रखरखाव एवं देखरेख के अभाव में जर्जर हो रहा है गौरव पथ स्थित घंटाघर
Gargachary Times
20 July 2026, 19:20
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Dholpur
डा हरिप्रकाश लवानिया धौलपुर
धौलपुर ग्वालियर हाईवे से जब नगर पालिका रोड गौरव पथ की ओर चलेंगे तो सामने ही डेढ़ सौ मीटर ऊंची एक आकर्षक इमारत अनायास ही हमारा ध्यान अपनी ओर आकर्षित करती है इस इमारत पर ऊपर एक विशाल घड़ी लगी है जिसे देखकर यह शहजही अंदाज लगाया जा सकता है इस घड़ी की देखरेख नहीं होने से यह समय गलत बता रही है यह वही इमारत है जिस पर लगी घड़ी के घंटे की आवाज 8 मील दूर तक सुनी जा सकती थी लोगों के दिनचर्या इसी घड़ी के घंटे को सुनकर चलती थी किंतु यह ऐतिहासिक एवं गौरव मयी इमारत जिसे घंटाघर कहा जाता है देखरेख के अभाव में अपना अस्तित्व बचाने के लिए जूझती नजर आती है
इसके निर्माण का दौर वहीदौर था जब हर राज्य का राजा अपने यहां इसी प्रकार के घंटाघर बनवा रहे थे महाराजा निहाल सिंह ने इसे १८८० में बनवाना शुरू कियाथा उन्हीं के नाम पर इसका नाम निहाल टावर पड़ा एक करीबन 30 वर्ष में इस इमारत का निर्माण पूरा हुआ जिसकी ऊंचाई 150 फुट तथा निचली मंजिल पर एक समान 12 द्वार बनाए गए हैं जो के समान आकार के हैं इसका निर्माण महाराजा रामसिंह के समय में बनकर पूरा हुआ आठ मंजिला इस इमारत में आखरी मंजिल पर छतरी बनी है इस निहाल टावर को देखकर धौलपुर स्टोन पर बेजोड़ नक्काशी अनायासही देखने वालों को अपनी और आकर्षित करती है
इस टावर की सबसे बड़ी विशेषता इस टावर में लगी हुई विशाल घड़ी है जिसे उस समय इंग्लैंड की कंपनी द्वारा बनवाया गया था इसके घंटे का आकार साढ़े तीनफीट तथा परिधि 11 फीट घंटे का वजन 600 किलोग्राम तथा इसमें लगे हथौड़े का वजन 5 किलोग्राम है इस घंटे की आवाज 8 से 9 मील दूर तक सुनी जा सकती है इसकी उपरी मंजिल स्थित छोटी तक पहुंचना हेतु 125 सीढ़ियां चड़नी पड़ती हैं हालात सुरक्षा कारणों से इसके ऊपर चढ़ना प्रतिबंधित कर दिया गया है किंतु वास्तविकता यह है की रील बनाने वालो को आए दिन इस टावर के ऊपर चढ़कर रेल बनते देखा जा सकता है जो काफी समय से दुर्घटना को आमंत्रण दे रहा है किंतु इस और जिम्मेदारों का कोई ध्यान नहीं है प्रशासन द्वारा थोड़े-थोड़े समय बाद इस घड़ी को सुधारने के दावे किए जाते हैं किंतु वास्तविकता यह है की लंबे समय से इस घड़ी के घंटे की आवाज यदाकदा ही सुनने को मिलती है आवश्यकता इस बात की है फिर से ऐतिहासिक धरोहर को न सिर्फ रखरखाव एवं संरक्षण की आवश्यकता है बल्कि रीलवाजों की सुरक्षा के लिए चारों ओर मेडिकेटिंग लगाकर सीडीओ तक पहुंचाने का मार्ग बंद किया जाए ताकि भविष्य में कोई दुर्घटना ना हो
धौलपुर की ऐतिहासिक धरोहरों को संरक्षित एवं सुरक्षित करने के बाद ही आगे आने वाली पीढ़ियों को धौलपुर के गौरवमय इतिहास की झलक दिखा पाएंगे ताकि वह भी स्वयं को गौरव आनंद महसूस कर सकें