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वृंदावन नगर निगम के दावों की खुली पोल: पुरुषोत्तम मास में नाली के गंदे पानी के बीच से निकलने को मजबूर परिक्रमार्थी

Gargachary Times 25 May 2026, 19:37 1 views
Mathura
वृंदावन नगर निगम के दावों की खुली पोल: पुरुषोत्तम मास में नाली के गंदे पानी के बीच से निकलने को मजबूर परिक्रमार्थी
वृंदावन। पुनीत शुक्ला पुरुषोत्तम मास (मलमास) के पावन अवसर पर श्रीधाम वृंदावन की पंचकोशीय परिक्रमा लगाने का अत्यंत विशेष महत्व है। इस पुण्य लाभ को कमाने के लिए देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु वृंदावन पहुँच रहे हैं। एक ओर जहाँ स्थानीय समाजसेवी संस्थाओं द्वारा श्रद्धालुओं की सेवा में जगह-जगह भंडारे, शीतल जल और शरबत की प्याऊ लगाई जा रही हैं, वहीं दूसरी ओर मथुरा-वृंदावन नगर निगम धार्मिक आस्था के इस महापर्व पर व्यवस्थाओं के नाम पर केवल खानापूर्ति करता नजर आ रहा है। नगर निगम के वीआईपी सफाई दावों की पोल उस वक्त खुल गई, जब सुप्रसिद्ध केसी घाट क्षेत्र में परिक्रमा मार्ग पर नाली का गंदा पानी ओवरफ्लो होकर सड़क पर बहने लगा। स्थिति इतनी बदतर हो गई कि यहाँ से गुजरने वाले लाखों श्रद्धालुओं को नाली के इस बदबूदार और दूषित पानी के बीच से होकर गुजरना पड़ा। आम श्रद्धालुओं के लिए तो इस मार्ग से निकलना दूभर था ही, लेकिन सबसे बदतर स्थिति उन भक्तों की हुई जो जमीन पर लेटकर 'दंडवती परिक्रमा' का कठिन संकल्प लेकर चल रहे हैं। आस्था के वशीभूत होकर इन भक्तों को उसी गंदगी और गंदे पानी के बीच लेटकर अपनी परिक्रमा पूरी करनी पड़ी, जो बेहद कष्टकारी और हृदयविदारक नजारा था। एक तरफ मथुरा-वृंदावन नगर निगम कागजों और विज्ञापनों में सफाई व्यवस्था को लेकर बड़े-बड़े दावे ठोक रहा है, तो वहीं धरातल पर नालियां चोक होने के कारण सड़कों पर गंदा पानी बह रहा है। दूर-दराज के राज्यों और शहरों से आने वाले श्रद्धालु अपने मन में वृंदावन की कैसी छवि लेकर लौटेंगे, यह एक बड़ा सवाल है। परिक्रमा मार्ग की यह दुर्दशा देखकर बाहर से आए भक्त नगर निगम की इस लचर व्यवस्था को कोसने पर मजबूर हैं। एक ओर जहाँ श्रद्धालु इस पावन मास में वृंदावन धाम की परिक्रमा कर पुण्य अर्जित कर रहे हैं, वहीं नगर निगम के अधिकारी अपनी घोर लापरवाही से इस पुण्य कार्य में खलल डाल रहे हैं। अब देखना यह होगा कि इस खबर के प्रकाशन के बाद कुंभकर्णी नींद में सोए नगर निगम के प्रशासनिक अधिकारी जागते हैं और सफाई व्यवस्था दुरुस्त करते हैं, या फिर आस्था के इस केंद्र को यूँ ही बदहाली के आंसू रोने के लिए छोड़ दिया जाएगा।
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