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बरसाना सीएचसी में नर्स से अशोभनीय व्यवहार का मामला पकड़ता गया तूल, जांच समिति के बाद अब निगाहें एसडीएम की कार्रवाई पर

Gargachary Times 28 September 2025, 19:22 324 views
Mathura
बरसाना सीएचसी में नर्स से अशोभनीय व्यवहार का मामला पकड़ता गया तूल, जांच समिति के बाद अब निगाहें एसडीएम की कार्रवाई पर
मथुरा।बरसाना के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) में तैनात संविदा नर्स ने केंद्र प्रभारी डॉ. मनोज वशिष्ठ पर अश्लीलता, मानसिक उत्पीड़न और धमकियों के गंभीर आरोप लगाए हैं। यह मामला अब तूल पकड़ चुका है और जिले के शीर्ष प्रशासनिक अधिकारियों तक पहुंच चुका है। वहीं, सोमवार को उपजिलाधिकारी (एसडीएम) गोवर्धन की अगुवाई में होने वाली सुनवाई में इस पूरे प्रकरण में "दूध का दूध और पानी का पानी" होने की उम्मीद की जा रही है। क्या है मामला आगरा से हाल ही में स्थानांतरित होकर बरसाना सीएचसी में तैनात महिला नर्स का आरोप है कि केंद्र प्रभारी डॉ. वशिष्ठ ने उन्हें व्हाट्सएप पर अश्लील संदेश भेजे और व्यक्तिगत संबंध बनाने का दबाव बनाया। जब नर्स ने विरोध किया, तो उन्हें नौकरी से निकालने की धमकियां दी गईं। इसके बाद उनके कार्य में जानबूझकर त्रुटियाँ निकाली जाने लगीं और उन्हें मानसिक रूप से प्रताड़ित किया गया। पीड़िता द्वारा इस मामले की शिकायत पहले बरसाना थाने में की गई, परंतु कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। इसके बाद 09 सितंबर 2025 को सीएमओ, जिलाधिकारी और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक मथुरा को लिखित शिकायत सौंपी गई। जांच समिति की चुप्पी, उठे सवाल मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) द्वारा चार सदस्यीय जांच समिति का गठन किया गया, जिसने 22 सितंबर को अपनी रिपोर्ट सौंप दी। लेकिन हैरानी की बात है कि इस रिपोर्ट का अब तक कोई खुलासा नहीं किया गया है। समिति के अध्यक्ष डॉ. जाडिया और सदस्य डॉ. आलोक कुमार, डॉक्टर डॉ कर्णिका,डॉ लक्ष्मी ने केवल इतना कहा कि रिपोर्ट सीएमओ को सौंप दी गई है और बाकी जानकारी वही दे सकते हैं। हालांकि, कई बार संपर्क करने के बावजूद सीएमओ द्वारा फोन नहीं उठाया गया, जिससे पीड़िता और जनमानस में प्रशासन की निष्क्रियता को लेकर गहरी नाराजगी है। सीडीओ के आदेश भी छह दिन तक दबे रहे पीड़िता ने जिलाधिकारी को भी ज्ञापन सौंपा, जिस पर मुख्य विकास अधिकारी (सीडीओ) ने 16 सितंबर को जांच के आदेश दिए। लेकिन चौंकाने वाली बात यह रही कि यह आदेश सीएमओ कार्यालय में छह दिन तक दबा रखा गया, जो कि प्रशासनिक पारदर्शिता पर सवाल खड़े करता है। अब निगाहें एसडीएम की निर्णायक कार्रवाई पर बढ़ते जनदबाव और संवेदनशीलता को देखते हुए अब एसडीएम गोवर्धन की अध्यक्षता में नई जांच समिति गठित की गई है, जिसमें थाना प्रभारी विनोद बाबू मिश्रा और सीएमओ डॉ. राधा बल्लभ भी सदस्य हैं। पीड़िता 26 सितंबर शुक्रवार को साक्ष्य सहित एसडीएम कार्यालय पहुंची, जहां उन्होंने अपने बयान दर्ज कराए और धमकी भरे ऑडियो-वीडियो साक्ष्य भी प्रस्तुत किए। "दूध का दूध, पानी का पानी" – सोमवार को हो सकती है निर्णायक कार्यवाही अब सभी की निगाहें सोमवार को एसडीएम गोवर्धन की सुनवाई पर टिकी हैं। माना जा रहा है कि यदि साक्ष्य पर्याप्त पाए गए तो दोषी के खिलाफ कठोर अनुशासनात्मक कार्रवाई हो सकती है। स्वयं सीएमओ डॉ. राधा बल्लभ ने भी बयान दिया है कि यदि जांच में आरोप सही पाए गए तो संबंधित चिकित्सक पर कार्यवाही निश्चित रूप से की जाएगी। --- यह मामला न सिर्फ चिकित्सा संस्थानों में कार्यरत महिला कर्मचारियों की सुरक्षा और गरिमा का विषय है, बल्कि प्रशासनिक पारदर्शिता और जवाबदेही की भी अग्निपरीक्षा है। अब देखना यह है कि सोमवार को एसडीएम गोवर्धन इस संवेदनशील प्रकरण में कितना न्यायसंगत और पारदर्शी निर्णय लेती हैं।
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