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वृंदावन में व्यावसायिकता का बढ़ता मकड़जाल: खतरे में कुंज गलियों का पुरातन स्वरूप, धनबल के आगे बौना साबित हो रहा प्रशासन

Gargachary Times 25 May 2026, 19:36 1 views
Mathura
वृंदावन में व्यावसायिकता का बढ़ता मकड़जाल: खतरे में कुंज गलियों का पुरातन स्वरूप, धनबल के आगे बौना साबित हो रहा प्रशासन
वृंदावन। पुनीत शुक्ला ठाकुर जी की अनन्य भक्ति, सेवा और संकरी कुंज गलियों के लिए विश्व प्रसिद्ध श्रीधाम वृंदावन की पौराणिक पहचान पर व्यावसायिकता का ग्रहण लगता जा रहा है। आस्था के इस पावन केंद्र में इन दिनों एक ऐसा खेल चल रहा है जो आने वाले समय में यहाँ के मूल स्वरूप को पूरी तरह नष्ट कर देगा। वृंदावन के व्यस्ततम और संकरे रिहायशी इलाकों में धड़ल्ले से आवासीय भवनों को खरीदकर उन्हें बड़े-बड़े कमर्शियल शोरूमों और बहुमंजिला इमारतों में बदला जा रहा है। ​इस पूरे खेल में मथुरा-वृंदावन विकास प्राधिकरण (MVDA) की भूमिका सबसे अधिक संदिग्ध और सवालों के घेरे में है। आरोप है कि पैसों के दम पर नियमों को ताक पर रखकर आवासीय भवनों के नक्शों की आड़ में कमर्शियल और बहुमंजिला इमारतों के नक्शे धड़ल्ले से पास किए जा रहे हैं। धनबल के दम पर पूंजीपति यहाँ के स्थानीय निवासियों के घरों को खरीदकर इस पावन भूमि को पूरी तरह से व्यावसायिक हब बनाने पर तुले हुए हैं। ​रविवार को फिर दहला वृंदावन, मानकों को ताक पर रखकर बना था शोरूम ​हाल ही में रविवार को अठखंभा स्थित बल्लीगंज में एक शोरूम के गोदाम में हुए भीषण अग्निकांड ने प्रशासन के दावों की पोल खोलकर रख दी है। इस हादसे को लेकर प्रख्यात सामाजिक कार्यकर्ता प्रहलाद कृष्ण शुक्ल ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। उन्होंने बताया कि यह पूरी इमारत नियमों और मानकों को ताक पर रखकर बनाई गई थी। इस विवादित इमारत में नीचे तहखाना, फिर गोदाम, शोरूम और सबसे ऊपरी मंजिल पर रिहायशी आवास बना दिया गया है। ​उन्होंने आरोप लगाया कि इस अवैध और खतरनाक निर्माण की शिकायत उनके द्वारा पूर्व में भी लगातार प्रशासन से की गई थी, लेकिन भ्रष्टाचार के चलते कोई कार्रवाई नहीं हुई। रविवार को हुआ यह हादसा यदि और गंभीर रूप ले लेता, तो संकरी गली के कारण आसपास के कई मकान इसकी चपेट में आ जाते और बड़े पैमाने पर जान-माल का नुकसान होना तय था। ​ ​सामाजिक कार्यकर्ता प्रहलाद कृष्ण शुक्ल का कहना है कि वृंदावन के व्यस्ततम क्षेत्रों में पिछले कुछ वर्षों के भीतर व्यावसायिक शोरूम या गोदाम में आगजनी की यह तीसरी बड़ी घटना है। इसके बावजूद प्रशासन लगातार इस संवेदनशील मुद्दे पर समझौतावादी रवैया अख्तियार किए हुए है। आश्चर्य की बात यह है कि देश-विदेश से लाखों श्रद्धालुओं को आकर्षित करने वाले वृंदावन में अब तक दमकल की कोई स्थायी व्यवस्था नहीं की जा सकी है। ​ स्थानीय सजग नागरिकों का कहना है कि कुछ महीने पहले ही रुक्मणि विहार स्थित एक होटल में भीषण अग्निकांड हुआ था। उस समय भी प्रशासन ने जांच के लिए कमेटी गठित कर अपनी जिम्मेदारी से इतिश्री कर ली थी। आज तक न तो उस घटना की कोई जवाबदेही तय हो सकी और न ही मानकों के विपरीत चल रहे अवैध निर्माणों पर कोई लगाम कसी गई। **** बॉक्स** ​संकरी गलियों में 'अग्निकांड' का बड़ा खतरा, राम भरोसे जनता की जान ​इन बहुमंजिला व्यावसायिक इमारतों और शोरूमों के निर्माण ने स्थानीय निवासियों और यहाँ आने वाले श्रद्धालुओं के जीवन को सीधे मौत के कुएं में धकेल दिया है। वृंदावन की गलियां इतनी संकरी और व्यस्त हैं कि यहाँ पैदल चलना भी दूभर होता है। ऐसे में यदि इन शोरूमों में कभी कोई और बड़ा अग्निकांड हो जाए, तो वहाँ तक दमकल की गाड़ी का पहुँचना बिल्कुल असंभव है। सुरक्षा मानकों और फायर एनओसी को ठेंगा दिखाकर बनाए जा रहे ये शोरूम किसी बड़े हादसे को खुला निमंत्रण दे रहे हैं। **** ​ ​यदि हालात यही रहे और विकास प्राधिकरण की यह अनदेखी जारी रही, तो आने वाले 5 से 10 वर्षों के भीतर पुरातन वृंदावन में रहने के लिए एक भी आवासीय घर मौजूद नहीं बचेगा। चारों तरफ केवल दुकानें, मॉल और शोरूम ही नजर आएंगे। स्थानीय संस्कृति और यहाँ के मूल निवासियों का अस्तित्व पूरी तरह समाप्त हो जाएगा। ​समय रहते यदि शासन-प्रशासन ने इस गंभीर मुद्दे पर संज्ञान नहीं लिया और भ्रष्ट अधिकारियों पर नकेल नहीं कसी, तो वृंदावन केवल एक व्यावसायिक केंद्र बनकर रह जाएगा और इसकी सदियों पुरानी आध्यात्मिक आत्मा हमेशा के लिए विलीन हो जाएगी। स्थानीय जनता अब सूबे के मुखिया से इस पूरे सिंडिकेट की निष्पक्ष जांच और सख्त हस्तक्षेप की गुहार लगा रही है।
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