भीषण गर्मी और प्रशासनिक बदइंतजामी के बीच बांके बिहारी के दर्शन को मजबूर श्रद्धालु, वीकेंड पर उमड़ा जनसैलाब
Gargachary Times
7 June 2026, 20:41
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Mathura
वृंदावन। पुनीत शुक्ला
पुरुषोत्तम मास के पावन अवसर पर श्रीधाम वृंदावन में देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं का भारी सैलाब उमड़ रहा है। विशेषकर रविवार को सप्ताह के अंत वीकेंड में आस्था का ऐसा ज्वार उठा कि चारों तरफ केवल भक्तों की भारी भीड़ ही नजर आ रही थी। ठाकुर बांके बिहारी लाल के दर्शनों के लिए उमड़े इस जनसैलाब के आगे स्थानीय प्रशासन के सारे इंतजाम पूरी तरह खोखले साबित हुए। हालात इस कदर बेकाबू दिखे कि एक तरफ जहां मुख्य मंदिरों की ओर जाने वाले रास्तों पर पैर रखने तक की जगह नहीं थी, वहीं दूसरी तरफ बड़ी संख्या में श्रद्धालु वृंदावन की परिक्रमा करते हुए भी नजर आए।
इस भीषण और चिलचिलाती गर्मी में ठाकुर जी की एक झलक पाने के लिए भक्तों को घंटों लंबी लाइनों में लगकर तड़पना पड़ रहा है। सबसे बदतर स्थिति उन श्रद्धालुओं की है जो अपने साथ छोटे-छोटे मासूम बच्चों को लेकर आए हैं। प्रशासन की घोर लापरवाही का आलम यह है कि लाइनों में खड़े इन भक्तों के लिए न तो धूप से बचने के लिए कोई मुकम्मल शेड या टेंट की व्यवस्था की गई है, और न ही तपती हुई गर्म जमीन से पैर जलने से बचाने के लिए कोई अस्थायी मैट या पानी के छिड़काव का इंतजाम है। इस भीषण तपिश में नंगे पैर चल रहे श्रद्धालुओं के पैर बुरी तरह झुलस रहे हैं, जिससे बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक सभी बेहाल हैं।
सुरक्षा और भीड़ नियंत्रण के नाम पर अपनाया जा रहा प्रशासनिक रवैया भी श्रद्धालुओं के लिए आफत बन गया है। आरोप है कि पुलिस और प्रशासन को श्रद्धालुओं की सहूलियत से कोई लेना-देन नहीं रह गया है; वे केवल रस्सा लगाकर आने वाले भक्तों की भीड़ को जगह-जगह जबरन इकट्ठा कर देते हैं और फिर अचानक एक साथ आगे के लिए छोड़ देते हैं। इस 'रस्सा मार' व्यवस्था के कारण कई बार भगदड़ जैसी स्थिति पैदा हो जाती है। इसके साथ ही, शहर की ट्रैफिक व्यवस्था भी पूरी तरह से ध्वस्त हो चुकी है, जिसे संभालने में प्रशासन नाकाम साबित हो रहा है। इस चरमराई व्यवस्था, भयंकर उमस और प्रशासनिक अनदेखी से त्रस्त होकर देश के कोने-कोने से आने वाले श्रद्धालु अब प्रशासन को कोसते हुए नजर आ रहे हैं। इस अतिरिक्त और बेकाबू भीड़ के चलते अब स्थानीय लोगों में भी यह चिंता सताने लगी है कि यदि समय रहते पुख्ता इंतजाम नहीं किए गए, तो कहीं कोई बड़ा हादसा न हो जाए।