हैं धौलपुर जिला उत्तर में उत्तर प्रदेश के आगरा एवं दक्षिण में मध्य प्रदेश के मुरैना जिले से अपनी सीमा विभाजित करता है यह जिला अपनी सांस्कृतिक विरासत कासाक्षी एवं समृद्ध परंपरा का धनी है यहां का लाल पत्थर जो देश में ही नहीं विदेश में भी अपनी लोकप्रियता एवं स्थिरता का परचम लहरा रहा है किंतु सरकारों की ओर से इस व्यवसाय की ओर हमेशा से ध्यान नहीं दिया गया है यही कारण है कि आज इस व्यवसाय से जुड़े व्यापारी लाल पिता शाही का शिकार होते जा रहे हैं दिल्ली के लाल किले में इसी रेड स्टोन का अधिकांक्षित है प्रयोग हुआ है महाराजा मचकुंड द्वारा भगवान इंद्र की धाराओं के साथ हुए युद्ध में सहायता करना भगवान इंद्र द्वारा महाराज मचकुंड को चरण निद्रा का बर देना कालयवन राक्षस द्वारा ऋषि मुनियों को परेशान करना भगवान श्री कृष्ण द्वारा कालिया वन को चुनौती देकर महाराजा मचकुंड की गुफा में जाना कालिया वन द्वारा महाराजा मचकुंड को निद्रा से जगाना महाराजा मचकुंड की क्रोध उसे रक्षा कालिया वन का भस्म हो जाना इस सब का जीता जागता उदाहरण समर्थ तीर्थ का भांजा कहे जाने वाले धौलपुर मचकुंड पर साफ दृष्टिगोचर होता है इसके प्रति जिले वासियो में अटूट आस्था है किंतु इसके विकास के लिए भी प्रशासन एवं जनता द्वारा ईमानदारी से प्रयास नहीं किए गए जीवन दाहिनी चंबल नदी जिसमें घड़ियालों के लिए चिन्हित क्षेत्र में घड़ियालों को स्वच्छंद विचरण करता देख अनायासी गुदगुदी पैदा होती है किंतु सरकार का यह प्रोजेक्ट लोगों को लुभाने में खड़ा नहीं उतर रहा है चंबल के बीहड़ो में जहां कभी बागी रहा करते थे अब उनकी जगह रेत माफिया होने ले ली है पुलिस की मुठभेड़ अब वागियों से नहीं बल्कि चंबल के अवैध कारोबार से जुड़े रेट माफियाओं से होने के समाचार अक्सर मिल जाते हैं न्यायालय के आदेश की पालना करना जहां एक और प्रशासन एवं पुलिस की जिम्मेदारी है वहीं दूसरी ओर बेरोजगारी से जूझते युवाओं को चंबल बजरी का व्यापार रोजगार उपलब्ध करा रहा है सरकार को चाहिए की बीच का मार्ग निकाले ताकि रोजगार के साथ-साथ प्राकृतिक संसाधन अपना अस्तित्व बचाए रखें जनसंख्या की बढ़ोतरी के साथ-साथ रोजाना बस रही कॉलोनी एवं रोजाना बन रही नहीं इमारतों से धौलपुर का आकार भी बढ़ रहा है मकान बनाते समय एवं कालोनियां बताते समय निर्धारित मानवों का पालन नहीं करने से समस्याएं भी विकराल रूप लेती जा रही हैं बगत दो वर्षों में धौलपुर की विभिन्न कॉलोनी यो मैं जल भरा व एक प्रमुख समस्या बना हुआ है जिसका उपाय प्रशासन द्वारा आज तक नहीं किया गया है जब किसी जलप्रव का मुद्दा धौलपुर विधायिका शोभा रानी कुशवाहा विधानसभा तक में उठा चुकी हैं पुराने नाले एवं जल निकासी की जगह पर अतिक्रमणकारियों द्वारा अवैध निर्माण किया जा चुके हैं तथा अधिकांश लोग जल भराव के कारण अपने मकानों को बेचकर दोबारा व्यवस्था करना चाहते हैं धौलपुर जिले में प्रदेश को दो-दो मुख्यमंत्री दिए हैं किंतु जिले का विकास 44 वर्ष बीत जाने के बाद भी रेग रहा है भरतपुर से अलग होने पर जहां जिले में जनसंख्या लगभग 6 लाख थी जोकि वर्तमान में 15 लाख के आसपास पहुंच चुकी है 1982 में जिले की साक्षरता दर 71.5 थी जो कि अब 76 के आसपास है जिला घोषित होने के बाद जिले में चार की जगह 8 तहसील हो गई हैं पहले जहां रास्तों का आकार 30 से 40 फुट होता था आज भी सिकुड़कर 15 से 20 फीट हो चुके हैं इन वर्षों में सैंपऊ को पंचायत से नगर पालिका धौलपुर को नगरपालिका से नगर परिषद लॉ कॉलेज थर्मल पावर जिला अस्पताल मेडिकल कॉलेज इंजीनियरिंग कॉलेज नवीन न्यायालय भवन धौलपुर भरतपुर हाईवे चेंबर लिफ्ट परियोजना धौलपुर गंगानगर रेल सेवा इत्यादि के क्षेत्र में सुविधाओं का विस्तार हुआ है किंतु राजनीतिक पदों पर बैठे लोगों को इसका श्रेय नहीं दिया जा सकता किंतु राजाखेड़ा क्षेत्र में चंबल का पानी हो या जिला मुख्यालय का बस अड्डा धौलपुर के विकास के लिए न सिर्फ राजनीतिज्ञों को अपनी संकीर्ण मानसिकता एवं राजनीतिक सोच त्याग कर विकास के लिए एक मंच पर आना होगा वहीं आम जनता को भी नियमों एवं कानून का पालन करते हुए जिले के विकास में कंधे से कंधा मिलाकर चलना होगा
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