पुरुषोत्तम मास में प्रशासनिक लापरवाही की हद: वाहनों की तेज रफ्तार के बीच 'राम भरोसे' वृंदावन की पंचकोशीय परिक्रमा
Gargachary Times
26 May 2026, 18:31
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Mathura
श्रीधाम वृंदावन। पुनीत शुक्ला
पुरुषोत्तम मास (मलमास) के पावन अवसर पर श्रीधाम वृंदावन में पंचकोशीय परिक्रमा लगाने का विशेष धार्मिक महत्व है। इस पुण्य काल में देश के कोने-कोने से लाखों श्रद्धालु एक महीने के लिए यहाँ आकर निवास करते हैं और पूरी श्रद्धा के साथ प्रतिदिन परिक्रमा लगाते हैं। इनमें बड़ी संख्या उन भक्तों की है जो अत्यंत कठिन 'दंडवती परिक्रमा' (लेटकर परिक्रमा) का संकल्प लेकर मार्ग पर आगे बढ़ते हैं। लेकिन स्थानीय प्रशासन और यातायात पुलिस की घोर लापरवाही के कारण इन श्रद्धालुओं की जान हर पल खतरे में बनी हुई है।
धार्मिक नियमों के अनुसार परिक्रमा मार्ग पूरी तरह से सुरक्षित और वाहनों से मुक्त होना चाहिए, लेकिन यहाँ धरातल पर स्थिति इसके बिल्कुल विपरीत है। परिक्रमा मार्ग में बड़े-बड़े भारी वाहन, कई टायरा ट्रक, ट्रैक्टर-ट्रॉली, टेंपो और ई-रिक्शा धड़ल्ले से तेज रफ्तार के साथ दौड़ते हुए नजर आते हैं।
विशेषकर सायंकाल 5 बजे से लेकर सुबह 9 बजे तक परिक्रमा मार्ग में भक्तों की भारी भीड़ उमड़ती है। इसी समय अवधि में सबसे ज्यादा श्रद्धालु दंडवती परिक्रमा लगाते हैं। जमीन पर लेटकर परिक्रमा लगा रहे इन भक्तों के बिल्कुल पास से जब तेज रफ्तार भारी वाहन गुजरते हैं, तो रूह कांप जाती है। प्रशासन की इस अनदेखी के कारण यहाँ कभी भी कोई बड़ा और दर्दनाक हादसा हो सकता है।
इस अव्यवस्था को लेकर यातायात पुलिस के दावे पूरी तरह खोखले साबित हो रहे हैं। व्यवस्था के नाम पर केवल खानापूर्ति की जा रही है। मुख्य चौराहों पर महज एक-दो सिपाहियों की तैनाती करके पुलिस प्रशासन अपने कर्तव्यों की इतिश्री कर लेता है।
हैरानी की बात यह है कि जिन सिपाहियों की ड्यूटी भारी वाहनों को रोकने के लिए लगाई जाती है, वे परिक्रमा मार्ग के किसी कोने में बैठकर मोबाइल चलाते हुए नजर आते हैं। उन्हें मार्ग में अवैध रूप से घुस रहे वाहनों को रोकने से कोई सरोकार नहीं है। प्रशासनिक अधिकारियों की इस उदासीनता से स्थानीय नागरिकों और श्रद्धालुओं में भारी आक्रोश है। अब देखना यह होगा कि कुंभकर्णी नींद में सोया प्रशासन किसी बड़े हादसे के बाद जागता है या समय रहते श्रद्धालुओं की सुरक्षा सुनिश्चित करता है।