मथुरा सिविल कोर्ट ने प्राचीन मुखारविंद मंदिर के रिसीवर पद पर अमित कुमार गोस्वामी को किया नियुक्त
Gargachary Times
16 October 2026, 20:38
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Mathura
मथुरा- मथुरा स्थित सिविल जज (जूनियर डिवीजन) न्यायालय ने मूलवाद संख्या 191/1985, प्रकीर्ण वाद संख्या 84/1990 तथा नए प्रकीर्ण वाद संख्या 151/2025 से संबंधित प्रकरण में श्री गिर्राजी मुकुट मुखारबिंद,एवं हरगोकुल मंदिर, दसबिसा विराजमान से संबंधित मंदिर के रिसीवर पद पर अमित कुमार गोस्वामी को तत्काल प्रभाव से नियुक्त करने का आदेश दिया है। न्यायालय ने मंदिर के प्रबंधन, संपत्ति की सुरक्षा, आय-व्यय की पारदर्शिता तथा धार्मिक परंपराओं के संरक्षण के लिए विस्तृत निर्देश भी जारी किए हैं।
न्यायालय के 16 अक्टूबर 2026 के आदेश के अनुसार, माननीय इलाहाबाद उच्च न्यायालय द्वारा 21 सितंबर 2026 को पारित आदेश के अनुपालन में रिसीवर की नियुक्ति की प्रक्रिया दोबारा संपन्न कराई गई। इसके तहत 7 अक्टूबर को आवेदन आमंत्रित किए गए थे। निर्धारित अवधि में कुल 18 अभ्यर्थियों के आवेदन प्राप्त हुए। इसके बाद 14 अक्टूबर 2026 को दोपहर 2 बजे से शाम 4:50 बजे तक सभी 18 अभ्यर्थियों का साक्षात्कार आयोजित किया गया।
न्यायालय के आदेश में उल्लेख किया गया है कि चयन प्रक्रिया की निष्पक्षता, पारदर्शिता और विश्वसनीयता सुनिश्चित करने के लिए संपूर्ण साक्षात्कार की वीडियोग्राफी कराई गई। इसकी मूल डिजिटल रिकॉर्डिंग न्यायालय के कार्यालय में सुरक्षित रखी गई है। अभ्यर्थियों का मूल्यांकन शैक्षिक योग्यता, धार्मिक एवं वैष्णव परंपराओं के ज्ञान, पूजा-अर्चना के अनुभव, मंदिर प्रबंधन, प्रशासनिक क्षमता, ईमानदारी, वित्तीय समझ और दायित्वबोध सहित निर्धारित मानकों के आधार पर किया गया।अमित कुमार गोस्वामी को बताया सर्वाधिक उपयुक्त
न्यायालय ने अपने आदेश में कहा कि अधिकांश अभ्यर्थियों की समग्र उपयुक्तता लगभग समान स्तर की पाई गई, जबकि अंतिम तीन अभ्यर्थियों के बीच चयन के लिए तुलनात्मक मूल्यांकन किया गया। आदेश के अनुसार, अमित कुमार गोस्वामी को मंदिर प्रबंधन एवं प्रशासन के अनुभव, धार्मिक परंपराओं के ज्ञान, साक्षात्कार में प्रदर्शन और निर्धारित मानकों के समग्र मूल्यांकन के आधार पर सर्वाधिक उपयुक्त पाया गया।
आदेश में यह भी उल्लेख है कि अमित कुमार गोस्वामी को हरिदेव मंदिर, प्राचीन जंगलेश्वर महादेव मंदिर तथा बरसाना मंदिर में सेवा एवं प्रबंधन का अनुभव रहा है। न्यायालय ने इन्हीं पहलुओं को ध्यान में रखते हुए उन्हें रिसीवर पद पर नियुक्त करने का निर्णय लिया।मंदिर की धार्मिक परंपराएं रहेंगी सुरक्षित नवनियुक्त रिसीवर को न्यायालय का अधिकारी माना जाएगा और मंदिर से संबंधित कार्य न्यायालय के नियंत्रण एवं पर्यवेक्षण में होंगे। आदेश में स्पष्ट किया गया है कि मंदिर की दैनिक पूजा, भोग, आरती, उत्सव तथा अन्य धार्मिक परंपराएं विधिवत और निर्बाध रूप से संचालित की जाएंगी। किसी भी धार्मिक परंपरा, सेवा-पद्धति अथवा पारंपरिक व्यवस्था में न्यायालय की पूर्व अनुमति के बिना परिवर्तन नहीं किया जा सकेगा।
न्यायालय ने यह भी निर्देश दिया है कि मंदिर की समस्त आय अधिकृत बैंक खातों में जमा होगी तथा मंदिर की निधियों का उपयोग केवल वैध एवं आवश्यक मंदिर-संबंधी कार्यों के लिए किया जाएगा। नियमित खर्च के अतिरिक्त असाधारण या पूंजीगत व्यय के लिए न्यायालय की पूर्व अनुमति अनिवार्य होगी।संपत्ति और अभिलेखों की सुरक्षा पर विशेष ध्यान रखा जायेगा
रिसीवर अमित गोस्वामी जी ने बताया वह किसी पक्ष या व्यक्ति के प्रभाव में आकर कोई कार्य नही करेंगे केवल मन्दिर हित मे कार्य करेंगे वही सर्वोपरि है।।