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वन विभाग-एसओएस की बड़ी कामयाबी, तेंदुए की 10 खालों के साथ 4 तस्कर गिरफ्तार

Gargachary Times 24 July 2026, 20:31 35 views
Mathura
वन विभाग-एसओएस की बड़ी कामयाबी, तेंदुए की 10 खालों के साथ 4 तस्कर गिरफ्तार
फरह। उत्तर प्रदेश वन विभाग, पुलिस और वाइल्डलाइफ़ एसओएस की संयुक्त कार्रवाई में अवैध वन्यजीव तस्करी के एक बड़े गिरोह का भंडाफोड़ हुआ है। ऑपरेशन के दौरान तेंदुए की 10 खालें बरामद की गईं और 4 शिकारियों को गिरफ्तार किया गया। यह पिछले कई वर्षों में तेंदुए की खाल की सबसे बड़ी बरामदगी में से एक है। वाइल्डलाइफ़ एसओएस की एंटी-पोचिंग यूनिट 'फ़ॉरेस्ट वॉच' को कई महीनों से मध्य भारत में सक्रिय इस गिरोह की सूचना मिल रही थी। टीम ने संदिग्धों की गतिविधियों पर गुप्त रूप से नजर रखी और यह सुनिश्चित किया कि बरामद होने वाली सामग्री असली तेंदुए की खाल ही है। पूरी पुख्ता जानकारी जुटाने के बाद इसे उत्तर प्रदेश वन विभाग और पुलिस के साथ साझा किया गया। खुफिया जानकारी के आधार पर वन विभाग ने कई एजेंसियों के साथ मिलकर बेहद गोपनीय तरीके से ऑपरेशन चलाया। कार्रवाई में मौके से तेंदुए की दस खालें ज़ब्त की गईं और चार आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। सभी आरोपी फिलहाल वन विभाग और पुलिस की हिरासत में हैं। अधिकारी अब यह पता लगा रहे हैं कि तेंदुओं का शिकार कहां किया गया और यह गिरोह पहले किन-किन राज्यों में सक्रिय था। इस पूरे मामले में वाइल्डलाइफ़ एसओएस वन विभाग को कानूनी सहायता भी उपलब्ध करा रहा है। आगरा के डीएफओ IFS राजेश कुमार ने कहा, "वाइल्डलाइफ़ एसओएस से मिली ठोस खुफिया जानकारी की वजह से हम सही समय पर आरोपियों तक पहुंच पाए और अवैध सामग्री ज़ब्त कर सके। इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की तलाश जारी है। दोषियों के खिलाफ वन्यजीव संरक्षण अधिनियम 1972 के तहत कड़ी कार्रवाई की जाएगी।" वाइल्डलाइफ़ एसओएस के सीईओ कार्तिक सत्यनारायण ने कहा, "दस तेंदुओं की जान जाना बेहद दुखद है। यह बरामदगी दिखाती है कि संगठित वन्यजीव अपराध हमारी जैव-विविधता के लिए कितना बड़ा खतरा है। हम इस सफल ऑपरेशन के लिए वन विभाग और पुलिस को बधाई देते हैं।" संस्था की को-फाउंडर गीता शेषमणि ने कहा कि जंगल से हर तेंदुआ हटना पूरे इकोसिस्टम के लिए नुकसान है। दस खालों की बरामदगी यह साबित करती है कि शिकारी गिरोह कितने संगठित तरीके से काम कर रहे हैं। भारतीय तेंदुआ वन्यजीव संरक्षण अधिनियम की अनुसूची-1 में संरक्षित है। इसके बावजूद खाल और अंगों के लिए अवैध शिकार आज भी वन्यजीवों के लिए गंभीर खतरा बना हुआ है।
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