गीता शोध संस्थान और भगवत प्रेरणा गुरुकुलम के बटुकों ने किया गीता आधारित प्रेरक मंचन
Gargachary Times
29 October 2026, 20:00
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Dharam
वृंदावन। स्वामी श्री हरिदास प्रेक्षागृह में गीता शोध संस्थान एवं रासलीला अकादमी के सहयोग से भगवत प्रेरणा वैदिक विद्यापीठ गुरुकुलम, गोधूलिपुरम के बटुकों ने श्रीमद्भगवद्गीता के नवम अध्याय के 22वें श्लोक पर आधारित प्रेरक नाट्य मंचन प्रस्तुत किया। गुरुकुल के विद्यार्थियों ने अपने अभिनय के माध्यम से भगवान श्रीकृष्ण द्वारा दिए गए गीता के संदेश को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया। वहीं, गीता शोध संस्थान एवं रासलीला अकादमी के प्रशिक्षु बालक-बालिकाओं ने मयूर नृत्य, डांडिया और महारास की मनोहारी प्रस्तुतियों से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।
गुरुकुल के बटुकों ने आचार्य राघव शुक्ला शास्त्री के सानिध्य में नाट्य मंचन किया। गीता के नवम अध्याय के 22वें श्लोक ‘अनन्याश्चिन्तयन्तो मां ये जनाः पर्युपासते। तेषां नित्याभियुक्तानां योगक्षेमं वहाम्यहम्॥’ के भाव को मंचन के माध्यम से समझाया गया। इस श्लोक में भगवान श्रीकृष्ण अनन्य भाव से उनकी उपासना करने वाले भक्तों के योगक्षेम का दायित्व स्वयं लेने का आश्वासन देते हैं।
गीता मर्मज्ञ महेश चंद्र शर्मा ने मंचन के भाव को स्पष्ट करते हुए कहा कि भगवान श्रीकृष्ण ने गीता में जो उपदेश दिए हैं, उनका महत्व शाश्वत है। गीता का प्रत्येक शब्द और प्रत्येक वाक्य जीवन के लिए प्रेरणादायी है। मंचन के माध्यम से इन्हीं शिक्षाओं को जनमानस तक पहुंचाने का प्रयास किया गया।
गीता शोध संस्थान एवं रासलीला अकादमी के प्रशिक्षुओं ने ब्रज की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और महारास की परंपरा का सजीव प्रदर्शन किया। श्रीकृष्ण की भूमिका में कु. पूनम और अजय शर्मा ने अपने अभिनय से दर्शकों को प्रभावित किया, जबकि राधा की भूमिका में कु. तमन्ना और कु. तान्या सिंह ने नृत्य एवं भावाभिव्यक्ति से प्रस्तुति को आकर्षक बनाया। मयूर नृत्य और डांडिया की प्रस्तुतियों ने कार्यक्रम में ब्रज संस्कृति की छटा बिखेरी।
सांस्कृतिक प्रस्तुतियों में दिशा चौधरी, माही पांडे, वैष्णवी शर्मा, करिश्मा, सोनिया निषाद, जाह्नवी देवनाथ, कनिका देवनाथ, प्रियांशी बघेल, तमन्ना शर्मा, प्रगति शर्मा, तनिष्का वर्मा, गुंजन चौधरी, वंशिता वैश्य, सोनिया चौधरी, भूमिका वर्मा, राधिका वर्मा, हर्षिता, अनन्या नामदेव, राधा रानी मंडल, मोहिनी ठाकुर, हर्षिता नामदेव, सुलक्षणा, अनन्या वर्मा, रुपेश चौधरी, जागृति पांडे, तान्या सिंह, पूनम राजपूत, अभय झा, अभिषेक झा, अजय शर्मा, ऋषभ शर्मा, प्रिया, अध्या अस्थाना, करण, हिमांशु गोस्वामी, दिव्या, वेदागी, अनन्या आर्य, रोहित, ध्रुव निषाद और अशोक चतुर्वेदी सहित अन्य प्रशिक्षुओं ने सहभागिता की।
संगीत पक्ष में आकाश शर्मा ने हारमोनियम, मनमोहन कौशिक ने सारंगी तथा सुनील पाठक और केशव पाठक ने तबले पर संगत की। कु. मानसी राजपूत ने नृत्य संयोजन एवं कोरियोग्राफी का दायित्व निभाया, जबकि ऋतु सिंह ने मंच निर्देशन और श्रृंगार व्यवस्था संभाली। गीता शोध संस्थान के कार्यालय प्रबंधक दीपक शर्मा, रामवीर, बच्चू सिंह, मनीष कुमार और विक्रम दिवाकर सहित अन्य कर्मचारियों ने आयोजन की व्यवस्थाओं में सहयोग किया।
कार्यक्रम के समापन अवसर पर मुख्य अतिथि मथुरा-वृंदावन नगर निगम के उपमहापौर मुकेश सारस्वत सहित धर्माचार्य गौरांग दास, साहित्यकार अजीब अंजुम, श्रीमती अंजना अंजुम, श्रीमती संतोष निशा रावत, बांसुरी संस्था के संस्थापक विनय गोस्वामी, गीता मर्मज्ञ महेश चंद्र शर्मा, भाजपा नेत्री पूजा चौधरी और सोनम चौधरी सहित अनेक गणमान्यजन उपस्थित रहे। इस अवसर पर संगीत प्रशिक्षकों को उत्तर प्रदेश ब्रज तीर्थ विकास परिषद की ओर से अतिथियों ने स्मृति चिह्न भेंट कर सम्मानित किया।
गीता शोध संस्थान एवं रासलीला अकादमी के कोऑर्डिनेटर चंद्र प्रताप सिंह सिकरवार ने कार्यक्रम के संयोजन एवं मंच निर्देशन का दायित्व निभाया। उन्होंने मंचन के समन्वय और आयोजन व्यवस्था की जिम्मेदारी भी संभाली। उत्तर प्रदेश ब्रज तीर्थ विकास परिषद के तकनीकी विशेषज्ञ आर.पी. सिंह, सहायक अभियंता दूधनाथ यादव, ब्रज संस्कृति विशेषज्ञ डॉ. उमेश चंद्र शर्मा तथा दीपक शर्मा, रामवीर सहित अन्य अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने कार्यक्रम के सफल आयोजन में सहयोग किया।