समृद्धि का आधार बनेगी गौ माता, गाय के गोबर-गोमूत्र का जैविक खाद के रूप में प्रयोग कर भूमि की उर्वरा शक्ति में लाया जाएगा
Gargachary Times
18 April 2026, 20:07
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Mainpuri
रिपोर्ट प्रधूम शाक्य
मैनपुरी: अध्यक्ष गो-सेवा आयोग उ.प्र. श्याम बिहारी गुप्ता, सदस्य रमाकांत उपाध्याय एवं आयोग की संयुक्त टीम ने पत्रकारों से संवाद के उपरांत जनपद की समस्त गौशालाओं की व्यवस्थाओं, गोवंश के स्वास्थ्य, पोषण एवं संरक्षण की स्थिति के संबंध में आयोजित समीक्षा बैठक में अधिकारियों को निर्देशित करते हुए कहा कि गौशालाओं का संचालन केवल औपचारिकता न होकर एक जिम्मेदारीपूर्ण एवं परिणामोन्मुख व्यवस्था के रूप में किया जाए, सरकार द्वारा गोवंश के संरक्षण हेतु पर्याप्त धनराशि उपलब्ध कराई जा रही है, यह सुनिश्चित किया जाना आवश्यक है कि इस धन का उपयोग पूर्ण पारदर्शिता एवं प्रभावशीलता के साथ सीधे गोवंश के हित में किया जाए। उन्होने कहा कि प्रत्येक गौशाला में गोवंश को निर्धारित मानकों के अनुसार पर्याप्त पोषण उपलब्ध कराया जाए, वर्तमान में प्रति गोवंश निर्धारित धनराशि का समुचित उपयोग करते हुए यह सुनिश्चित किया जाए कि किसी भी स्थिति में गोवंश कुपोषित न रहे। उन्होने अधिकारियों को निर्देशित करते हुए कहा कि यदि आवश्यक हो तो पोषण स्तर को और बेहतर बनाने हेतु अतिरिक्त संसाधनों का भी समुचित उपयोग किया जाए, विशेष रूप से यह सुनिश्चित किया जाए कि प्रत्येक गोवंश को प्रतिदिन पर्याप्त मात्रा में चोकर एवं अन्य पौष्टिक आहार उपलब्ध हो, जिससे उसके स्वास्थ्य में तेजी से सुधार हो सके, हरे चारे की उपलब्धता को गोवंश के स्वास्थ्य के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि सभी गौशालाओं में उपलब्ध गौचर भूमि का पूर्ण उपयोग किया जाए, नेपियर घास एवं अन्य हरे चारे का उत्पादन प्राथमिकता के आधार पर कराया जाए ताकि लंबे समय तक स्थायी रूप से पोषण की व्यवस्था सुनिश्चित हो सके, सरकार द्वारा इस उद्देश्य हेतु उपलब्ध कराई जा रही धनराशि का उपयोग केवल चारा उत्पादन के लिए ही किया जाए और इसकी नियमित निगरानी भी की जाए।
अध्यक्ष गो-सेवा आयोग ने कहा कि पशु चिकित्सक नियमित रूप से गौशालाओं का भ्रमण कर गोवंश के स्वास्थ्य की निगरानी करें, प्रत्येक 03 माह पर कीड़ों की दवा खिलाई जाये, टीकाकरण, अन्य आवश्यक उपचार किए जाएं, विशेष रूप से कमजोर एवं कुपोषित गोवंश की पहचान कर उनके लिए अलग से पोषण एवं उपचार की व्यवस्था की जाए ताकि उनकी स्थिति में शीघ्र सुधार हो सके। उन्होने कहा कि सभी गौशालाओं में साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखा जाए, नांद, पानी के टैंक एवं पूरे परिसर की नियमित सफाई कराई जाए, स्वच्छ एवं ताजे पेयजल की उपलब्धता सुनिश्चित की जाए ताकि गोवंश किसी भी प्रकार के संक्रमण से सुरक्षित रह सके, समय-समय पर पानी, चारे की नादों की चूने से पुताई कराई जाए, जिससे कीटाणुओं का प्रभाव कम हो और स्वच्छ वातावरण बना रहे, गोवंशों को नियमित रूप से नमक एवं अन्य आवश्यक तत्व खिलाये जाएं ताकि गोवंश के स्वास्थ्य में सुधार हो। उन्होने कहा कि गोबर का वैज्ञानिक तरीके से निस्तारण कर जैविक खाद तैयार की जाए इसके लिए जालीदार संरचना अथवा अन्य उपयुक्त तकनीकों का उपयोग किया जाए इससे जहां एक ओर स्वच्छता बनी रहेगी वहीं गौशालाओं को अतिरिक्त आय का स्रोत भी प्राप्त होगा, जिससे उनकी आत्मनिर्भरता बढ़ेगी। उन्होने कहा कि प्रत्येक गौशाला में गोवंश की वास्तविक संख्या का सत्यापन कर पंजिका में सही अंकन सुनिश्चित किया जाए, कुछ स्थानों पर वास्तविक संख्या एवं अभिलेखों में अंतर पाया गया, जो गंभीर अनियमितता है, इस प्रकार की किसी भी विसंगति को तत्काल समाप्त करते हुए गोवंश की टैगिंग सुनिश्चित की जाए और पूरी प्रक्रिया को पारदर्शी बनाया जाए।
अध्यक्ष, सदस्य गो-सेवा आयोग द्वारा जानकारी करने पर मुख्य पशु चिकित्साधिकारी ने बताया कि जनपद में 49 गौशालाएं संचालित है, जिसमें से 03 वृहद गौशाला अहिरवा, इज्जतपुर खजुरारा, गुराई में संचालित है, 10 कान्हा गौ आश्रय स्थलों का संचालन स्थानीय निकायांे द्वारा किया जा रहा है, जनपद में संचालित गौशालाओं में 12 हजार 102 गोवंश संरक्षित है, संरक्षित गोवंशों में से अब तक 22 हजार 238 गोवंश मुख्यमंत्री गोधन सहभागिता योजना में गोपालकों को उपलब्ध कराया जा चुका है, सभी को रू. 1500 प्रति माह की दर से भरण-पोषण हेतु धनाराशि उपलब्ध कराई जा रही है। उन्होंने बताया कि जनपद में संचालित गौशालाओं में हरे चारे की उपलब्धता हेतु 35 हेक्टेयर में नेपियर घास की बुवाई कराई गई है, योजना के अंतर्गत एक हेक्टेयर पर रू. 22 हजार की धनराशि उपलब्ध कराई गई है, जनपद के 20 किसानों को 02 किश्तों में रू. 04 हजार एवं नेपियर घास की जड़ उपलब्ध करायी गयी हैं, जिस पर उन्होंने कहा कि जिन किसानों द्वारा नेपियर घास की बुवाई की गई है, उनके नाम मय मोबाइल नम्बर के उपलब्ध कराये जायें। अध्यक्ष, सदस्य ने नोडल अधिकारियों, अधिशाषी अधिकारी नगर निकाय, खंड विकास अधिकारियों को निर्देशित करते हुए कहा कि जब भी अपने क्षेत्र की गौशालाओं का निरीक्षण करने जाएं, वहां की गोचर भूमि पर हरे-चारे की बुवाई, जिन किसानों द्वारा नेपियर घास लगाई गई है, उसका स्थलीय निरीक्षण करें।
इस दौरान जिलाधिकारी अंजनी कुमार सिंह, मुख्य विकास अधिकारी नेहा बंधु, अपर निदेशक पशुधन डी.पी. सिंह, उपायुक्त एनआरएलएम शौकत अली, जिला विकास अधिकारी अजय कुमार, परियोजना निदेशक डीआरडीए सत्येन्द्र सिंह, उप निदेशक कृषि नरेन्द्र कुमार त्रिपाठी, जिला समाज कल्याण अधिकारी अशोक कुमार, जिला पंचायत राज अधिकारी अवधेश सिंह, अधिशाषी अधिकारी नगर पालिका बुद्धि प्रकाश, समस्त खंड विकास अधिकारी, पशु चिकित्साधिकारियों के अलावा अजय सोलंकी, डा. सुशीलकांत उपाध्याय, अनुज, प्रवेन्द्र राठौर आदि उपस्थित रहे, बैठक का संचालन मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डा. सोमदत्त ने किया।