ब्रज साहित्य परिषद न्यास परासौली की काव्य संध्या एवं कार्यशाला का आयोजन
Gargachary Times
31 August 2026, 20:39
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Mathura
ब्रज साहित्य परिषद न्यास परासौली ( गोवर्धन ) के नियमित आयोजित होने वाले कार्यक्रमों की श्रृंखला में,कम्पूघाट मथुरा स्थित मधुसूदन कृपाधाम में, कार्यशाला के साथ-साथ बृहद काव्य संध्या का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता ब्रजभाषा के प्रसिद्ध कवि,संस्था के कार्यकारी अध्यक्ष श्री राधा गोविंद पाठक जी एवं डा.रमाशंकर पांडेय जी ने विशिष्ट अतिथि तथा ब्रज कला केन्द्र से पधारे भगत जी ने मुख्य अतिथि की भूमिका का निर्वहन किया। काव्य संध्या का संचालन कुशल संचालक संस्था के सचिव श्री हरी बाबू ओम जी ने किया।
कार्यक्रम का शुभारंभ ब्रज भाषा के कोकिल कंठी कवि श्री राधा गोविन्द पाठक जी की सरस्वती वंदना से हुआ।
तदुपरांत डा.उदयवीर सिंह ने,माँ के पावन रिश्ते को नमन करते हुए कहा,"माँ का कोई मोल नहीं,अनमोल रत्न है माँ "काव्य गोष्ठी को गति देते हुए ,अति निकट मनाये जाने वाली विश्व विख्यात श्री कृष्ण जन्माष्टमी के पर्व पर रचना पढ़ते हुए अटल राम जी ने कहा,
"फिर से जन्मेंगे घर-घर कन्हाई, बधाई है बधाई।"किलोंनी बल्देव
से पधारे नारायन सिंह जी ने अपने इष्ट देव जुगल सरकार को प्रणाम करते हुए पढ़ा,"तोय पुकारूं बंशी बारे,सौं दऊं राधा नाम की,आजा कान्हा देख दुर्दशा अपने जा ब्रज ब्रज धाम की "भक्ति रस की धारा को आगे बढ़ाते हुए अपने सरस छंदों में प्रसिद्ध युवा
कवि विनीत गोतम ने कहा"प्रेम की चरम प्यास देखी जब उद्धव ने, ज्ञान का गुमान घूर-घूर हो गया।"कवयित्री नीतू गोस्वामी
ने श्री बाँकेबिहारी जी से प्रार्थना करते हुए रचना प्रस्तुत की,
"मोपै कहा बन्यौ अपराध,बिहारी मैंने बिसरायौ"
रूपेश धनगर ने अपने दर्द को कुछ इस तरह बयां किया,
"मन की बातें बड़ी रसीली जुमले सुने निहाल हुए।"वरिष्ठ कवि देवीप्रसाद गौड़ ने अपने समय के रक्षाबंधन पर्व का चित्र खींचते
हुए कहा,"बूरौ खामन हम गये बगल रेडियो संग,जीजा कौ रुतबा
बड़ों सारे-सारी दंग।"गंगा रानी चतुर्वेदी ने,ब्रज की पीड़ा व्यक्त करते हुए कहा,"मेरौ ब्रज ढूंड्यौ कहा खरौ है लुकाई"संचालन कर रहे हरी बाबू ओम जी ने अपनी प्रसिद्ध रचना,हाय रुपैया-हाय
रुपैया पढ़कर श्रोताओं का मन जीत लिया। नवोदित कवयित्री राखी चतुर्वेदी ने बेटी पर कविता पढ़ते हुए कहा, "इतनी छूट न दो बेटी को जो बात बड़ों की ना मानें "इसी क्रम में अक्षय चतुर्वेदी ने वाणी पर कविता पढ़ कर तालियां बटोरीं,राष्ट्रीय कवि डा.रमाशंकर पांडेय जी ने यमुना जी की दुर्दशा पर क्षोभ व्यक्त करते हुए,
"जन-जन का दुख हरने वाली अपने दुख से हारी
हे बरदानी जन कल्यानी, श्याम की अमिट निशानी।"
अंत मे अध्यक्षता कर रहे, श्री राधा गोविन्द पाठक जी ने अपने काव्य पाठ"ब्रज धाम चले आओ"के साथ,काव्य संध्या में पढ़ी गईं कविताओं की समीक्षा करते हुए, कार्यक्रम के समापन की विधवत घोषणा की।