भागवत कथा के साथ ब्रज भाषा कवि सम्मेलन का हुआ आयोजन
Gargachary Times
27 October 2026, 19:52
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Mathura
गोवर्धन - श्री श्याम दास महा त्यागी जी की पुन्य तिथि के पुनीत अवसर पर आयोजित श्री मद्भागवत कथा के पांडाल में ब्रज साहित्य परिषद न्यास के तत्वावधान में शानदार कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता डा.रमाशंकर पांडेय एवं संचालन वरिष्ठ कवि श्री हरी बाबू ओम जी ने किया। कवि सम्मेलन का शुभारंभ मधुर कंठ के धनी, श्री रविन्द्र रसिक जी की सरस्वती वंदना से हुआ। इसके बाद नेत्रपाल राघव जी ने कुछ इस तरह अपने विचार रखे,"निंदा रस में डूबे लोगों,कितना तुमने धन,यश,लाभ
कमाया।"काव्य के इस अनुष्ठान को आगे बढ़ाते हुए,युवा कवि रूपेश धनगर ने कहा,"आपका आज कैसा ये मन हो गया,नीति की नीतियों का पतन हो गया।"इसी क्रम में प्रसिद्ध युवा कवि विनीत गौतम ने मंच पर भक्ति रस की धारा प्रवाहित करते हुए अपनी प्रस्तुति से तालियां बटोरीं,"मिले जो नैन गिरधर से, कहानी हो गई मीरा।बहकर प्रेम धारा से रवानी हो गई मीरा। "गोवर्धन से पधारे अनिल शर्मा जी ने, भक्ति रस के क्रम को गति देते हुए,"म्हारी
लाड़िली अमोल, कारे तेरौ कहा मोल।"भक्ति रस के क्रम को जारी रखते हुए श्री रविन्द्र रसिक जी ने अपने सस्वर पाठ से श्रोताओं का मन मोह लिया, "कृष्ण जिस दिन से तुम द्वारिका को गये, हाल क्यों तुमने राधा को
जाना नहीं।"
कवि सम्मेलन को गति देते हुए, बृज भाषा के प्रचुर लेखन से बृज भाषा साहित्य को संपन्नता देने वाले सत्य प्रकाश शर्मा सोटा नंद जी ने बांसुरी पर काव्य पढ़ते हुए कहा,"नाद सुनी मनमोहन बाँसुरी,भूलि गई सुख राधिका आली।वेद विसारत वेदन भूलत,छूटि गई शिव शंकर ताली।"कवि सम्मेलन को ऊंँचाइयांँ देते हुए ब्रजभाषा के प्रसिद्ध कवि, श्री गोपाल प्रसाद गोप जी नें अपने मधुर कंठ से भक्ति रस भक्ति रस की प्रस्तुति में श्रोताओं का मन मोह लिया। "हम चाकर राधा रानी के,हम गायक कृष्ण मुरारी के,हम चाहे जहाँ रहें मस्ती में काम न दुनिया दारी से।"सेरसा इंटर कालेज के प्राचार्य, राजीव पांडेय जी ने मंच के अनुकूल त्यागी बाबा पर कविता पाठ कर तालियां बटोरीं "बहुला वन की अमर कथा का दृश्य दिखाने आया हूँ, त्यागी बाबा के जीवन का गीत सुनाने आया हूंँ।"
वृंदावन से पधारे ब्रज भाषा के कवि अशोक अज्ञ ने अपनी प्रस्तुति कुछ इस तरह दी,गगन से नीचे उतर कर आ गई गज गामिनी,विरह अंतर प्रेमियों के ह्रदय की स्वामिनी। वृंदावन से पधारे"ब्रजभाषा के प्रसिद्ध वरिष्ठ कवि, ब्रज भूषण चतुर्वेदी जी
ने अपनी मन मोहक प्रस्तुति देते हुए महारास पर रचना पढ़ी,मोहन है नाम उसका वो ब्रज की गोपियों को,नव चन्द्र की छटा में महारास दे गया।"इसके बाद कार्यक्रम के संयोजक कवि देवीप्रसाद गौड़
ने सिध्द संत श्री श्याम दास महा त्यागी जी के अद्भुत व्यक्तित्व पर अपने विचार रखते हुए, पंक्तियां पढ़ीं त्यागी बाबा का कृपा भवन किस्मत के फूल यहाँ पर खिलते हैं।
श्रध्दा से शीश झुका कर तो देखो पुन्य शेष रह जायेंगे पाप यहीं पर जलते हैं।"इसी क्रम में "कार्यक्रम का स़चालन कर रहे कुशल संचालन में सिद्ध हस्त,न्यास के सचिव हरीबाबू ओम् जी ने महारास पर कविता पढ़ते हुए कहा,"मुरली मधुर बजाई मोहन,
अमृत की बर्षात कूँ।पावन योग बनैगौ फिर ते महारास की रात कूँ"
कार्यक्रम के अंत में देश के जाने-माने राष्ट्रीय कवि,श्री रमाशंकर पांडेय जी ने अपनी प्रस्तुति से कवि सम्मेलन को चर्मोत्कर्ष दिया।"मंगल कारिणी कष्ट निवारिणी जीवन की सुख सार है राधा।जीवन धारा में ज्वार जहाँ,वहाँ जीवन खेवन हार है राधा।"कार्यक्रम के अंतिम चरणों में गांँव प्रधान संजय धनगर एवं बाबा के शिष्य शंकरलाला जी ने,जी ने ग्राम पंचायत बाटी की ओर से कवियों का सम्मान किया। बाबा के वरिष्ठ शिष्य श्री अनिल गुप्ता जी मंच पर मुख्य रूप से उपस्थित रहे।
कार्यक्रम के समापन पर पीठाधीश्वर श्री युत सरयू दास जी ने अपने आशीर्वचन के साथ, अंग वस्त्र एवं आकर्षक प्रतीक चिन्हों से सभी कवियों को सम्मानित किया।