जन-शिकायतों में लापरवाही बरतने पर जिलाधिकारी सख्त
Gargachary Times
21 July 2026, 21:20
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Mainpuri
मैनपुरी - जिलाधिकारी डॉ. इंद्रमणि त्रिपाठी ने आई.जी.आर.एस. पोर्टल पर प्राप्त जन-शिकायतों के निस्तारण की प्रगति की समीक्षा करते हुए लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों, कर्मचारियों के प्रति कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने कहा कि जन-शिकायतों का समयबद्ध, गुणवत्तापूर्ण निस्तारण शासन की सर्वाेच्च प्राथमिकताओं में शामिल है, इसमें किसी भी प्रकार की शिथिलता, उदासीनता अथवा लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी, समीक्षा के दौरान आई.जी.आर.एस. पोर्टल पर प्राप्त शिकायतों के निस्तारण में अपेक्षित प्रगति न मिलने पर उन्होने अवर अभियंता मंडी परिषद, सहायक विकास अधिकारी मैनपुरी, सुल्तानगंज, कुरावली, उप निबंधक किशनी, विपणन सहायक, ए.सी.ओ. चकबंदी प्रथम, द्वितीय, ए.एम.ए. जिला पंचायत को सचेत करते हुए कहा कि यदि लंबित प्रार्थना पत्र अगले 03 दिन में गुणवत्ता पूर्वक निस्तारण न किए गए तो उत्तरदायित्व निर्धारित कर प्रतिकूल प्रविष्टि के साथ वेतन आहरण पर रोक लगेगी। उन्होंने कहा कि जन-समस्याओं का समयबद्ध निस्तारण प्रत्येक अधिकारी, कर्मचारी की व्यक्तिगत जिम्मेदारी है, इसमें किसी भी स्तर पर कोताही अक्षम्य होगी। उन्होंने सचेत करते हुए कहा कि किसी भी विभाग में कोई भी शिकायती प्रार्थना पत्र डिफॉल्टर की श्रेणी में न पहुंचे, शिकायत के निस्तारण में गुणवत्ता का विशेष ध्यान रखा जाए, शिकायतकर्ता से वार्ता करने के उपरांत ही आख्या अपलोड की जाए, अधिकारी प्रतिदिन आई.जी.आर.एस. पोर्टल को लॉगिन करें, अधीनस्थों पर निर्भर न रहें यदि किसी विभाग में कोई शिकायती प्रार्थना पत्र डिफाल्टर हुआ तो संबंधित विभाग के अधिकारी की जिम्मेदारी तय कर दंडात्मक कार्यवाही होगी।
श्री त्रिपाठी ने कहा कि प्रत्येक शिकायत का गंभीरता से परीक्षण कर उसका प्रभावी एवं स्थायी समाधान सुनिश्चित किया जाए ताकि आमजन को अनावश्यक रूप से कार्यालयों के चक्कर न लगाने पड़ें। उन्होंने समस्त विभागाध्यक्षों को निर्देशित करते हुए कहा कि किसी भी विभाग की कोई भी शिकायत डिफॉल्टर की श्रेणी में न पहुंचे, शिकायत प्राप्त होने के साथ ही उसका नियमानुसार परीक्षण कर निर्धारित समय-सीमा के भीतर उसका निस्तारण सुनिश्चित किया जाए तथा संबंधित आख्या समय से आई.जी.आर.एस. पोर्टल पर अपलोड की जाए। उन्होंने कहा कि समय-सीमा का उल्लंघन विभागीय कार्य-प्रणाली पर प्रश्नचिह्न लगाता है, जिसे किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होने शिकायतों के निस्तारण में गुणवत्ता को सर्वाेच्च प्राथमिकता देने के निर्देश देते हुए कहा कि केवल औपचारिक आख्या अपलोड करना पर्याप्त नही, प्रत्येक शिकायत का तथ्यों के आधार पर निष्पक्ष परीक्षण किया जाए तथा शिकायतकर्ता से वार्ता करने के उपरांत ही संतोषजनक आख्या पोर्टल पर अपलोड की जाए यदि शिकायतकर्ता की बात सुने बिना अथवा वास्तविक स्थिति का परीक्षण किए बिना निस्तारण किया गया तो ऐसे मामलों की जिम्मेदारी संबंधित अधिकारी की होगी। विभागाध्यक्ष नियमित रूप से लंबित शिकायतों की समीक्षा करें तथा यह सुनिश्चित करें कि किसी भी शिकायत का निस्तारण समय-सीमा से बाहर न जाए, व्यक्तिगत मॉनिटरिंग से ही शिकायतों के निस्तारण की गुणवत्ता और गति में सुधार संभव है।
इस दौरान संबंधित अधिकारियों, कर्मचारियों के अलावा डिप्टी कलेक्टर अशोक कुमार सैनी, विकल्प, ई-डिस्ट्रिक मैनेज सौरभ पाण्डेय, आई.जी.आर.एस. पटल सहायक अनुज कुमार आदि उपस्थित रहे।