पेपर माफिया सरकार पर हावी युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ कर रही है सरकार
Gargachary Times
14 May 2026, 20:41
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Dholpur
डॉक्टर हरिप्रकाश लवानिया
धौलपुर: किसी भी राज्य की प्रगति उसकी शिक्षा प्रणाली और युवाओं के भविष्य के प्रति सरकार की गंभीरता पर निर्भर करती है भारत जैसे देश में जहां डॉक्टर बनना लाखों परिवारों का सपना होता है नित जैसी महत्वपूर्ण परीक्षा का रद्द होना या उसमें भारी अनियमितता आना केवल एक प्रशासनिक विफलता नहीं बल्कि लाखों छात्र-छात्राओं के विश्वास की हत्या है निट 2026 जैसी महत्वपूर्ण परीक्षा के आयोजन में बिफलतासरकार की जर्जरता को दर्शाता है एक छात्र नीट परीक्षा की तैयारी के लिए अपने बहुमूल्य जीवन के समय को एवं भगवानों की गाड़ी कमाई को झोंक देता है परीक्षा रद्द होने से न सिर्फ उनका साल बर्बाद होगा बाल्किउनपर मनोवैज्ञानिक दवा भी बढ़ जाता है बार-बार परीक्षा के तलने अथवारद्द होने से मेधावी छात्र मानसिक अवसाद में आ जाते हैं सरकार की जिम्मेदारी केवल परीक्षा के आयोजन तक सीमित नहीं है बालको से पारदर्शी एवं समय से संपन्न करना भी उसकी जिम्मेदारियां में शामिल है परीक्षा रद्द होना स्पष्ट रूप से नेशनल टेस्टिंग एजेंसी और संबंधित मंत्रालय की कार्य दक्षता पर सवालिया निशान लगता है यदि तकनीकी एवं सुरक्षा के इतने दागों के बावजूद पेपर लिए होती है तो यह सरकारी तंत्र की कमजोरी को उजागर करता है सरकार अक्षर जांच कमेटियों का गठन पर अपनी जिम्मेदारी से पन्ना झाड लेती है लेकिन धरातल पर कार्य सुरक्षा एवं सुधारो का अभाव साफ दिखाई देता है
नीट परीक्षा केवल अमीरों के लिए नहीं है इसमें गांव एवं शहरों के छोटे बच्चेभी शामिल हैं परीक्षा रद्द हो जाने के बाद दोबारा आयोजन का खर्चा कोचिंग की फीस और यात्रा का बोझ गरीब परिवारों की कमर तोड़ देता है इसके अलावा इससे देश की स्वास्थ्य व्यवस्था भी प्रभावित होती है क्योंकि समय पर डॉक्टर नहीं मिलने से भविष्य में चिकित्सा सेवा में कमी आने की संभावना बढ़ जाती है लोकतंत्र में सरकार जनता के प्रति जवाब देयहोती है
सरकार को चाहिए परीक्षा प्रक्रिया में पूर्ण पारदर्शिता बरती जाए और दोषियों पर कडी कार्यवाही हो पेपर लिखो रोकने के लिए अत्याधुनिक इंक्रिप्शन और सुरक्षित परीक्षा केंटो का चयन किया जाए प्रभावित छात्रों के लिए मानसिक परामर्श और वित्तीय सहायता उपलब्ध कराई जाए जांच में कर्मचारियों की मित्रता पाई जाने पर तत्काल प्रभाव से नौकरी से हटाया जाए किसी मंत्री को दोषी पाए जाने पर उसके आजीवन चुनाव लड़ने पर प्रतिबंध लगाया जाए यदि कोई बाहरी व्यक्ति इस कृत्य में शामिल हो तो आजीवन कारावास की सजा सुनाई जाए
शिक्षा एवं स्वास्थ्य किसी भी देश के दो मजबूत स्तंभ होते हैं नित जैसी परीक्षा का रद्द होना इस बात का प्रमाण है कि हमारी व्यवस्था में गहरी सुधारो की आवश्यकता है इससे पूर्व हुए पेपर लीक प्रकरणों से सरकार द्वारा दोषारोपण करने के अलावा कोई सबक नहीं सीखि गया सरकार कोइ से हल्की खामी नहीं मान कर राष्ट्रीय संकट के रूप में देखना चाहिए जब तक जिम्मेदारी से नहीं होगी अपराधियों को दंड नहीं मिलेगा तब तक छात्रों का व्यवस्था से भरोसा उठना स्वाभाविक है सरकारी एग्जाम की एजेंसीयो को जागना होगा क्यों प्रदेश का भविष्य धाम पर लगा हुआ है