ठा. जानकी वल्लभ मंदिर में भव्य फूल बंगला, विद्वत संगोष्ठी में संतों ने रखे विचार
Gargachary Times
26 August 2026, 20:39
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Mathura
वृंदावन। केशीघाट स्थित श्री जानकी वल्लभ मंदिर में परमपूज्य श्री स्वामी अनिरुद्धाचार्य जी महाराज के सान्निध्य में 27वां त्रिपाद्विभूति प्राप्ति महोत्सव श्रद्धा और भक्ति भाव के साथ प्रारंभ हो गया। तीन दिवसीय महोत्सव के द्वितीय दिवस बुधवार को मंदिर परिसर में विभिन्न धार्मिक एवं आध्यात्मिक कार्यक्रमों का आयोजन किया गया।
द्वितीय दिवस पर ठाकुर श्री जानकी वल्लभ लाल का भव्य फूल बंगला सजाया गया। विभिन्न प्रकार के सुगंधित एवं रंग-बिरंगे फूलों से ठाकुर जी का आकर्षक श्रृंगार किया गया। फूलों से सजे मंदिर में ठाकुर जी के दर्शन के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी और पूरा मंदिर परिसर भक्ति के रंग में सराबोर नजर आया। इसके साथ ही ठाकुर श्री जानकी वल्लभ लाल को भव्य झूले पर विराजमान कर झूल महोत्सव भी आयोजित किया गया। श्रद्धालुओं ने ठाकुर जी के झूला महोत्सव के दर्शन कर पुण्य लाभ अर्जित किया।
महोत्सव के अंतर्गत सायंकाल विद्वत संगोष्ठी का भी आयोजन किया गया। संगोष्ठी में देश के विभिन्न स्थानों से आए संतों एवं विद्वानों ने भाग लिया। इस अवसर पर भाष्यकार स्वामी श्रीभगवद्रामानुजाचार्य जी एवं स्वामी श्री वेदान्तदेशिक जी के जीवन, दर्शन एवं आध्यात्मिक योगदान से जुड़े विषयों पर विद्वानों ने अपने विचार रखे। विद्वत संगोष्ठी के दौरान संतों एवं विद्वानों ने भारतीय वैदिक परंपरा और आचार्य परंपरा के महत्व पर भी प्रकाश डाला।
संगोष्ठी में बोलते हुए रामेश्वर प्रपन्नाचार्य बड़ा खटला ने कहा कि भगवानदास महाराज का जीवन भक्ति, विनम्रता, सेवा और साधना का प्रेरणादायी उदाहरण है। उन्होंने सदैव सनातन वैदिक परंपराओं के संरक्षण, संत सेवा और समाज में आध्यात्मिक चेतना के प्रसार को अपना ध्येय माना।
फूलडोल बिहारी दास महाराज ने कहा कि महाराज जी का सरल व्यवहार और शास्त्रसम्मत मार्गदर्शन श्रद्धालुओं को धर्म के प्रति आस्था और जीवन में सदाचार अपनाने की प्रेरणा देता है।
उपस्थित वक्ताओं ने कहा कि उनका योगदान संत परंपरा और धार्मिक आयोजनों को नई ऊर्जा देने वाला रहा है तथा उनके विचार आने वाली पीढ़ियों के लिए मार्गदर्शक बने रहेंगे। कालचक्र का संचालन यशोदा नंदन लाल जी ने किया। कार्यक्रम के समापन पर स्वामी श्री अनिरुद्धाचार्य महाराज ने सभी पधारें हुए विद्वानों एवं अतिथियों का धन्यवाद ज्ञापन किया।
कार्यक्रम में राम प्रपन्नाचार्य चित्रकूट, राजाराम मिश्र, फूल डोल बिहारी दास, रामदेवानंद सरस्वती, नैयायिक गुरुजी, राम कृपाल त्रिपाठी, बलरामदास महाराज, अनुराग कृष्ण शास्त्री, बिहारी लाल वशिष्ठ, गोविंद दास, रघुनाथचार्य, राम नारायण पुजारी, मोनी बाबा, गोवेर्धन, रामभद्र, पियुष, भगीरथ, सुधीर, देवनारायण, लवकुश, राम नारायण खंडेलवाल के साथ-साथ सैकड़ो की संख्या में भक्त एवं शिष्य उपस्थित रहे।