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मड़ावरा में हर्षोल्लास पूर्वक सम्पन्न हुयी समय प्रेरणा वर्षायोग कलश स्थापना

Gargachary Times 8 August 2026, 20:57 69 views
Lalitpur
मड़ावरा में हर्षोल्लास पूर्वक सम्पन्न हुयी समय प्रेरणा वर्षायोग कलश स्थापना
मड़ावरा(ललितपुर)-आचार्य प्रवर विद्यासागर जी महाराज की अनुकंपा एवं आचार्य भगवन समय सागर जी महाराज के मंगल आशीर्वाद से धर्मनगरी मड़ावरा में उन्हीं के आज्ञानुवर्ती शिष्य मुनि नीरज सागर,निर्मद सागर जी महाराज की चातुर्मास कलश स्थापना शाहपुरा मध्य प्रदेश से आये शुभांशु जैन के कुशल संचालन में बड़े ही भक्तिभाव हर्षोल्लास से सम्पन्न हुयी इस दौरान बोलियों के माध्यम से कलश स्थापित करने वाले सौभाग्यशाली परिवारों का चयन किया गया इस अवसर पर सकल जैन समाज मड़ावरा एवं क्षेत्रीय समाज के हजारों श्रद्धालु उपस्तिथ रहे।         उल्लेखनीय है कि जैन मुनि वर्षा ऋतु के चार महीनों (आषाढ़ शुक्ल पूर्णिमा से कार्तिक शुक्ल पूर्णिमा तक) में जीवों की रक्षा और अहिंसा के महाव्रत का पालन करने के लिए एक ही स्थान पर रुकते हैं। इस चार महीने के प्रवास को चातुर्मास या वर्षायोग कहते हैं। इस दौरान मंगल कलश की स्थापना मुख्य रूप से धार्मिक और सामाजिक कारणों से की जाती है धर्मनगरी मड़ावरा को वर्ष 2026 का मंगल चातुर्मास आचार्य समय सागर जी की महती अनुकंपा से प्राप्त हुआ था जिसकी कलश स्थापना का कार्यक्रम शनिवार को कस्बे के महावीर विद्याविहार में खचाखच भरे सभागार में हजारों श्रद्धालुओं की उपस्तिथि में हर्षोल्लास पूर्वक सानंद सम्पन्न की गयी साथ ही विद्याविहार परिसर में पाषाण से बनने वाले नवीन जिनालय हेतु दानदातारों के माध्यम से निर्माण की रूपरेखा तय की गयी इस दौरान सम्पूर्ण समाज एवं आगंतुक अतिथि महानुभावों के सहभोज का आयोजन भी विद्याविहार प्रांगण में किया गया। मंगल कलश स्थापना का महत्व- जैन संस्कृति में कलश को अचित्त (निर्जीव) और मांगलिक निमित्तों में एक मुख्य प्रतीक माना गया है हालांकि मुनि महाराज स्वयं संकल्प से बंधे होते हैं, लेकिन श्रावक (गृहस्थ) समाज और मंदिर समिति उनके सानिध्य को स्थायी रूप देने के लिए कलश स्थापित करती है कलश स्थापना के माध्यम से पूरा समाज एकजुट होकर चार महीने तक तप, स्वाध्याय, और धर्म आराधना के लिए संकल्पित होता है।
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