गांव की महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाएगी 'समर्थ' योजना: प्रशिक्षण पूरा होते ही मिलेगा करघा`
Gargachary Times
1 August 2026, 19:27
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Mathura
फरह। भारत सरकार के वस्त्र मंत्रालय के विकास आयुक्त (हथकरघा) कार्यालय, बुनकर सेवा केंद्र मेरठ एवं दीनदयाल बुनकर केंद्र गऊ ग्राम परखम के संयुक्त तत्वावधान में शनिवार को 12वें राष्ट्रीय हथकरघा दिवस-2026 के अवसर पर 'समर्थ' योजना के अंतर्गत 45 दिवसीय हथकरघा बुनाई प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारंभ अशोक सिंघल हॉल, गऊ ग्राम परखम में किया गया। कार्यक्रम में हथकरघा उद्योग के संरक्षण, संवर्धन और ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने पर विशेष बल दिया गया।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि उत्तर प्रदेश सरकार के होमगार्ड एवं नागरिक सुरक्षा विभाग के राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. धर्मवीर प्रजापति ने कहा कि भारत की हथकरघा परंपरा हमारी सांस्कृतिक पहचान है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार पारंपरिक उद्योगों को नई ऊर्जा देने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। "समर्थ" योजना के माध्यम से महिलाओं और युवाओं को कौशल प्रशिक्षण देकर स्वरोजगार से जोड़ना आत्मनिर्भर भारत की दिशा में बड़ा कदम है। उन्होंने कहा कि प्रशिक्षित महिलाओं को आधुनिक तकनीक, बेहतर बाजार और सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने के लिए हर संभव सहयोग दिया जाएगा।
मुख्य वक्ता अखिल भारतीय गौसेवा के अजीत महापात्रा ने कहा कि गांवों की समृद्धि पारंपरिक कुटीर उद्योगों से जुड़ी है। हथकरघा केवल रोजगार का माध्यम नहीं, बल्कि हमारी सांस्कृतिक विरासत भी है। यदि गांव की महिलाएं घर से उत्पादन कर बाजार से जुड़ेंगी तो परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत होगी और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई गति मिलेगी।
विशिष्ट अतिथि उत्तराखंड हथकरघा एवं हस्तशिल्प विकास परिषद के राज्यमंत्री उपाध्यक्ष वीरेंद्र सेमवाल ने कहा कि हथकरघा क्षेत्र में अपार संभावनाएं हैं। आज जरूरत है कि पारंपरिक कला को आधुनिक डिजाइन, गुणवत्ता और विपणन से जोड़ा जाए। ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रम देशभर में बुनकरों के लिए नए अवसर सृजित करेंगे।
वस्त्र मंत्रालय के पश्चिमी उत्तर प्रदेश के उपनिदेशक तपन शर्मा ने बताया कि विकास आयुक्त कार्यालय द्वारा संचालित योजनाओं का उद्देश्य अधिक से अधिक लोगों को कौशल विकास से जोड़ना है। "समर्थ" योजना के तहत प्रतिभागियों को तकनीकी दक्षता, उत्पादन क्षमता और स्वरोजगार के अवसर उपलब्ध कराए जा रहे हैं।
बुनकर प्रशिक्षण केंद्र के उपाध्यक्ष दीपक अग्रवाल ने जानकारी दी कि 45 दिवसीय प्रशिक्षण में 17 गांवों की 30 महिलाओं को प्रशिक्षण दिया जाएगा। प्रशिक्षण के मुख्य प्रशिक्षक मोदा राम (राजस्थान) हैं, जबकि सहायक प्रशिक्षक भभूता राम एवं महेंद्र सहयोग करेंगे। प्रत्येक प्रशिक्षणार्थी महिला को प्रशिक्षण अवधि में प्रतिदिन ₹300 का मानदेय दिया जाएगा। प्रशिक्षण पूर्ण होने पर परीक्षा आयोजित होगी और सफल प्रतिभागियों को लगभग ₹30 हजार लागत का करघा अनुदान सहित उपलब्ध कराया जाएगा।
मंत्री नितिन बहल ने कहा कि इस पहल का उद्देश्य महिलाओं को तकनीकी दक्षता देकर स्वरोजगार से जोड़ना है। वहीं मंत्री हरिशंकर शर्मा ने कहा कि परखम क्षेत्र के 52 गांवों में कभी प्रत्येक घर में करघा हुआ करता था। संस्था का प्रयास है कि इस गौरवशाली परंपरा को पुनर्जीवित किया जाए। भविष्य में प्रत्येक घर तक करघा, कच्चा माल उपलब्ध कराकर तैयार उत्पादों की मार्केटिंग भी संस्था द्वारा की जाएगी।
कार्यक्रम में प्रतिभागियों को हथकरघा क्षेत्र की आधुनिक तकनीक, स्वरोजगार के अवसर और सरकारी योजनाओं की जानकारी दी गई। टूल किट भी वितरित की गईं। संचालन अजय वर्मा ने किया। इस अवसर पर सोनपाल, राहुल गोयल, अर्पित महेश्वरी, उदित बंसल, शशिकांत, राम पाठक, किशन, अशोक, रामवीर फौजदार, महिपाल सिंह, पारस, राजेंद्र प्रधान, गोविन्द, हरिनारायण, हरेंद्र, गौरी, जगन प्रधान आदि उपस्थित रहे।