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वृंदावन के आवासीय क्षेत्र में धधका तीन मंजिला पोशाक गोदाम, एसी कंप्रेसर फटने से लाखों का माल स्वाहा

Gargachary Times 29 May 2026, 17:45 43 views
Mathura
वृंदावन के आवासीय क्षेत्र में धधका तीन मंजिला पोशाक गोदाम, एसी कंप्रेसर फटने से लाखों का माल स्वाहा
वृंदावन। पुनीत शुक्ला धर्मनगरी वृंदावन के घने आवासीय इलाके में स्थित एक तीन मंजिला पोशाक गोदाम में भीषण आग लगने से हड़कंप मच गया। घटना छीपी गली की है, जहाँ पंचवटी, मसानी निवासी अमित बंसल अपने रिश्तेदार विकास अग्रवाल के तीन मंजिला मकान में राधाकृष्ण पोशाक उद्योग का गोदाम व शोरूम संचालित कर रहे थे। दोपहर बाद करीब तीन से चार बजे के बीच भीषण गर्मी के कारण गोदाम में लगे एसी का कंप्रेसर अचानक जोरदार धमाके के साथ फट गया। देखते ही देखते आग ने विकराल रूप धारण कर लिया। भवन की तीसरी मंजिल पर स्थित गोदाम में भारी मात्रा में पोशाकें और पॉलीथिन रखी होने के कारण आग तेजी से भड़की और उसने नीचे की दोनों मंजिलों पर स्थित शोरूम को भी पूरी तरह अपनी चपेट में ले लिया। इमारत से काला धुआं और ऊंची लपटें उठती देख आसपास के रिहायशी इलाके में अफरा-तफरी मच गई। स्थानीय लोग बाल्टियों में पानी लेकर आग बुझाने दौड़े, लेकिन आग इतनी भयावह थी कि उस पर काबू पाना नामुमकिन था। सूचना मिलते ही अग्निशमन विभाग की तीन गाड़ियां मौके पर पहुंचीं, परंतु छीपी गली बेहद संकरी होने के कारण दमकल के बड़े वाहन घटनास्थल तक नहीं पहुंच सके। इसके बाद दमकल कर्मियों ने सूझबूझ दिखाते हुए मोबाइल बाइक फायर टेंडर और छोटी गाड़ियों को मौके पर मंगवाया, ताकि संकरी गली के भीतर तक उपकरणों की पहुंच बन सके। पुलिस, नगर निगम और दमकल विभाग के कर्मचारियों ने स्थानीय नागरिकों की मदद से करीब दो से तीन घंटे की भारी मशक्कत के बाद बमुश्किल आग पर काबू पाया। गोदाम स्वामी अमित बंसल के अनुसार, इस अग्निकांड में गोदाम और शोरूम में रखी लाखों रुपये की पोशाकें व अन्य कीमती सामान जलकर पूरी तरह राख हो गया। इस घटना के कारण प्रताप बाजार क्षेत्र में वाहनों का आवागमन ठप रहा, जिससे राहगीरों को भारी परेशानी झेलनी पड़ी। इस घटना ने वृंदावन शहर में लगातार रिहायशी और संकरी गलियों वाले इलाकों में कुकुरमुत्ते की तरह खुल रहे अवैध व्यावसायिक गोदामों की सुरक्षा पर एक बार फिर गंभीर सवालिया निशान खड़े कर दिए हैं। लगातार आ रही आग की खबरें यह साबित करती हैं कि आवासीय इलाकों में इस तरह के गोदाम बेहद घातक और किसी बड़े टाइम बम की तरह हैं। वृंदावन शहर में ज्यादातर गोदाम पूरी तरह आवासीय क्षेत्रों में ही बने हुए हैं, जिनमें से अधिकांश को अग्निशमन विभाग द्वारा कोई भी एनओसी जारी नहीं की गई है। इस भयावह घटना को देखते हुए यह साफ है कि इतनी संकरी और सक्रिय जगहों पर व्यावसायिक गोदामों का संचालन करना, जहां आपातकाल में अग्निशमन की गाड़ी भी न पहुंच सके, अपने आप में एक बड़े हादसे को सीधे आमंत्रण देना है। इस पूरे मामले में अग्निशमन विभाग की भी घोर उदासीनता और लापरवाही साफ नजर आती है। विभाग द्वारा शहर के इन व्यावसायिक ठिकानों पर न तो कभी कोई औचक चेकिंग अभियान चलाया जाता है और न ही इसकी सुध ली जाती है, जिससे यह पता लग सके कि ऐसे संवेदनशील गोदामों के पास आग बुझाने के प्राथमिक उपकरण यानी अग्निशमन यंत्र उपलब्ध हैं भी या नहीं। निश्चित रूप से ऐसे हादसों के पीछे केवल गोदाम स्वामियों की मनमानी नहीं, बल्कि अग्निशमन विभाग की भी ढीली कार्यप्रणाली और घोर लापरवाही जिम्मेदार नजर आती है। वहीं दूसरी तरफ, मथुरा-वृंदावन नगर निगम और मथुरा-वृंदावन विकास प्राधिकरण आंखें मूंदकर और कानों में उंगली डालकर बैठे हैं। अमीर और रसूखदार लोग मोटी रकम के बल पर रिहायसी मकानों को खरीदकर उन्हें धड़ल्ले से बड़े व्यावसायिक गोदामों और शोरूमों में तब्दील कर रहे हैं, लेकिन अधिकारियों की यह रहस्यमयी चुप्पी किसी बड़े विनाश को न्योता दे रही है। प्रशासन का दोहरा चरित्र इस बात से साफ उजागर होता है कि यदि आज कोई गरीब या मध्यमवर्गीय व्यक्ति अपने आशियाने की मामूली मरम्मत भी कराने लगता है, तो विकास प्राधिकरण के निचले स्तर के कर्मचारी गिद्धों की तरह वहां तुरंत धमक जाते हैं। वे गरीब के घर ऐसे पहुंचते हैं जैसे उसने कोई संगीन जुर्म कर दिया हो और पूरे मकान की जांच इस तरह की जाती है मानो वह किसी आतंकवादी का ठिकाना हो। जहां वास्तविक रूप से कड़ाई और सीलिंग की कार्रवाई होनी चाहिए, वहां तो मोटी साठगांठ के चलते पूरी ढील दे रखी है, और केवल गरीब लोगों का खून चूसा जा रहा है। विकास प्राधिकरण के कर्मचारी दिन भर शहर की गलियों में घूम-घूमकर ऐसी जगहों को चिन्हित करते हैं जहां कोई छोटा-मोटा निर्माण कार्य हो रहा हो। वहां पहुंचकर निर्माण रुकवाने की धमकी दी जाती है और फिर पर्दे के पीछे कुछ ले-देकर मामले को रफा-दफा कर दिया जाता है। नियमों की धज्जियां उड़ाकर शहर में बढ़ता यह व्यवसायीकरण तेजी से पैर पसार रहा है। हैरान करने वाली बात यह है कि जहां एक आम नागरिक को छोटे से छोटे वैध काम के लिए भी नगर निगम की परमिशन की आवश्यकता होती है, वहीं दूसरी ओर रिहायशी मकानों का अवैध व्यवसायीकरण करके उन्हें बिना किसी मानकों के बेधड़क इस्तेमाल किया जा रहा है। यदि इन घने और संकर बाजारों में समय रहते इन अवैध गोदामों पर सख्त कार्रवाई नहीं की गई, तो भविष्य में होने वाले किसी बड़े जानमाल के नुकसान की पूरी जिम्मेदारी स्थानीय प्रशासन, नगर निगम और अग्निशमन विभाग की होगी।
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