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ठाकुर राधा दामोदर लाल ने मनिहारी भेष में दिए दर्शन, पतंगों के बंगले ने मोहा श्रद्धालुओं का मन

Gargachary Times 26 May 2026, 18:39 32 views
Dharam
ठाकुर राधा दामोदर लाल ने मनिहारी भेष में दिए दर्शन, पतंगों के बंगले ने मोहा श्रद्धालुओं का मन
​वृंदावन। पुनीत शुक्ला स्थापत्य और आस्था के केंद्र वृंदावन के प्रतिष्ठित सप्त देवालयों में शामिल ठाकुर राधा दामोदर मंदिर में भक्ति का एक अनुपम दृश्य सामने आया है। मंदिर में आयोजित विशेष धार्मिक अनुष्ठानों के अंतर्गत आराध्य ठाकुर राधा दामोदर लाल ने अलौकिक 'मनिहारी भेष' धारण कर भक्तों को निहाल किया। इस अद्भुत और मनोहारी रूप के गवाह बनने के लिए देश-विदेश से आए श्रद्धालुओं का हुजूम उमड़ पड़ा। इस अवसर पर ग्रीष्मकालीन सेवा के तहत मंदिर परिसर में सजाया गया भव्य 'पतंग का बंगला' भी भक्तों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र बना रहा। ​धार्मिक मान्यताओं को जीवंत करते हुए इस दिव्य श्रृंगार के पीछे द्वापर युग की उस लीला का स्मरण किया गया, जिसमें भगवान श्रीकृष्ण ने श्रीराधारानी के मान को शांत करने के लिए चूड़ी बेचने वाली (मनिहारी) का रूप धारण किया था। इसी परंपरा का निर्वहन करते हुए ठाकुर जी का सखी स्वरूप में ऐसा दिव्य श्रृंगार किया गया कि उपस्थित भक्त भाव-विभोर होकर 'राधा दामोदर लाल की जय' के जयकारे लगाने लगे। इसके साथ ही भीषण गर्मी में ठाकुर जी को शीतलता प्रदान करने के उद्देश्य से गर्भगृह को रंग-बिरंगी और कलात्मक पतंगों से सजाकर आकर्षक बंगला तैयार किया गया, जिसके मध्य विराजमान ठाकुर जी की छवि देखते ही बन रही थी। ​आयोजन की महत्ता स्पष्ट करते हुए मंदिर के सेवायत आचार्य कृष्ण बलराम गोस्वामी और पूर्ण चंद्र गोस्वामी ने बताया कि मंदिर में प्राचीन ब्रज परंपराओं के अनुसार उत्सव मनाने की एक समृद्ध संस्कृति रही है। ग्रीष्मकाल में ठाकुर जी की सुख-सेवा और भक्तों को उनके दुर्लभ स्वरूपों की अनुभूति कराने के लिए ही इन विशेष बंगलों और श्रृंगारों का आयोजन किया जाता है। उन्होंने मनिहारी भेष को जीव और ईश्वर के बीच के निश्छल और निस्वार्थ प्रेम का प्रतीक बताया। ​इसी पावन उपलक्ष्य में श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए सेवायत आचार्य करुण गोस्वामी महाराज ने पुरुषोत्तम मास (अधिक मास) के आध्यात्मिक महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि सनातन धर्म में इस पवित्र महीने का विशेष स्थान है, जिसमें किए गए जप, तप और दान का फल अनंत गुना हो जाता है। उन्होंने भक्तों को सांसारिक बंधनों से मुक्त होकर ब्रजभूमि में राधा दामोदर नाम का सिमरन करने की प्रेरणा दी, क्योंकि इस मास में की गई भक्ति मोक्ष का मार्ग प्रशस्त करती है। इस भव्य धार्मिक उत्सव के दौरान मंदिर प्रशासन द्वारा सुरक्षा और सुगम दर्शन के कड़े इंतजाम किए गए थे और आरती के उपरांत भक्तों के बीच चरणामृत व विशेष प्रसाद का वितरण किया गया।
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