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​नमामि गंगे योजना के तहत जनपद मथुरा के तहसील छाता में प्राकृतिक खेती पर एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन हुआ

Gargachary Times 25 August 2026, 20:28 21 views
Mathura
​नमामि गंगे योजना के तहत जनपद मथुरा के तहसील छाता में प्राकृतिक खेती पर एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन हुआ
राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन, नई दिल्ली एवं राज्य स्वच्छ गंगा मिशन (नमामि गंगे तथा ग्रामीण जलापूर्ति विभाग, उत्तर प्रदेश) से प्राप्त निर्देशों के क्रम में अध्यक्ष, जिला गंगा समिति/ जिलाधिकारी, मथुरा के निर्देशों के अनुपालन में सदस्य संयोजक, जिला गंगा समिति/प्रभागीय निदेशक, सा0 वा0 प्रभाग, मथुरा के नेतृत्व में जिला गंगा समिति, मथुरा द्वारा कृषि विभाग के संयोजन से जनपद मथुरा के तहसील छाता में राजकीय कृषि बीज भंडार, छाता में ‘‘प्राकृतिक खेती’’ विषय पर एक दिवसीय विस्तृत कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य किसानों को रासायनिक उर्वरकों एवं कीटनाशकों के दुष्प्रभावों से अवगत कराते हुए पर्यावरण-अनुकूल प्राकृतिक खेती के प्रति जागरूक व प्रशिक्षित करना रहा। कार्यशाला के मुख्य बिंदु व तकनीकी मार्गदर्शन पर्यावरण एवं नदी तंत्र का संरक्षण-* कार्यशाला में विशेषज्ञों ने बताया कि खेतों में अंधाधुंध रासायनिक खादों के उपयोग से निकलने वाले हानिकारक तत्व नदियों और भूजल को प्रदूषित करते हैं। प्राकृतिक खेती अपनाकर यमुना-गंगा नदी बेसिन और पर्यावरण को सुरक्षित रखा जा सकता है। लागत में कमी व अधिक आय- कृषि विशेषज्ञों ने किसानों को देसी गाय के गोबर-गोमूत्र से जीवामृत, बीजामृत, घनजीवामृत व प्राकृतिक कीटनाशक बनाने की विधियां समझाईं, जिससे खेती की लागत न्यूनतम होती है और मिट्टी की उर्वरा शक्ति बढ़ती है। ​मृदा स्वास्थ्य सुधार- रासायनिक उर्वरकों के विकल्प के रूप में जैविक घटकों के उपयोग से भूमि में लाभकारी सूक्ष्म जीवाणुओं और केंचुओं की सक्रियता बढ़ती है, जिससे टिकाऊ उत्पादन सुनिश्चित होता है। ​कार्यशाला में मुख्य रूप से जिला गंगा समिति मथुरा के जिला परियोजना अधिकारी अमन वर्मा, लैब प्रभारी व मृदा विश्लेषक ईश्वर दयाल, कृषि चिकित्सक डॉक्टर विपिन जादौन, ब्लॉक टेक्नीशियन मैनेजर नीरज कुमार वार्ष्णेय, टेक्निकल असिस्टेंट लोकेन्द्र देव सिंह और बीज गोदाम प्रभारी लाखन सोलंकी उपस्थित रहे। इन सभी विशेषज्ञों ने किसानों को सरकारी योजनाओं, उन्नत बीजों और प्राकृतिक खाद प्रबंधन की विस्तृत जानकारी दी। इसके साथ ही वन विभाग की ओर से वन दरोगा देवेन्द्र कुमार एवं वन रक्षक धर्मेन्द्र कुमार विशेष रूप से उपस्थित रहे, जिन्होंने कृषि वानिकी और वृक्षारोपण के लाभ साझा किए। कार्यशाला में क्षेत्रीय प्रगतिशील किसानों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। कार्यक्रम के अंत में सभी कृषकों ने अपने खेतों में प्राकृतिक कृषि पद्धतियां अपनाने और जल व पर्यावरण संरक्षण में अपना योगदान देने का संकल्प लिया।
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