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सबका साथ-सबका विकास, सबका विश्वास-सबका प्रयास के तहत केंद्र सरकार के 12 वर्ष पूर्ण

Gargachary Times 16 June 2026, 18:45 54 views
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सबका साथ-सबका विकास, सबका विश्वास-सबका प्रयास के तहत केंद्र सरकार के 12 वर्ष पूर्ण
सबका साथ-सबका विकास, सबका विश्वास-सबका प्रयास के तहत केंद्र सरकार के 12 वर्ष पूर्ण होने पर कलेक्ट्रेट सभागार में “सेवा, संस्कार, सुशासन एवं सम्मान” विषेयक प्रबुद्ध वर्ग संवाद कार्यक्रम में मुख्य विकास अधिकारी नेहा बंधु ने शिक्षकों, शिक्षाविदों एवं विभिन्न क्षेत्रों के प्रबुद्धजनों से संवाद करते हुए शिक्षा के महत्व, शिक्षकों की जिम्मेदारियों तथा समाज निर्माण में उनकी भूमिका पर विचार व्यक्त करते हुए कहा कि किसी भी समाज में जब भी व्यापक परिवर्तन, विकास और सकारात्मक सामाजिक बदलाव हुए हैं, उनमें प्रबुद्ध वर्ग की निर्णायक भूमिका रही है। उन्होंने विशेष रूप से शिक्षकों को समाज का सबसे महत्वपूर्ण, प्रभावशाली वर्ग बताते हुए कहा कि शिक्षक केवल पाठ्यक्रम नहीं पढ़ाते बल्कि आने वाली पीढ़ी के चरित्र, विचार और व्यक्तित्व का निर्माण भी करते हैं इसलिए शिक्षकों का योगदान राष्ट्र निर्माण में अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में शिक्षा के क्षेत्र में व्यापक परिवर्तन देखने को मिल रहे हैं, केंन्द्र-प्रदेश सरकार द्वारा शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए अनेकों योजनाएं संचालित की गयीं, बेसिक शिक्षा में मिशन कायाकल्प के माध्यम से विद्यालयों के आधार-भूत ढांचे को सुदृढ़ किया गया वहीं निपुण भारत मिशन के जरिए बच्चों में बुनियादी साक्षरता एवं संख्यात्मक ज्ञान विकसित करने का कार्य किया जा रहा है, इसी प्रकार माध्यमिक शिक्षा में प्रोजेक्ट अलंकार के अंतर्गत विद्यालयों में आधुनिक सुविधाओं का विस्तार किया गया, विज्ञान प्रयोगशालाओं, आई.सी.टी. लैब, स्मार्ट कक्षाओं तथा व्यावसायिक शिक्षा के अवसरों में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। मुख्य विकास अधिकारी ने कहा कि आज विद्यालयों में केवल पारंपरिक शिक्षा ही नहीं बल्कि कौशल विकास आधारित शिक्षा पर भी विशेष बल दिया जा रहा है, माध्यमिक विद्यालयों में व्यवसायिक एवं स्किल आधारित पाठ्यक्रमों की व्यवस्था की गई है जिससे विद्यार्थी शिक्षा प्राप्त करने के साथ-साथ रोजगारोन्मुखी दक्षताएं भी अर्जित कर सकें, शिक्षा के क्षेत्र में हुए इन सुधारों का वास्तविक लाभ तभी प्राप्त होगा जब शिक्षक पूरी प्रतिबद्धता, समर्पण के साथ विद्यार्थियों का मार्ग-दर्शन करेंगे। उन्होंने कहा कि किसी भी विद्यालय के सफल संचालन के लिए बेहतर आधार-भूत संरचना, पर्याप्त संसाधन, प्रभावी योजनाएं और सबसे महत्वपूर्ण प्रेरित एवं सक्षम शिक्षक आवश्यक होते हैं, एक शिक्षक की योग्यता, उसकी कार्यशैली तथा विद्यार्थियों के प्रति उसका दृष्टिकोण बच्चों के भविष्य को गहराई से प्रभावित करता है, इसलिए शिक्षकों को सदैव स्वयं को अद्यतन रखते हुए नई तकनीकों एवं शिक्षण पद्धतियों को अपनाना चाहिए। उन्होने अपने व्यक्तिगत अनुभव साझा करते हुए कहा कि उनकी माता भी शिक्षिका थीं, जिस कारण उन्हें बचपन से ही शिक्षा एवं शिक्षक के महत्व को निकट से समझने का अवसर मिला, जीवन में जो संस्कार, अनुशासन और मूल्य प्राप्त होते हैं, उनमें शिक्षकों का योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण होता है, एक शिक्षक केवल कक्षा में पढ़ाने का कार्य नहीं करता बल्कि वह विद्यार्थियों को जीवन जीने की कला भी सिखाता है। पूर्व जिलाध्यक्ष, क्षेत्रीय उपाध्यक्ष आलोक गुप्ता ने कहा कि भारतीय संस्कृति में गुरु का स्थान सर्वाेच्च माना गया है, उन्होंने संत कबीर के प्रसिद्ध दोहे ’’गुरू गोविन्द दोऊ खड़े, काके लागूं पाँय, बलिहारी गुरू अपने, गोविन्द दियो बताय’’ का उल्लेख करते हुए कहा कि गुरु ही वह माध्यम है जो व्यक्ति को ज्ञान, संस्कार और जीवन का सही मार्ग दिखाता है, समाज के निर्माण, राष्ट्र के विकास में शिक्षकों की भूमिका सदैव महत्वपूर्ण रही है और आज भी शिक्षक ही समाज को दिशा देने का कार्य कर रहे हैं। उन्होंने वर्ष-2014 में देश के प्रधानमंत्री के रूप में नरेंद्र मोदी द्वारा शपथ ग्रहण के बाद देश में आए व्यापक परिवर्तनों का उल्लेख करते हुए कहा कि पिछले 12 वर्षों में शासन की प्राथमिकता समाज के अंतिम व्यक्ति तक विकास की किरण पहुंचाने की रही है, अन्त्योदय के सिद्धांत को आधार बनाकर गरीब, किसान, मजदूर, महिलाओं एवं वंचित वर्गों के कल्याण हेतु अनेक योजनाएं संचालित की गईं, जिनका लाभ समाज के प्रत्येक वर्ग तक पहुंचा है। उन्होने कहा कि शिक्षा के क्षेत्र में भी उल्लेखनीय परिवर्तन देखने को मिले हैं, विशेष रूप से बेसिक शिक्षा के क्षेत्र में विद्यालयों के कायाकल्प, आधार-भूत सुविधाओं के विस्तार, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा तथा विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के लिए प्रभावी प्रयास किए गए, आज सरकारी विद्यालयों में अध्ययनरत् छात्र-छात्राएं बेहतर शैक्षिक वातावरण में शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि वर्ष-2017 के बाद प्रदेश सरकार द्वारा भी शिक्षा के क्षेत्र में विशेष ध्यान दिया गया, जिसके परिणामस्वरूप विद्यालयों के आधार-भूत ढांचे में व्यापक सुधार हुआ। उन्होंने कहा कि भारत आज विश्व की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की दिशा में अग्रसर है और वैश्विक मंच पर देश की प्रतिष्ठा लगातार बढ़ रही है, यह परिवर्तन केवल आर्थिक क्षेत्र तक सीमित नहीं बल्कि शिक्षा, स्वास्थ्य, बुनियादी ढांचे और सामाजिक विकास के क्षेत्र में भी स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है। उन्होंने कहा कि शिक्षक केवल विषय ज्ञान देने वाला व्यक्ति नहीं होता बल्कि वह विद्यार्थियों के चरित्र निर्माण का भी आधार होता है, इसलिए शिक्षकों को अपने आचरण और व्यवहार से विद्यार्थियों के लिए आदर्श प्रस्तुत करना चाहिए। उन्होंने शिक्षकों से विद्यालय परिसरों को नशामुक्त बनाने का आह्वान करते हुए कहा कि यदि शिक्षक स्वयं नशे से दूर रहेंगे तो विद्यार्थी भी उनसे प्रेरणा प्राप्त करेंगे। उन्होंने उपस्थित शिक्षकों से संकल्प लेने का आग्रह किया कि वह शिक्षा के मंदिर में प्रवेश करते समय पूर्ण अनुशासन, समर्पण और सकारात्मक सोच के साथ अपने दायित्वों का निर्वहन करेंगे। जिला विद्यालय निरीक्षक सतीश कुमार ने विगत 12 वर्षों में माध्यमिक शिक्षा में आये बदलाव पर तथ्यात्मक जानकारी देते हुए कहा कि केंद्र सरकार के गठन के उपरांत राजकीय विद्यालयों की स्थिति में काफी सुधार हुआ है, आज सभी विद्यालयों में स्मार्ट क्लासेज के माध्यम से शिक्षा प्रदान की जा रही है, सभी विद्यालयों में कम्प्यूटर, आई.सी.टी. लैब के साथ मूल-भूत सुविधाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करायी गई है, माध्यमिक विद्यालयों में व्यावसायिक शिक्षा की व्यवस्था भी की गई है ताकि छात्रों में शिक्षा के साथ स्किल डेवलपमेंट हो और वह अपना स्वतःरोजगार स्थापित कर स्वावलंबी बन सकें। जिला बेसिक शिक्षाधिकारी सूर्य प्रताप सिंह ने बेसिक शिक्षा विभाग में विगत 12 वर्षों में हुए बदलाव पर विस्तार से जानकारी देते हुए कहा कि जनपद के सभी विद्यालयों को ऑपरेशन कायाकल्प के तहत 19 बिंदुओं से संतृप्त किया गया, बेसिक शिक्षा विभाग के सभी विद्यालयों में आज काफी परिवर्तन हुए है,ं नामांकित बच्चों को मुफ्त किताबें, स्वेटर, ड्रेस, जूते, मोजे उपलब्ध कराए जा रहे हैं, दोपहर में गुणवत्तापूर्ण मध्यान्ह भोजन मीनू के अनुसार उपलब्ध कराया जा रहा है। कंपोजिट विद्यालय सिरोलिया के शिक्षक अनुराग मिश्रा ने कहा कि विगत 12 वर्षों में शिक्षा के क्षेत्र में अमूल-चूल परिवर्तन हुए हैं, नई शिक्षा नीति-2020 के तहत आंगनबाड़ी केंद्रों, प्राथमिक विद्यालयों के सहयोग से बच्चों के नामांकन की स्थिति में सुधार हुआ है, शिक्षकों की पारदर्शिता के साथ चयन प्रक्रिया पूर्ण कर विद्यालयों में शिक्षकों की कमी को दूर किया गया, आज विद्यालयों में अध्यनरत् छात्रों के लिए सभी मूल-भूत सुविधाओं की उपलब्धता है। प्रधानाचार्य राजकीय हाई स्कूल रोशिंगपुर संतोष शाक्य ने कहा की सरकार की सबसे महत्वपूर्ण उपलब्धि शिक्षकों को समय से वेतन का भुगतान करना है, इससे पूर्व 06-06 माह तक वेतन नहीं मिलता था, विद्यालयों में कंप्यूटर, स्मार्ट क्लासेज की उपलब्धता से शैक्षिक गुणवत्ता में काफी सुधार हुआ है। इस दौरान समस्त खंड शिक्षाधिकारी, विभिन्न विद्यालयों के प्रधानाध्यापक, शिक्षक प्रबुद्धजन आदि उपस्थित रहे, कार्यक्रम का संचालन प्रधानाचार्य स्व. रघुवीर सिंह यादव, राजकीय इंटर कॉलेज न. हार द्विवेदी ने किया।
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