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ससुर को ढूंढने निकले दामाद की हार्ट अटैक से मौत

Gargachary Times 12 May 2026, 21:23 88 views
Mathura
ससुर को ढूंढने निकले दामाद की हार्ट अटैक से मौत
फरह। फरह के गांव पींगरी में एक ऐसा हृदयविदारक हादसा हुआ जिसने पूरे गांव को झकझोर कर रख दिया। दो बेटियों की शादी के महज 22 दिन बाद ही पिता की मौत हो गई। दर्दनाक बात यह रही कि जिस दामाद को ससुर लापता होने की सूचना पर रात में घर से बुलाया गया, उसी दामाद की रात एक बजे अचानक तबीयत बिगड़ने से मौत हो गई। पांच बेटियों और दो बेटों के सिर से पिता का साया उठ गया। जानकारी के अनुसार थाना फरह के गांव पींगरी निवासी सुल्तान सिंह (40) पुत्र भगवान सिंह राजमिस्त्री का काम कर परिवार का भरण-पोषण करते थे। सुल्तान सिंह ने 22 दिन पहले ही अपनी दो बेटियों मुस्कान और संध्या की धूमधाम से शादी की थी। घर में अभी शादी की खुशियां बाकी थीं, मेहंदी का रंग भी नहीं उतरा था कि मातम पसर गया। परिजनों ने बताया कि सोमवार रात करीब 10 बजे बरेरा से सुल्तान की सास का फोन आया। सास ने घबराते हुए कहा कि "दामादजी, आपके ससुर जी शाम से कहीं चले गए हैं। अभी तक घर नहीं लौटे और फोन भी साथ नहीं ले गए।" ससुर के लापता होने की खबर सुनते ही सुल्तान सिंह चिंतित हो उठे। परिवार को ढांढस बंधाकर वे रात में ही अपनी ससुराल के लिए रवाना हो गए। बताया गया कि ससुराल पहुंचने के बाद सुल्तान सिंह ससुर को ढूंढने के लिए आसपास पूछताछ कर रहे थे। इसी दौरान रात करीब एक बजे अचानक उनके पेट में तेज दर्द उठा। परिजन आनन-फानन में उन्हें अस्पताल ले गए, लेकिन डॉक्टरों ने जांच के बाद उन्हें मृत घोषित कर दिया। डॉक्टरों ने आशंका जताई कि हार्ट अटैक से मौत हुई है। सुल्तान सिंह की मौत की खबर सुनते ही पींगरी गांव में कोहराम मच गया। पत्नी रेणु का रो-रोकर बुरा हाल है। वह बिलखते हुए बार-बार यही कह रही थी कि "मेरा और मेरी बेटियों का अब कोई नहीं है। मेरा कौन ध्यान रखेगा अब। अभी तो बेटियों के हाथों की हल्दी भी नहीं छूटी थी।" बुजुर्ग मां शीला देवी की तबीयत भी बेटे की मौत की खबर सुनकर बिगड़ गई। रोते हुए बोलीं, "मेरी बुढ़ापे की लाठी टूट गई। अब मेरा सहारा कौन बनेगा।" सबसे दर्दनाक मंजर तब देखने को मिला जब नवविवाहित बेटियां मुस्कान और संध्या पिता के शव से लिपटकर जोर-जोर से रोने लगीं। बिलखते हुए बोलीं, "पापा ये भगवान ने क्या किया। अभी तो हमारे पीले हाथों की हल्दी भी नहीं छूटी है। आप हमें और मेरे दोनों छोटे भाइयों को छोड़कर चले गए। आपकी बहुत जरूरत थी पापा, ये क्या हुआ भगवान।" सुल्तान सिंह अपने पीछे पत्नी रेणु, पांच बेटियां और दो बेटे छोड़ गए हैं। बड़ी दो बेटियों की शादी हो चुकी है, जबकि तीन बेटियां और दो बेटे अभी छोटे हैं। परिवार का इकलौता कमाने वाला चला गया। ग्रामीणों ने बताया कि सुल्तान बेहद मिलनसार और मेहनती व्यक्ति थे। राजमिस्त्री का काम कर जैसे-तैसे परिवार पाल रहे थे। कर्ज लेकर बेटियों की शादी की थी। मंगलवार सुबह जब शव गांव पहुंचा तो हर आंख नम थी। पूरे गांव में मातम पसरा हुआ है। ग्रामीण परिवार को ढांढस बंधा रहे हैं। अब सवाल यह उठ रहा है कि सात बच्चों और बुजुर्ग मां का भरण-पोषण कैसे होगा। परिवार ने शासन-प्रशासन से आर्थिक मदद की गुहार लगाई है। ग्रामीणों का कहना है कि क्षेत्र के समाजसेवी और जनप्रतिनिधि अगर आगे आएं तो इस बेसहारा परिवार को संबल मिल सकता है। वरना मासूम बच्चे ऐसे ही तड़पते रहेंगे। देखना होगा कि शासन-प्रशासन और क्षेत्र के नेता इस दुख की घड़ी में परिवार के लिए मदद का हाथ बढ़ाते हैं या नहीं। फिलहाल पूरे क्षेत्र में इस घटना को लेकर शोक की लहर है।
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