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ब्रज साहित्य परिषद न्यास की काव्य संध्या का मथुरा में हुआ आयोजन

Gargachary Times 2 June 2026, 19:26 54 views
Mathura
ब्रज साहित्य परिषद न्यास की काव्य संध्या का मथुरा में हुआ आयोजन
मोती कुंज रेलवे-कालोनी स्थित, ब्रज रज उत्सव अतिथि गृह में, ब्रज साहित्य परिषद न्यास परासौली गोवर्धन के तत्वावधान में ,काव्य संध्या का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता, वरिष्ठ साहित्यकार देवी प्रसाद गौड़,एवं प्रसिद्ध कवि डा.रमाशंकर पाँडेय जी विशिष्ट अतिथि की भूमिका में उपस्थित रहे, काव्य संध्या का सफल संचालन संस्था के सचिव हरीबाबू ओम् ने किया गया। कार्यक्रम का श्रीगणेश अलीगढ़ से पधारीं कवयित्री प्रतीक्षा चौहान की सरस्वती वंदना से हुआ। तदुपरांत बेलवन माँट से आये नेत्रपाल राघव ने,ब्रजभाषा में श्रंगार पढ़ते हुए कहा,"ओढ़ि कैं घूँमट चलै नारि जब नीली फरिया में अँधियारौ सौ होय,दुबकि जाय चाँद बदरिया में"इसी क्रम में युवा कवि विनीत गौतम ने रस परिवर्तन करते हुए कहा,"ये देवों की पुन्य भूमि,इसकी अमर कहानी है, कण-कण में देवत्व भरा संतों की अमृत वाणी है।"खैर अलीगढ़ से आये ओज कवि भुवनेश चिंतन ने अपने अंदाज में कुछ यूं कहा,"जो कर रहे साधना ज्ञान दाती कठोर हैं, विडम्बनाएं देख उठतीं हृदय में हिलोर हैं।"अवधेश महारथी जी ने कौकरोच पार्टी पर व्यंग्य करते हुए, "जूता पहनो पैर में काकरोच पर वार, फिर भी यदि वह भागता हिट का स्प्रे मार।" ब्रज की वरिष्ठ कवयित्री रेणु उपाध्याय ने ब्रज की महिमा पढ़ते हुए तालियां बटोरीं"मानव कौ तन पाइकैं लखौ नहीं ब्रज धाम जीवन बिरथा मानियो बिरथ मनुज कौ चाम"इनके बाद पच्चीस पुस्तकों के लेखक ब्रज भाषा के मूर्धन्य कवि सोटानंद जी ने ब्रज भूमि का भाव विभोर वंदन किया"ब्रजभूमि मनोहर मोहन जै,जय -जय ब्रज राज गदा हल धारी।बन कुंज लता बट जै जय जै जय नंद जसो महतारी। गोष्ठी का संचालन कर रहे हरीबाबू ओम् जी ने गर्मी से व्यथित होते हुए कविता पढ़ी,"गर्मी भारी परत है,चलैं जोर की झांँख, गर्मी ते दूखन लगैं जने-जने की आँख। इसके बाद काव्य संध्या को चर्मोत्कर्ष देते हुए डा.रमाशंकर पाँडेय जी ने विविध रसों में कविता पढ़ते हुए," "राख की साख पै तू जिंदा है फिर कैसा भरमाना रे,चला-चली की इस दुनिया में किसका ठौर-ठिकाना रे।" अंत में देवीप्रसाद गौड़ ने ब्रज की, रीती-रिवाज,परम्परा और बिवाह के बदलते हुए स्वरुप पर चर्चा करते हुए,सबका मन मोह लिया विवाह के पुराने स्वरूप का चित्र खींचते हुए कहा, "लोग-लुगाई ठट जुरे,चढ़नी करै बरात।नचकैया के नाच में बीती आधी रात।। काव्य संध्या में डा.उदयवीर सिंह और उमेश जी ने भी काव्य पाठ किया।
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