शिक्षिका पूनम पाराशर पर दलित भेदभाव के आरोप झूठे, बीएसए को सौंपा शपथ पत्र
Gargachary Times
28 May 2026, 20:42
42 views
Mathura
फरह। थाना फरह क्षेत्र के गांव गढ़ाया लतीफपुर स्थित प्राथमिक विद्यालय में कार्यरत सहायक अध्यापिका पूनम पाराशर पर लगाए गए दलित बच्चों से भेदभाव के आरोपों को ग्रामीणों ने सिरे से खारिज कर दिया है। गांव के दर्जनों लोगों ने संयुक्त रूप से शपथ पत्र देकर शिक्षिका के व्यवहार और शिक्षण कार्य की जमकर सराहना की है। ग्रामीणों ने जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी को शपथ पत्र सौंपकर झूठी शिकायत को निरस्त करने की मांग की है।
ग्रामीणों का कहना है कि पूनम पाराशर विद्यालय में सभी बच्चों को समान रूप से शिक्षा देती हैं और आज तक किसी भी छात्र के साथ जातिगत भेदभाव या दुर्व्यवहार नहीं किया गया। शपथ पत्र में स्पष्ट कहा गया है कि शिक्षिका का व्यवहार सभी जाति और वर्ग के बच्चों के प्रति एक समान रहता है। वह न केवल पढ़ाई कराती हैं, बल्कि बच्चों को नियमित रूप से विद्यालय आने और पढ़ने के लिए प्रेरित भी करती हैं।
गांव के लोगों ने बताया कि उनके अपने बच्चे भी इसी विद्यालय में पढ़ते हैं। आज तक किसी भी बच्चे या अभिभावक ने शिक्षिका के खिलाफ कोई शिकायत नहीं की। सभी बच्चों को समान सम्मान और शिक्षा दी जाती है। ग्रामीणों ने इसे पूनम पाराशर की मेहनत और समर्पण का नतीजा बताया।
शपथ पत्र में यह भी आरोप लगाया गया है कि गांव निवासी प्रियंका पत्नी उमेश कुमार द्वारा की गई शिकायत पूरी तरह झूठी, मनगढ़ंत और निराधार है। ग्रामीणों का कहना है कि प्रियंका को विद्यालय के कुछ लोगों ने बहकाया है, जिसके कारण उसने बिना किसी आधार के शिक्षिका पर आरोप लगा दिए। ग्रामीणों ने इसे शिक्षिका की छवि खराब करने की साजिश करार दिया।
ग्रामीणों ने बीएसए से मांग की है कि बिना जांच के लगाए गए इन झूठे आरोपों को तुरंत निरस्त किया जाए, ताकि एक मेहनती और कर्तव्यनिष्ठ शिक्षिका का मनोबल न टूटे। उन्होंने कहा कि पूनम पाराशर जैसे शिक्षकों के कारण ही गांव के बच्चे पढ़ाई के प्रति जागरूक हो रहे हैं।
कई ग्रामीणों ने अपने व्यक्तिगत शपथ पत्र भी प्रार्थनापत्र के साथ संलग्न किए हैं। इनमें उन्होंने यह स्पष्ट किया है कि विद्यालय में किसी भी प्रकार का जातिगत भेदभाव नहीं होता और शिक्षिका पूनम पाराशर सभी बच्चों को अपने बच्चों की तरह मानकर पढ़ाती हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर झूठी शिकायतों पर कार्रवाई नहीं हुई तो भविष्य में कोई भी शिक्षक निडर होकर काम नहीं कर पाएगा। ग्रामीणों ने प्रशासन से निष्पक्ष जांच कराने और दोषी पाए जाने पर झूठी शिकायत करने वाले के खिलाफ कार्रवाई की मांग भी की है।
इस पूरे मामले के बाद गांव में शिक्षिका के समर्थन में माहौल बन गया है। ग्रामीणों का कहना है कि पूनम पाराशर ने हमेशा शिक्षा को सर्वोपरि रखा है और उनका मकसद सिर्फ बच्चों का भविष्य संवारना है।